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Bihar News: सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर सख्ती, अब DIG जारी करेंगे टेकडाउन नोटिस

बिहार सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाह और भ्रामक कंटेंट पर सख्ती बढ़ा दी है। अब साइबर क्राइम सेल के डीआईजी को फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप को टेकडाउन नोटिस जारी करने का अधिकार मिल गया है।

15-Mar-2026 12:26 PM

By First Bihar

Bihar News : बिहार में सोशल मीडिया के जरिए अफवाह, भ्रामक जानकारी और आपत्तिजनक कंटेंट फैलाने वालों पर अब सरकार सख्ती करने जा रही है। राज्य सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैल रहे गैरकानूनी और समाज में तनाव पैदा करने वाले कंटेंट को रोकने के लिए एक अहम फैसला लिया है। इसके तहत साइबर क्राइम और सुरक्षा इकाई (CCSU) के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को राज्य का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।


गृह विभाग (विशेष शाखा) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब डीआईजी स्तर के अधिकारी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सीधे ‘टेकडाउन नोटिस’ जारी करने का अधिकार दे दिया गया है। यह अधिकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79(3)(b) और आईटी नियम 2021 में किए गए प्रावधानों के तहत दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भड़काऊ सामग्री पर तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी।


भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर होगी तुरंत कार्रवाई

नई व्यवस्था के अनुसार अगर किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट पाया जाता है जो कानून का उल्लंघन करता है, सांप्रदायिक तनाव पैदा करता है या समाज में नफरत और अफवाह फैलाने का काम करता है, तो साइबर क्राइम सेल के डीआईजी उस प्लेटफॉर्म को तुरंत उसे हटाने का निर्देश देंगे। इस निर्देश को ही ‘टेकडाउन नोटिस’ कहा जाता है। अब तक इस स्तर के अधिकारी के पास सीधे टेकडाउन नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं था, जिसके कारण कई मामलों में कार्रवाई में देरी हो जाती थी। लेकिन अब यह प्रक्रिया तेज और प्रभावी होने की उम्मीद है।


सोशल मीडिया कंपनियों के लिए भी सख्त संदेश

सरकार ने साफ कर दिया है कि फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सरकार के आदेशों का पालन करना होगा। यदि कोई कंपनी टेकडाउन नोटिस मिलने के बाद भी आपत्तिजनक या गैरकानूनी कंटेंट को नहीं हटाती है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।


आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को “सेफ हार्बर” यानी कानूनी सुरक्षा मिलती है। इसका मतलब यह है कि यूजर्स द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म सीधे जिम्मेदार नहीं होते। लेकिन यदि वे सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करते, तो यह कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है और कंपनी पर मुकदमा चलाया जा सकता है।


केंद्रीकृत मॉनिटरिंग की व्यवस्था

नई व्यवस्था में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की भी कोशिश की गई है। डीआईजी द्वारा की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट सीधे आईटी सचिव को भेजी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किस मामले में क्या कार्रवाई हुई और कितने कंटेंट हटाए गए। सरकार का कहना है कि इससे सोशल मीडिया की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई भी की जा सकेगी।


जिलों में भी बढ़ेगी निगरानी

राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर भी सोशल मीडिया की निगरानी मजबूत करने का फैसला लिया है। इसके तहत सभी जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें।


अगर किसी पोस्ट, वीडियो या मैसेज से अफवाह फैलने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होती है, तो उसकी रिपोर्ट तुरंत मुख्यालय को भेजी जाएगी। इसके बाद संबंधित प्लेटफॉर्म को टेकडाउन नोटिस जारी किया जा सकेगा।


अफवाह रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया आज सूचना का सबसे तेज माध्यम बन चुका है, लेकिन इसके जरिए कई बार गलत जानकारी और अफवाहें भी तेजी से फैलती हैं। ऐसे में बिहार सरकार का यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर फैलने वाले भ्रामक और भड़काऊ कंटेंट पर तेजी से नियंत्रण पाया जा सकेगा और लोगों के बीच अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई भी संभव होगी।