अरवल में हम पार्टी का सदस्यता अभियान तेज, गरीब चौपाल यात्रा से जनता की समस्याओं को मिलेगा मंच: डॉ. संतोष सुमन रोहतास पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 7 कुख्यात अपराधियों को दबोचा, कई कांडों का किया खुलासा मुजफ्फरपुर कांग्रेस में ‘दो’ जिलाध्यक्ष? आलाकमान की सूची ने बढ़ाया कन्फ्यूजन, चर्चाओं का बाजार गर्म आरा-मोहनिया नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: ट्रक की टक्कर से 10 वर्षीय बच्ची की मौत, मामा घायल भारत-नेपाल सीमा पर SSB की बड़ी कार्रवाई, अवैध करेंसी के साथ 2 तस्करों को दबोचा पटना में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 128 नशीले इंजेक्शन के साथ 2 गिरफ्तार मुजफ्फरपुर सब्जी मंडी में युवती की गोली मारकर हत्या, प्रेम-प्रसंग में मर्डर की आशंका BIHAR CRIME: अरवल में दिनदहाड़े फायरिंग, इलाके में मचा हड़कंप बरारी में राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता का भव्य स्वागत, विकास के मुद्दों पर हुई अहम चर्चा बिहार सरकार की सख्ती का असर: काम पर लौटे 30 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारी, बाकी 31 के लिए डेडलाइन तय; क्या बोले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा?
06-Feb-2026 06:42 PM
By First Bihar
PATNA: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शहीद सैनिकों के आश्रितों के साथ सरकारी जमीन की बंदोबस्ती को लेकर नई और स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। विभाग स्तर पर गठित समिति के विचार-विमर्श के बाद जारी निर्देशों के अनुसार, युद्ध में वीरगति प्राप्त सैनिकों के आश्रितों को गृह जिला के गृह प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए 1 एकड़ या आवासीय उपयोग के लिए 5 डिसमिल सरकारी जमीन बंदोबस्त की जाएगी।
सचिव जय सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह सुविधा उन सैनिकों के आश्रितों को मिलेगी, जिन्होंने कम-से-कम छह माह तक लगातार सैनिक सेवा की हो और कार्यरत रहते हुए युद्ध में शहादत पाई हो। ऐसे मामलों में आश्रितों से सलामी ली जाएगी, लेकिन पाँच वर्षों तक वार्षिक लगान नहीं लिया जाएगा।
निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल सेना ही नहीं, बल्कि युद्धकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अन्य बलों जैसे बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, बिहार मिलिट्री पुलिस, टेरिटोरियल आर्मी, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स, बॉर्डर स्काउट्स, बीआरएफ, लोक सहायक सेवा, एनसीसी, होमगार्ड्स और असम राइफल्स के जवान यदि युद्ध में वीरगति प्राप्त करते हैं, तो उनके आश्रित भी इसी प्रावधान के तहत भूमि बंदोबस्ती के पात्र होंगे। हालांकि, इसके लिए सेलर्स, सोल्जर्स एवं एयरमेन बोर्ड की अनुशंसा और न्यूनतम छह माह की संतोषजनक सेवा का प्रमाण-पत्र अनिवार्य होगा।
विभाग ने यह शर्त भी रखी है कि भूमि बंदोबस्ती से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि आश्रित बिहार राज्य का निवासी हो और उसके पास आवास हेतु पहले से निजी जमीन न हो। यदि निजी आवासीय जमीन उपलब्ध पाई जाती है, तो बंदोबस्ती नहीं की जाएगी। समाहर्ता को पूर्ववत् ही इस प्रकार की भूमि बंदोबस्ती का अधिकार रहेगा, लेकिन यह केवल ग्रामीण क्षेत्र की सरकारी, विवादमुक्त जमीन पर ही लागू होगा।
साथ ही, यह भी अनिवार्य किया गया है कि चयनित भूमि भूदान, भू-हदबंदी, सैरात, कब्रिस्तान, श्मशान, धार्मिक स्थलों, अतिक्रमण और न्यायालयीन विवाद से पूरी तरह मुक्त हो। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस आदेश की तिथि से पूर्व सैनिकों के साथ भूमि बंदोबस्ती से संबंधित सभी पुराने आदेश और पत्र स्वतः प्रभावहीन माने जाएंगे। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार शहीद सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। नई बंदोबस्ती प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों के आश्रितों को उनके गृह जिले में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए भूमि उपलब्ध हो। हमने स्पष्ट, पारदर्शी और व्यवहारिक मानक तय किए हैं, ताकि पात्र परिवारों को बिना अनावश्यक विलंब के तत्काल लाभ मिल सके। यह निर्णय हमारे सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है।