पटना: बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए STET परीक्षा से जुड़ी एक बेहद अहम जानकारी सामने आई है। इस बार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अभ्यर्थी आंख बंद करके ज्यादा से ज्यादा सवालों का जवाब देते चले जाएं। दरअसल, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में अपेक्षाकृत ज्यादा गलत उत्तर देने वाले अभ्यर्थियों के स्कोर पर ऋणात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यानी परीक्षा में गलत उत्तर देने पर सीधे अंक नहीं काटे जाएंगे, लेकिन अलग-अलग पालियों में परीक्षा होने के कारण नॉर्मलाइजेशन के दौरान अभ्यर्थियों के स्कोर में बदलाव हो सकता है। यही बदलाव किसी अभ्यर्थी को पास से फेल की सीमा तक भी पहुंचा सकता है।
नेगेटिव मार्किंग नहीं, फिर यह ‘ऋणात्मक प्रभाव’ क्या है?
STET 2026 परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में आयोजित होगी। अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के कारण परीक्षा कई पालियों में कराई जाएगी। अलग-अलग पालियों में प्रश्नपत्र का कठिनाई स्तर एक जैसा नहीं हो सकता। किसी शिफ्ट का पेपर आसान तो किसी दूसरी शिफ्ट का पेपर अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है।ऐसी स्थिति में सभी अभ्यर्थियों के साथ समानता बनाए रखने के लिए रिजल्ट तैयार करने से पहले नॉर्मलाइजेशन किया जाएगा।समिति के अनुसार, नॉर्मलाइजेशन के बाद अभ्यर्थी को जो स्कोर मिलेगा, वही उसका अंतिम प्राप्तांक माना जाएगा। इसी नॉर्मलाइज्ड स्कोर के आधार पर यह तय होगा कि अभ्यर्थी संबंधित कैटेगरी के लिए निर्धारित न्यूनतम उत्तीर्णता अंक हासिल कर पाया है या नहीं।
76 नंबर आए, फिर भी 75 से नीचे पहुंचा स्कोर तो फेल!
इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए STET की 150 अंकों की परीक्षा में किसी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी का रॉ स्कोर 76 अंक आया। सामान्य वर्ग के लिए अगर न्यूनतम उत्तीर्णता प्रतिशत 50 फीसदी है तो 150 में पास होने के लिए कम से कम 75 अंक चाहिए।लेकिन नॉर्मलाइजेशन के बाद उसी अभ्यर्थी का स्कोर अगर घटकर 74.90 हो जाता है, तो वह 75 अंक की निर्धारित सीमा पार नहीं कर पाएगा। ऐसे में रॉ स्कोर 76 होने के बावजूद अभ्यर्थी को अनुत्तीर्ण माना जा सकता है।यही वजह है कि इस बार अभ्यर्थियों के लिए केवल ज्यादा सवाल हल करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि प्रश्नों को समझकर उत्तर देना भी बेहद जरूरी होगा।
ज्यादा गलत जवाब से स्कोर पर पड़ सकता है असर
समिति ने स्पष्ट किया है कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में अपेक्षाकृत अधिक सवालों के गलत उत्तर दिए जाने की स्थिति में स्कोर पर ऋणात्मक प्रभाव आ सकता है।हालांकि इसे पारंपरिक Negative Marking नहीं माना जाएगा। परीक्षा में गलत उत्तर के लिए सीधे निर्धारित अंक काटने की व्यवस्था अलग विषय है, जबकि नॉर्मलाइजेशन में अलग-अलग पालियों के कठिनाई स्तर और प्रदर्शन के आधार पर स्कोर को सामान्यीकृत किया जाता है।इसलिए अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान तुक्का लगाने से बचने और जिन सवालों का उत्तर पूरी तरह मालूम हो, उन्हें प्राथमिकता देने की रणनीति अपनानी चाहिए।
15 सितंबर तक ही आवेदन का मौका
STET 2026 के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, उन्हें अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।बोर्ड ने अभ्यर्थियों को यह भी सलाह दी है कि ऑनलाइन आवेदन में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को रिजल्ट जारी होने तक सुरक्षित रखें। भविष्य में परीक्षा से संबंधित जरूरी सूचना इन्हीं माध्यमों से मिल सकती है।इसके अलावा अभ्यर्थियों को आवेदन फॉर्म की हार्ड कॉपी डाउनलोड करके सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया गया है।
STET में उम्र सीमा को लेकर भी बोर्ड का निर्देश
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि STET परीक्षा हर साल आयोजित की जा रही है। ऐसे में अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में अलग से छूट नहीं मिलेगी।कुल मिलाकर STET 2026 में अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ा सबक यही है कि “नेगेटिव मार्किंग नहीं है” सोचकर हर सवाल में अनुमान लगाना भारी पड़ सकता है। क्योंकि अंतिम रिजल्ट रॉ स्कोर से नहीं, बल्कि नॉर्मलाइजेशन के बाद प्राप्त स्कोर के आधार पर तैयार किया जाएगा। ऐसे में परीक्षा में एक-एक सवाल सोच-समझकर हल करना जरूरी होगा। खासकर उन अभ्यर्थियों के लिए, जिनका स्कोर पासिंग मार्क्स के आसपास रहने की संभावना है, नॉर्मलाइजेशन रिजल्ट का सबसे अहम फैक्टर साबित हो सकता है।