Bihar News : बिहार के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। शिक्षा विभाग ने उच्च प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर नया मानक लागू किया है, जिसके तहत प्रत्येक कक्षा में न्यूनतम एक शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य होगी।
शिक्षा विभाग के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, उच्च प्राथमिक कक्षाओं में विज्ञान एवं गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। विभाग का मानना है कि विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता से छात्रों की पढ़ाई बेहतर होगी और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आएगा।
नई व्यवस्था शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई है। विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विद्यालयों में छात्रों की संख्या और विषयों की आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
नए मानक के तहत प्रत्येक कक्षा में कम से कम एक शिक्षक होना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा यदि किसी विद्यालय में कक्षा 6 से 8 तक कुल छात्रों की संख्या 105 से 140 के बीच होती है तो वहां एक अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी।
इसी प्रकार यदि किसी विद्यालय में छात्र संख्या 140 से 175 के बीच होती है तो एक और अतिरिक्त शिक्षक की व्यवस्था की जाएगी। यह शिक्षक विद्यालय की आवश्यकता के अनुसार संस्कृत अथवा उर्दू विषय का होगा। छात्र संख्या 175 से अधिक होने की स्थिति में विभाग द्वारा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक निर्धारण के लिए कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालांकि प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। कक्षा 1 से 8 तक संचालित प्रारंभिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद एक ही रहेगा और पूरे विद्यालय का संचालन उसी के अधीन होगा।
विभागीय समीक्षा में यह पाया गया कि राज्य के कई विद्यालयों में निर्धारित मानकों के अनुरूप पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक कई विषयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी समस्या को दूर करने के लिए नई शिक्षक निर्धारण व्यवस्था लागू की गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब वास्तविक नामांकन संख्या, कक्षा संरचना और विषयवार जरूरतों के आधार पर शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इससे छात्रों को विषय विशेषज्ञ शिक्षकों से पढ़ने का अवसर मिलेगा और शिक्षण व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर द्वारा जारी पत्र में सभी जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को नए मानकों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करना प्राथमिकता होगी।
शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा इस नए मानक को मंजूरी दिए जाने के बाद अब राज्य के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में इसी व्यवस्था के आधार पर शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस निर्णय से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध हो सकेगा।