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11-Mar-2026 12:37 PM
By First Bihar
Bihar News : बिहार की सड़कों की तस्वीर आने वाले समय में पूरी तरह बदलने वाली है। राज्य सरकार ने राज्य में बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित करने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए खुद का ‘स्टेट हाईवे अधिनियम’ बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस नए कानून के लागू होने के बाद बिहार भी उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां राज्य सरकार अपने स्तर पर एक्सप्रेस-वे का निर्माण और संचालन कर सकती है।
अभी तक बिहार में सड़कों के निर्माण और संचालन के लिए मुख्य रूप से नेशनल हाईवे (NH) से जुड़े नियम ही प्रभावी रहे हैं। लेकिन नए स्टेट हाईवे एक्ट के लागू होने के बाद राज्य सरकार को अपनी योजनाओं के तहत बड़े एक्सप्रेस-वे बनाने का अधिकार मिल जाएगा। सरकार की योजना है कि सात निश्चय-3 कार्यक्रम के अंतर्गत प्रस्तावित पांच बड़े एक्सप्रेस-वे का निर्माण इसी कानून के तहत किया जाए।
एक्सप्रेस-वे के लिए बनेगी स्वतंत्र प्राधिकरण
नए अधिनियम के तहत बिहार में एक्सप्रेस-वे के निर्माण और संचालन के लिए एक स्वतंत्र ‘एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण’ बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस दिशा में सड़क निर्माण विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने हाल ही में महाराष्ट्र का दौरा किया था, जहां उन्होंने वहां के एक्सप्रेस-वे मॉडल का अध्ययन किया।
महाराष्ट्र में एक्सप्रेस-वे के निर्माण और संचालन के लिए अलग प्राधिकरण कार्य करता है, जो परियोजनाओं को तेजी से पूरा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बिहार सरकार भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है, ताकि राज्य में आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों का निर्माण तेजी से हो सके।
निजी भागीदारी से बनेगा सड़क नेटवर्क
नए स्टेट हाईवे अधिनियम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि राज्य सरकार पर इन परियोजनाओं का वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार इन एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की योजना बना रही है।
इसके तहत निजी कंपनियां सड़क निर्माण में निवेश करेंगी और बदले में टोल वसूली के जरिए अपनी लागत निकालेंगी। कई परियोजनाओं को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत भी बनाया जा सकता है, जिसमें सरकार और निजी कंपनियां मिलकर परियोजना का वित्तीय प्रबंधन करती हैं। टोल वसूली और संचालन से जुड़े नियम भी इसी नए कानून के दायरे में तय किए जाएंगे।
स्टेट हाईवे घोषित करने के तय होंगे मानक
राज्य सरकार नए कानून के तहत स्टेट हाईवे (SH) घोषित करने के लिए स्पष्ट और कड़े मानक तय करने जा रही है। इसके अनुसार वही सड़क स्टेट हाईवे घोषित की जाएगी, जो कम से कम दो नेशनल हाईवे को आपस में जोड़ती हो या फिर किसी महत्वपूर्ण शहर को राज्य की राजधानी पटना से जोड़ती हो। इसके अलावा राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों और धार्मिक केंद्रों तक जाने वाली सड़कों को भी स्टेट हाईवे की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इससे राज्य के पर्यटन और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सड़क निर्माण से जुड़े मानकों को भी स्पष्ट रूप से तय किया जाएगा। स्टेट हाईवे की चौड़ाई कम से कम 7.5 मीटर (दो लेन) अनिवार्य होगी। वहीं भविष्य में सड़क को चौड़ा करने के लिए 30 से 60 मीटर तक अतिरिक्त जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी, ताकि आने वाले वर्षों में यातायात बढ़ने पर सड़क को आसानी से विस्तार दिया जा सके।
120 किमी की रफ्तार से दौड़ेंगी गाड़ियां
राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बेहतर सड़कें बनाना ही नहीं है, बल्कि बिहार में आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी गति देना है। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे सामान्य सड़कों से ऊंचे बनाए जाएंगे और इन पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकेगी।अधिकांश एक्सप्रेस-वे 6 या 8 लेन के होंगे, जिससे लंबी दूरी की यात्रा तेज और सुरक्षित हो सकेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने और निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी।
विकास की नई दिशा की ओर बिहार
उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों ने एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के जरिए औद्योगिक और आर्थिक विकास की नई राह बनाई है। बिहार सरकार भी अब उसी दिशा में कदम बढ़ा रही है। नए स्टेट हाईवे अधिनियम के लागू होने के बाद राज्य में आधुनिक सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार होने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि बेहतर सड़कें न केवल यात्रा को आसान बनाएंगी, बल्कि उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी। आने वाले वर्षों में बिहार का सड़क ढांचा देश के विकसित राज्यों की तरह आधुनिक और तेज़ रफ्तार वाला बनने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ सकता है।