Bihar News : बिहार में अब विकास की तस्वीर सिर्फ राज्य और जिला स्तर के आंकड़ों से तय नहीं होगी। सरकार की तैयारी है कि विकास की वास्तविक स्थिति को प्रखंड और ग्राम पंचायत स्तर तक मापा जाए। इसके लिए गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, स्वच्छता, लैंगिक समानता और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मानकों से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे यह पता चल सकेगा कि बिहार के किस जिले, प्रखंड या पंचायत में कौन-सा विकास लक्ष्य पीछे है और किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा सुधार की जरूरत है।


योजना एवं विकास विभाग इस दिशा में तैयारी कर रहा है। अभी सतत विकास लक्ष्यों यानी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG) की प्रगति का आकलन मुख्य रूप से राज्य और जिला स्तर पर किया जाता है। अब इस व्यवस्था को और नीचे तक ले जाने की तैयारी है। प्रखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर भी विकास के अलग-अलग मानकों का आकलन किया जाएगा। इससे कागज पर दिखने वाले विकास के आंकड़ों के साथ-साथ गांवों की जमीनी तस्वीर भी सामने आ सकेगी।


पंचायत स्तर पर गरीबी, स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ पेयजल, स्वच्छता और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी नजर रखी जाएगी। इसके अलावा लैंगिक समानता और पर्यावरण से जुड़े आंकड़ों को भी निगरानी में शामिल किया जाएगा। यानी सरकार यह जानने की कोशिश करेगी कि किसी पंचायत में लोगों को बुनियादी सुविधाएं कितनी मिल रही हैं और किन क्षेत्रों में अभी भी सुधार की जरूरत है।


इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी बड़े जिले के औसत आंकड़े के पीछे छिपी स्थानीय समस्याएं सामने आ जाएंगी। मसलन, किसी जिले में शिक्षा का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है, लेकिन उसी जिले की किसी पंचायत में स्कूल, शिक्षक या दूसरी जरूरी सुविधाओं की कमी हो सकती है। पंचायत स्तर पर आंकड़े उपलब्ध होने के बाद ऐसी कमियों की पहचान करना आसान होगा।


नीति आयोग के नवीनतम SDG India Index 2023-24 में बिहार का संयुक्त स्कोर 57 रहा है। वर्ष 2018 में बिहार का स्कोर 48 था। इस तरह छह साल में राज्य के SDG स्कोर में नौ अंकों का सुधार हुआ है। बिहार छह SDG लक्ष्यों में फ्रंट रनर श्रेणी में भी पहुंच चुका है। इनमें स्वास्थ्य, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, स्वच्छ ऊर्जा, जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन, भूमि पर जीवन तथा शांति, न्याय और मजबूत संस्थान जैसे लक्ष्य शामिल हैं।


हालांकि राज्य का स्कोर सुधरने के बावजूद सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विकास का लाभ हर इलाके तक समान रूप से पहुंचे। राज्य का औसत आंकड़ा कई बार अलग-अलग जिलों, प्रखंडों और पंचायतों के बीच मौजूद अंतर को पूरी तरह नहीं दिखा पाता। यही वजह है कि अब स्थानीय स्तर पर आंकड़े जुटाने और विकास की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


अगर किसी पंचायत में शिक्षा का स्तर कमजोर पाया जाता है, तो वहां की जरूरत के हिसाब से शिक्षा संबंधी योजनाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा। इसी तरह किसी इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी सामने आती है तो वहां स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की योजना बनाई जा सकती है। रोजगार, पेयजल और स्वच्छता के मामले में भी स्थानीय जरूरतों के मुताबिक योजनाओं की प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी।


इस पूरी कवायद की सफलता काफी हद तक सही और विश्वसनीय आंकड़े जुटाने पर निर्भर करेगी। पंचायत स्तर पर आंकड़े समय पर और सही तरीके से उपलब्ध होंगे, तभी सरकार यह तय कर पाएगी कि किस क्षेत्र में किस तरह के हस्तक्षेप की जरूरत है। इससे योजनाओं की निगरानी के साथ-साथ उनके असर का आकलन भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।


कुल मिलाकर बिहार में SDG की निगरानी को पंचायत स्तर तक ले जाने की तैयारी विकास की रणनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। अब विकास की तस्वीर सिर्फ पटना या जिला मुख्यालय के आंकड़ों से नहीं, बल्कि गांवों की जमीन से जुटाए गए आंकड़ों से सामने आएगी। इससे सरकार के सामने यह साफ तस्वीर होगी कि किस पंचायत में विकास की रफ्तार तेज है और कहां अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।