PATNA: बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति ने राज्य के छह विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को कार्यकाल समाप्त होने के करीब किसी भी तरह के नीतिगत फैसले लेने से बचने का निर्देश दिया है। इसके तहत नियुक्ति, स्थानांतरण, नई योजनाओं और वित्तीय दायित्व से जुड़े नए कार्यों पर रोक लगाई गई है। विशेष परिस्थिति में ऐसे निर्णय लेने से पहले कुलाधिपति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
राज्यपाल सचिवालय की ओर से 27 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में यह निर्देश दिया गया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र भेजकर आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
इन छह विश्वविद्यालयों को जारी हुआ निर्देश
राज्यपाल सचिवालय की ओर से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा; जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा; भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा; आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना; कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा और बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपतियों को पत्र भेजा गया है।
पत्र में कहा गया है कि कुलपतियों का कार्यकाल निकट भविष्य में समाप्त होने की स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालयों में किसी भी तरह का नीतिगत निर्णय, नियुक्ति या स्थानांतरण नहीं किया जाए। इसके साथ ही ऐसी नई योजनाओं या कार्यों को भी मंजूरी नहीं दी जाए, जिनमें वित्तीय दायित्व तय करने या उसका निर्वहन करने की जरूरत हो।
विशेष परिस्थिति में लेनी होगी पूर्व अनुमति
राज्यपाल सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में विश्वविद्यालय के कार्यहित में नीतिगत या वित्तीय निर्णय लेना जरूरी हो, तो कुलाधिपति से पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इस आदेश की प्रतिलिपि बिहार के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को भी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।