Bihar News : बिहार के प्रारंभिक विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति और मध्याह्न भोजन व्यवस्था को लेकर सरकार ने अब कड़ा रुख अपनाया है। मध्याह्न भोजन निदेशालय की ओर से जारी नए निर्देशों में साफ कहा गया है कि स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति पहली घंटी में ही अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी। इसके बाद दर्ज की गई उपस्थिति को फर्जी माना जाएगा और संबंधित शिक्षकों पर कार्रवाई की जा सकती है।
निदेशालय के निदेशक विनायक मिश्र द्वारा सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (MDM) को भेजे गए आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि उपस्थिति के आधार पर ही मध्याह्न भोजन तैयार किया जाएगा। यानी जितने बच्चे पहली घंटी में उपस्थित दर्ज होंगे, उसी संख्या के अनुसार भोजन बनेगा। इससे फर्जी उपस्थिति दिखाकर अतिरिक्त भोजन बनाने और उसमें गड़बड़ी की संभावना पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार को लगातार यह शिकायत मिल रही थी कि कई स्कूलों में वास्तविक उपस्थिति से अधिक बच्चों का आंकड़ा दिखाकर भोजन तैयार किया जा रहा है। इससे न सिर्फ सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा था, बल्कि बच्चों के हिस्से का पोषण भी प्रभावित हो रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सख्त निर्देश जारी किया गया है।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि यदि पहली घंटी के बाद किसी छात्र की उपस्थिति दर्ज की जाती है तो इसे अनियमितता माना जाएगा। ऐसी स्थिति सामने आने पर संबंधित शिक्षक या जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मध्याह्न भोजन योजना के तहत अंडा और फल वितरण को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। निर्देश में कहा गया है कि निर्धारित मेनू के अनुसार शुक्रवार या रविवार को दिए जाने वाले अंडा या फल का वितरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। हाल के निरीक्षणों में यह सामने आया था कि कई स्कूलों में बच्चों को अंडा या फल नहीं दिया जा रहा है, जो गंभीर लापरवाही मानी गई है।
सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्कूल में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति और भोजन वितरण में गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे यह संकेत साफ है कि सरकार अब शिक्षा और पोषण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहती है।
इसी के साथ राज्य के मॉडल विद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किया है कि कक्षा नौ में नामांकन की प्रक्रिया 30 अप्रैल तक पूरी कर ली जाए। यह नामांकन प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा, जिसमें न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है।
प्रत्येक मॉडल विद्यालय में कक्षा नौ के लिए कम से कम 40 सीटों पर नामांकन का प्रावधान किया गया है। यदि प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों की संख्या कम होती है, तो कक्षा आठवीं के अंकों के आधार पर अन्य इच्छुक छात्रों को भी मौका दिया जाएगा। इससे अधिक से अधिक छात्रों को बेहतर शिक्षा का अवसर देने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, सरकार के इन नए निर्देशों का उद्देश्य स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जीवाड़े पर रोक लगाना और बच्चों को बेहतर पोषण व शिक्षा उपलब्ध कराना है। अब देखना होगा कि इन सख्त नियमों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है।