पटना: बिहार में बालू घाटों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-टेंडरिंग सह ई-नीलामी व्यवस्था लागू की जा रही है। खान एवं भू-तत्व विभाग के संशोधित निविदा दस्तावेज के तहत अब तकनीकी जांच में योग्य पाए जाने वाले व्यक्ति, समिति, फर्म, कंपनी या ज्वाइंट वेंचर को ही ऑनलाइन नीलामी में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इसके बाद योग्य निविदादाताओं के बीच ई-नीलामी के जरिए सबसे अधिक बोली लगाने वाले को सफल निविदादाता घोषित किया जाएगा।

ऑनलाइन होगी बालू घाटों की नीलामी

बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी। पहले निविदादाताओं की तकनीकी योग्यता की जांच होगी। तकनीकी रूप से योग्य पाए जाने वाले बोलीदाताओं को ही आगे ई-नीलामी में शामिल किया जाएगा। नीलामी के दौरान बोली लगाने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।इस व्यवस्था का उद्देश्य बालू घाटों की बंदोबस्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और बोली प्रक्रिया को ऑनलाइन एवं प्रतिस्पर्धी बनाना है।

आखिरी पांच मिनट में बोली तो बढ़ जाएगा समय

ई-नीलामी के दौरान अंतिम पांच मिनट काफी महत्वपूर्ण होंगे। यदि नीलामी समाप्त होने से ठीक पहले कोई नई बोली आती है तो ऑनलाइन सिस्टम अपने आप नीलामी की अवधि बढ़ा देगा। निर्धारित नियमों के अनुसार यह अतिरिक्त समय अधिकतम एक घंटे तक बढ़ाया जा सकता है।इसका मकसद अंतिम समय में आने वाली बोली को भी प्रक्रिया में शामिल करना है, ताकि किसी बोलीदाता को अचानक समाप्त हुई समय सीमा के कारण मौका न छूटे।

पांच साल के लिए मिलेगी बंदोबस्ती

नई व्यवस्था के तहत सफल बोलीदाता को बालू घाट का बंदोबस्ती अधिकार पांच साल के लिए दिया जाएगा। पहले साल की बंदोबस्ती राशि ई-नीलामी में सफल बोली के आधार पर निर्धारित होगी। वहीं, दूसरे वर्ष से बंदोबस्ती राशि में वृद्धि का प्रावधान है। नियमों के अनुसार दूसरे वर्ष की राशि पिछले वर्ष की बंदोबस्ती राशि की 120 प्रतिशत होगी। इस तरह पांच साल की अवधि में हर वर्ष निर्धारित नियम के अनुसार बंदोबस्ती राशि में बदलाव होगा।

पांच दिन के भीतर जमा करनी होगी 25 प्रतिशत राशि

ई-नीलामी में सफल होने के बाद बोलीदाता के लिए निर्धारित समय सीमा में राशि और जरूरी दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। सफल बोलीदाता को नीलामी के पांच दिनों के भीतर नीलामी राशि का 25 प्रतिशत प्रतिभूति के रूप में जमा करना होगा। ऑनलाइन भुगतान भी निर्धारित नियमों के अनुसार संबंधित व्यक्ति, फर्म, कंपनी अथवा अधिकृत निदेशक या साझेदार के बैंक खाते से ही स्वीकार किया जाएगा।

अनुमति के बिना शुरू नहीं होगा बालू खनन

ई-नीलामी में सफल होना खनन शुरू करने की अंतिम अनुमति नहीं मानी जाएगी। बालू घाट का संचालन शुरू करने से पहले संबंधित बोलीदाता को सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां प्राप्त करनी होंगी। इसके लिए स्वीकृत खनन योजना, पर्यावरणीय स्वीकृति तथा जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित आवश्यक सहमति समेत अन्य निर्धारित मंजूरियां लेना जरूरी होगा। आवश्यक अनुमति लेने में देरी होने की स्थिति में नियमों के अनुसार जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।

तीन मीटर से ज्यादा गहराई तक खनन पर रोक

बालू खनन के दौरान नदी के प्राकृतिक तल की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। निर्धारित नियमों के मुताबिक नदी तल में बिना खुदाई वाले तल स्तर से अधिकतम तीन मीटर या जलस्तर, जो भी कम हो, उससे अधिक गहराई तक खनन नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, यदि संबंधित क्षेत्र की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में किसी बालू घाट के लिए अधिकतम खनन गहराई अलग से निर्धारित की गयी है, तो उसी सीमा का पालन करना होगा।

बालू की बिक्री और परिवहन भी ऑनलाइन

नई व्यवस्था में सिर्फ खनन ही नहीं, बल्कि बालू की बिक्री और परिवहन की निगरानी भी ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी। बंदोबस्तधारी को उपभोक्ताओं को बालू की बिक्री निर्धारित ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से करनी होगी। विभागीय पोर्टल या मोबाइल ऐप पर प्रतिदिन खनन और भंडारण से संबंधित जानकारी अपडेट करना अनिवार्य होगा। बालू की बिक्री और परिवहन की निगरानी के लिए ई-चालान व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा।

नियम तोड़े तो बंद हो सकता है ई-चालान

यदि बंदोबस्तधारी निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जुर्माने के साथ ई-चालान की सुविधा बंद करने जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान है। इससे बालू के अवैध उठाव, बिना रिकॉर्ड बिक्री और नियमों के विपरीत परिवहन पर निगरानी रखने की कोशिश की जा रही है।

साइन बोर्ड नहीं लगाया तो एक लाख तक जुर्माना

बालू घाट के संचालन क्षेत्र में निर्धारित साइन बोर्ड लगाना भी अनिवार्य होगा। नियम के मुताबिक साइन बोर्ड नहीं लगाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, घाट की सीमा को भू-निर्देशांक के साथ सीमा स्तंभ के जरिए चिह्नित नहीं करने पर पांच लाख रुपये तक का दंड निर्धारित किया गया है। इससे घाट की वास्तविक सीमा स्पष्ट रखने और अवैध खनन के लिए क्षेत्र के गलत इस्तेमाल को रोकने की व्यवस्था की गयी है।

अवैध खनन और परिवहन पर कार्रवाई

बिहार में बालू खनन को निर्धारित नियमों के तहत संचालित करने के लिए अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान जारी रहेगा। नई बंदोबस्ती व्यवस्था में खनन शुरू करने से पहले जरूरी स्वीकृतियां लेने, निर्धारित गहराई में ही खनन करने, ऑनलाइन बिक्री करने और रोजाना रिकॉर्ड अपडेट करने जैसी शर्तों को महत्वपूर्ण बनाया गया है।

यानी आने वाले समय में बालू घाटों की बंदोबस्ती से लेकर खनन, बिक्री और परिवहन तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन रिकॉर्ड और ई-चालान के जरिए ट्रैक करने पर जोर रहेगा। सफल बोलीदाता के लिए सिर्फ सबसे ऊंची बोली लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बंदोबस्ती की पूरी अवधि में विभागीय नियमों और पर्यावरणीय शर्तों का पालन करना भी जरूरी होगा।