Bihar News : बिहार में रोजगार और आमदनी बढ़ाने के लिए अब सरकार का फोकस सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा। छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को भी विकास की रफ्तार का बड़ा इंजन बनाने की तैयारी है। ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट मिलने के बाद अब इसकी सिफारिशों को आगामी बजट में जगह देने की तैयारी शुरू हो गई है।
कमेटी के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार ने डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को रिपोर्ट सौंपी। सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि रिपोर्ट में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए अगले वित्तीय वर्ष के बजट में आवश्यक राशि का प्रावधान किया जा सकता है। यानी आने वाले समय में बिहार के छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए सरकारी सहायता का दायरा बढ़ सकता है।
कमेटी ने साफ तौर पर कहा है कि अगर बिहार को रोजगार और आय के मोर्चे पर बड़ा बदलाव करना है तो बड़े उद्योगों के साथ छोटे उद्योगों को भी समान महत्व देना होगा। इसके लिए छोटे उद्योगों के विस्तार, नई इकाइयों की स्थापना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में अगले पांच वर्षों तक बिहार की जीएसडीपी यानी सकल राज्य घरेलू उत्पाद की विकास दर को कम से कम 16 फीसदी के आसपास बनाए रखने की जरूरत बताई गई है। कमेटी का मानना है कि लगातार तेज आर्थिक विकास के बिना ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल होगा। बिहार की विकास दर पिछले वर्षों में तेज रही है। 2022-23 में राज्य की वर्तमान मूल्यों पर विकास दर 17.9 फीसदी दर्ज की गई थी, जबकि 2024-25 में यह 13.1 फीसदी रही।
कमेटी ने यह भी माना कि बिहार के सभी जिलों की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं है। इसलिए विकास की रफ्तार को सिर्फ कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित रखने के बजाय हर जिले की अपनी क्षमता के हिसाब से अलग योजना तैयार करने की जरूरत है। इससे क्षेत्रीय असमानता कम करने और पिछड़े इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में उद्योग लगाने की प्रक्रिया को और आसान बनाने की सिफारिश की गई है। छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को मंजूरी देने की प्रक्रिया जिला और प्रमंडल स्तर पर ही पूरी करने का सुझाव दिया गया है, ताकि उद्यमियों को छोटे कारोबार के लिए राजधानी या बड़े सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
कमेटी ने बड़े उद्योगों की स्थापना को भी जरूरी बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में बड़े निवेश और उद्योगों के साथ छोटे उद्योगों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाना चाहिए। इससे बड़े उद्योगों के आसपास सप्लाई, सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े छोटे कारोबार भी विकसित हो सकेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ सकता है।
डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में गठित कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार अमल करेगी। इसके लिए बजट में राशि का इंतजाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास की निगरानी आंकड़ों के आधार पर सभी जिलों में की जाएगी। कृषि, जल प्रबंधन, बिजली और कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों को भी विकास की रणनीति में महत्वपूर्ण माना गया है।
दरअसल, ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ का लक्ष्य सात निश्चय-3 का हिस्सा है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनवरी 2026 में नवीन कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इसमें पूर्व सांख्यिकी सचिव टीसीए अनंत और आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर संकेत महापात्रा शामिल थे। बिहार में पहले से ही एमएसएमई को बढ़ावा देने की दिशा में नीतिगत तैयारियां चल रही हैं। राज्य की प्रस्तावित एमएसएमई नीति में नए उद्योगों को पूंजी सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन देने की योजना है।
अब नई रिपोर्ट के बाद नजर इस बात पर होगी कि आगामी बजट में छोटे उद्योगों के लिए कितना फंड रखा जाता है और कमेटी की सिफारिशें जमीन पर किस तरह लागू होती हैं। अगर योजना प्रभावी तरीके से आगे बढ़ती है तो गांव, प्रखंड और जिला स्तर पर छोटे कारोबार रोजगार के नए केंद्र बन सकते हैं।