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Bihar News : बिहार के सरकारी स्कूलों में हुई बड़ी गलती ! लाखों स्टूडेंट को नहीं मिलेगा इन योजनाओं का लाभ; जानिए क्या है पूरी खबर

बिहार में 4 लाख से अधिक छात्रों के डाटा में गड़बड़ी। ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर सुधार नहीं होने से पोशाक, साइकिल और छात्रवृत्ति योजनाएं अटक सकती हैं।

02-Mar-2026 08:58 AM

By First Bihar

Bihar News : बिहार के सरकारी स्कूलों की लापरवाही का खामियाजा लाखों छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ सकता है। कक्षा एक से 10 तक के चार लाख से अधिक बच्चों के नाम, पिता के नाम, आधार संख्या समेत अन्य जरूरी ब्योरे अब तक सही नहीं हो पाए हैं। यदि समय रहते इन त्रुटियों को दुरुस्त नहीं किया गया तो ये बच्चे पोशाक, छात्रवृत्ति और साइकिल जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं से वंचित रह सकते हैं।


शिक्षा विभाग के अनुसार चालू सत्र 2025-26 में 2.52 लाख से अधिक विद्यार्थियों के डाटा में गड़बड़ियां पाई गई हैं, जबकि 2024-25 सत्र के दो लाख से अधिक छात्रों का डाटा भी अब तक गलत है। इन त्रुटियों को सुधारने के लिए ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर 28 फरवरी (शनिवार) तक का अंतिम मौका दिया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में डाटा सुधार का कार्य लंबित है।


प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (योजना एवं लेखा) को सख्त निर्देश जारी कर समयसीमा के भीतर त्रुटियां सुधारने को कहा था। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर 2025-26 सत्र के 75 प्रतिशत उपस्थिति वाले 18 लाख 95 हजार 270 छात्रों और 2024-25 सत्र के 19 लाख 84 हजार 214 छात्रों के ब्योरे में सुधार किया जाना था।


25 फरवरी तक 2025-26 सत्र में त्रुटिपूर्ण डाटा वाले 86.65 प्रतिशत और 2024-25 सत्र में 90.28 प्रतिशत छात्रों के ब्योरे में सुधार कर लिया गया था। हालांकि अब भी हजारों बच्चों का डाटा अधूरा या गलत है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा तक सुधार नहीं हुआ तो संबंधित जिलों के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।


पटना जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आई हैं। पटना सदर शहरी-1 में 747, खुसरूपुर में 1298, पंडारक में 1262, पालीगंज में 1095 और मनेर में 999 विद्यार्थियों के डाटा में गड़बड़ी दर्ज की गई है। यह स्थिति बताती है कि जमीनी स्तर पर डाटा प्रविष्टि और सत्यापन में गंभीर चूक हुई है।


डाटा में गड़बड़ी का सीधा असर छात्रों को मिलने वाली योजनाओं पर पड़ेगा। प्री-मैट्रिक स्तर पर संचालित कई योजनाएं इसी डाटा पर आधारित हैं। इनमें किशोरी स्वास्थ्य योजना, मुख्यमंत्री बालक पोशाक योजना (एपीएल 1-8), मुख्यमंत्री बालक पोशाक योजना (एससी/एसटी, बीपीएल 1-8), मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना (1-8), बालिका पोशाक योजना (9-12), मुख्यमंत्री साइकिल योजना, मुख्यमंत्री बीसी-ईबीसी प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप (एससी एवं एसटी विद्यार्थियों के लिए), स्कॉलरशिप बीसी-ईबीसी (1-8), स्कॉलरशिप जनरल (1-8), स्कॉलरशिप जनरल (9-10) और स्कॉलरशिप एससी-एसटी (1-8) जैसी योजनाएं शामिल हैं।


यदि छात्र का नाम, आधार या अन्य विवरण गलत है तो उसकी उपस्थिति, वर्ग और पात्रता का सत्यापन नहीं हो पाएगा। इससे बैंक खाते में राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी अटक सकती है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए यह योजनाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन्हीं के सहारे वे पढ़ाई जारी रख पाते हैं।


शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रधानाध्यापकों और संबंधित शिक्षकों को भी निर्देश दिया है कि वे बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि करें और जल्द से जल्द त्रुटियां सुधारें। अब नजर इस बात पर टिकी है कि शेष बचे डाटा को कितनी तेजी से अपडेट किया जाता है, ताकि लाखों बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।


सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच यह मामला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो इसका असर सीधे बच्चों की पढ़ाई और उनके अधिकारों पर पड़ेगा।