PATNA: बिहार में सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया के क्षेत्र में काम करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अच्छी खबर है। ‘बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया नीति/नियमावली’ में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों का प्रचार करने वाले पात्र और एम्पैनल्ड सोशल मीडिया क्रिएटर्स को व्यूज के आधार पर भुगतान किया जा सकता है।
राज्य सरकार द्वारा सोशल मीडिया, वेब पोर्टल एवं अन्य ऑनलाईन मीडिया के माध्यम से जनहितकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार को और अधिक प्रभावी एवं व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाईन मीडिया (संशोधन) नियमावली-2026 में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।
संशोधन के तहत नियमावली की कंडिका-8 (vi), 11, 11 (A) एवं 11 (B) में आंशिक संशोधन करते हुये सोशल मीडिया पोस्ट/वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त राशि के भुगतान को अधिक स्पष्ट किया गया है। इसके अतिरिक्त नयी कंडिका-14 (A), 14(B) एव 14 (C) जोड़ी जा रही है। इनके माध्यम से सूचीबद्ध सोशल मीडिया हैंडल/पैज चैनल के फॉलोअर्स की समय-समय पर जांच, विशेष परिस्थितियों में गैर सूचीबद्ध प्रतिष्ठित सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स को विज्ञापन देने तथा नियमावली में किसी अस्पष्टता की स्थिति में आवश्यक स्पष्टीकरण की व्यवस्था की गई है। इन संशोधनों का उद्देश्य सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाईन भीडिया के माध्यम से सरकारी योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार को अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख्य बनाना है।
1 लाख व्यूज पर अधिकतम ₹10 हजार का भुगतान
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों से जुड़े पात्र कंटेंट पर 1 लाख व्यूज के लिए अधिकतम ₹10,000 तक का भुगतान किया जा सकता है। इसी दर के हिसाब से 10 लाख व्यूज वाले कंटेंट के लिए राशि अधिकतम ₹1 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह राशि हर वायरल वीडियो या पोस्ट पर अपने आप नहीं मिलेगी। भुगतान के लिए सरकार की ओर से निर्धारित पात्रता, प्लेटफॉर्म, कंटेंट की गुणवत्ता और व्यूज के आधिकारिक सत्यापन जैसे मानकों को पूरा करना होगा। अंतिम भुगतान इन्हीं नियमों के आधार पर तय किया जाएगा।
क्रिएटर्स को कराना होगा एम्पैनलमेंट
इस योजना का लाभ लेने के लिए व्यक्तिगत सोशल मीडिया क्रिएटर्स और पंजीकृत कंपनियों को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से एम्पैनल यानी सूचीबद्ध होना जरूरी होगा। बिना एम्पैनलमेंट या विभागीय अनुमति के बनाए गए सामान्य सोशल मीडिया कंटेंट पर इस भुगतान व्यवस्था का लाभ मिलने की संभावना नहीं है। इसलिए इच्छुक क्रिएटर्स को सरकार की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
किन प्लेटफॉर्म पर लागू होगी नीति?
कैबिनेट से संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद अब विस्तृत अधिसूचना का इंतजार है। सरकार की ओर से Notification जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आवेदन की पूरी प्रक्रिया क्या होगी और किन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इस नीति के तहत शामिल किया जाएगा। YouTube, Facebook, Instagram और X जैसे प्लेटफॉर्म पर फॉलोअर्स और व्यूज की गणना किस तरह होगी, इसके मानक भी विस्तृत नियमों में स्पष्ट किए जाएंगे।
बिहार के कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नया अवसर
नई भुगतान व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार में डिजिटल कंटेंट बनाने वाले युवाओं और सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए कमाई का नया अवसर पैदा हो सकता है। सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में भी इससे मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ₹10,000 प्रति 1 लाख व्यूज अधिकतम संभावित भुगतान है, कोई निश्चित या स्वतः मिलने वाली राशि नहीं।
अंतिम भुगतान सरकार की पात्रता, कंटेंट की स्वीकृति और आधिकारिक व्यूज सत्यापन सहित तय नियमों पर निर्भर करेगा। राज्य सरकार द्वारा सोशल मीडिया, वेब पोर्टल एवं अन्य ऑनलाईन मीडिया के माध्यम से जनहितकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार को और अधिक प्रभावी एवं व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाईन मीडिया (संशोधन) नियमावली-2026 में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।