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25-Mar-2026 09:34 AM
By First Bihar
Bihar News : बिहार में स्कूली बच्चों के लिए आधार कार्ड बनवाने की महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर अधर में लटक गई है। राज्य के 1068 सरकारी स्कूलों में आधार सेवा केंद्र शुरू करने की तैयारी थी, लेकिन भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे करीब 40 लाख से अधिक छात्रों का आधार बनवाना फिलहाल मुश्किल हो गया है।
दरअसल, शिक्षा विभाग ने स्कूल स्तर पर ही आधार नामांकन और अपडेट की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना बनाई थी। इसके तहत राज्य के अलग-अलग प्रखंडों में दो-दो स्कूलों को चिन्हित कर वहां आधार सेवा केंद्र खोलने का प्रस्ताव था। योजना का मकसद यह था कि बच्चों और उनके अभिभावकों को आधार बनवाने के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े और स्कूल परिसर में ही यह सुविधा आसानी से मिल सके।
लेकिन UIDAI ने आधार केंद्र संचालन के लिए चयनित एजेंसियों पर आपत्ति जताते हुए उनकी मंजूरी देने से इनकार कर दिया। प्राधिकरण का कहना है कि आधार सेवा केंद्र चलाने के लिए ऐसी एजेंसी का चयन होना चाहिए जो खुद काम करे, न कि किसी थर्ड पार्टी के माध्यम से सेवाएं प्रदान करे। इस संबंध में UIDAI ने शिक्षा विभाग को नए सिरे से एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी करीब दो साल पहले स्कूलों में आधार सेवा केंद्र शुरू किए गए थे, लेकिन संचालन प्रक्रिया पूरी नहीं होने और तकनीकी कारणों का हवाला देकर उन्हें बंद कर दिया गया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने दोबारा एजेंसियों का चयन किया और इस वर्ष इन केंद्रों को चालू करने की योजना बनाई गई थी। उम्मीद थी कि 2026 के शुरुआती महीनों तक सभी 1068 स्कूलों में आधार सेवा केंद्र काम करने लगेंगे।
आधार सेवा केंद्र शुरू नहीं होने का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिनका आधार कार्ड अब तक नहीं बना है या उसमें सुधार की जरूरत है। आधार कार्ड कई सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति और शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में आधार नहीं बनने से छात्रों को विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि UIDAI के निर्देशों का पालन करते हुए नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। विभाग का दावा है कि इस बार सभी तकनीकी और प्रशासनिक मानकों का ध्यान रखते हुए एजेंसी का चयन किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तरह की बाधा न आए।
फिलहाल, इस योजना के लटकने से लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई एजेंसी के चयन के बाद आखिर कब तक स्कूलों में आधार सेवा केंद्र शुरू हो पाते हैं और बच्चों को राहत मिलती है।