Bihar weather update : बिहार में इन दिनों कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को पूरी तरह से बेहाल कर दिया है। प्रदेश में ठंड का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि कई जगहों पर तापमान पहाड़ी इलाकों को भी पीछे छोड़ चुका है। गया का न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से भी कम दर्ज किया गया। वहीं, वाल्मीकिनगर, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल और अररिया जैसे इलाकों में भीषण शीत दिवस (कोल्ड डे) की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने हालात को देखते हुए 14 जनवरी तक पूरे बिहार में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है।
ठंड और कोहरे का दोहरा प्रहार
प्रदेश में उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के चलते तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सुबह और देर रात घना कोहरा छा रहा है, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई है। कई जिलों में दृश्यता 50 मीटर से भी नीचे चली गई है। इसका सीधा असर सड़क, रेल और हवाई यातायात पर पड़ रहा है। ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं, वहीं कई जगहों पर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और दरभंगा जैसे बड़े शहरों में भी सुबह के समय कोहरा इतना घना रहता है कि लोगों को घरों से निकलने में भारी परेशानी हो रही है।
गया बना सबसे ठंडा
इस बार गया बिहार का सबसे ठंडा जिला बनकर उभरा है। न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से कई डिग्री नीचे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कई वर्षों में इतनी ठंड उन्होंने नहीं देखी। सुबह के समय लोग अलाव जलाकर ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वाल्मीकिनगर और सीमावर्ती इलाकों में शीत दिवस
वाल्मीकिनगर, जो नेपाल सीमा से सटा हुआ इलाका है, वहां शीत दिवस की स्थिति बनी हुई है। पूरे दिन धूप नहीं निकल रही, जिससे ठंड और ज्यादा बढ़ गई है। ठंडी हवाओं के कारण शरीर में कंपकंपी छूट रही है। यहां के ग्रामीण इलाकों में लोग दिनभर अलाव के सहारे ही समय बिता रहे हैं। खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए भी यह ठंड बड़ी चुनौती बन गई है।
स्वास्थ्य पर असर
भीषण ठंड का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सर्दी-खांसी, बुखार, अस्थमा और हृदय रोगियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि बुजुर्गों और छोटे बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने, सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने और गर्म भोजन लेने की सलाह दी जा रही है।
प्रशासन अलर्ट मोड में
मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट के बाद राज्य प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में है। कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, तो कहीं-कहीं प्राथमिक विद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जा रही है। गरीब और बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों में अतिरिक्त कंबल और गर्म पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
किसानों की चिंता
ठंड और कोहरे का असर खेती पर भी पड़ रहा है। रबी फसलों पर पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। खासकर आलू, सरसों और सब्जी की फसलों को नुकसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसलों की सिंचाई समय पर करें और पाले से बचाव के उपाय अपनाएं।
आगे कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो-तीन दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है। न्यूनतम तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। 14 जनवरी के बाद ही मौसम में थोड़ा सुधार होने के संकेत हैं, लेकिन तब तक ठंडी हवाएं और कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ाते रहेंगे।
कुल मिलाकर, बिहार इस समय भीषण शीत लहर की चपेट में है। प्रशासन, डॉक्टर और मौसम विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं। जब तक मौसम सामान्य नहीं होता, तब तक सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।