Bihar News: बिहार में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को लेकर खान एवं भूतत्व विभाग ने सख्ती दिखाई है। राज्य के करीब 526 बालू घाटों की नीलामी लंबित रहने पर विभाग ने संबंधित अधिकारियों को मामलों की समीक्षा कर जल्द प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है। खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सहायक निदेशकों और खनिज विकास पदाधिकारियों से नीलामी में देरी के कारणों की रिपोर्ट मांगी गई है। विभाग फिलहाल जिलावार स्थिति की समीक्षा कर रहा है।



विभागीय समीक्षा में सामने आया कि राज्य में पीले बालू के कुल 466 घाट हैं। इनमें से 378 घाटों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जबकि 88 घाट अभी भी नीलामी प्रक्रिया में अटके हुए हैं। नीलामी पूरी होने के बावजूद सभी घाटों से खनन शुरू नहीं हो पाया है। अब तक केवल 199 नीलाम घाटों से बालू खनन शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इससे स्पष्ट है कि विभाग के सामने सिर्फ नीलामी पूरी कराने की ही नहीं, बल्कि नीलाम घाटों पर समय पर खनन शुरू कराने की चुनौती भी है।



सफेद बालू के घाटों की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है। राज्य में सफेद बालू के कुल 541 घाट हैं, जिनमें से अब तक केवल 103 घाटों की नीलामी हो सकी है। वहीं 438 घाट अभी नीलामी का इंतजार कर रहे हैं। नीलाम किए गए सफेद बालू घाटों में भी सभी से खनन शुरू नहीं हुआ है। अब तक सिर्फ 37 घाटों से खनन शुरू हो पाया है। विभाग ने अधिकारियों को लंबित प्रक्रियाओं में तेजी लाने और जल्द से जल्द नीलामी पूरी कराने का निर्देश दिया है।



बैठक में प्रत्यर्पित बालू घाटों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। ऐसे करीब 79 घाट सामने आए हैं, जिनमें से सिर्फ 16 की सफल नीलामी हो सकी है। विभाग ने बाकी घाटों के लिए जल्द निविदा जारी कर नीलामी प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इसके साथ ही विभाग ने निर्धारित दर के अनुसार राजस्व वसूली की स्थिति की जांच कराने का भी निर्देश दिया है। अधिकारियों से लंबित मामलों की वजह और प्रक्रिया में आ रही बाधाओं की जानकारी भी मांगी गई है।



विभाग का अनुमान है कि 15 अक्टूबर से बिहार में बालू खनन दोबारा शुरू हो सकता है। इसके लिए लंबित घाटों की नीलामी समेत अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है। घाटों के दोबारा चालू होने के बाद बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनने के साथ ही बालू की कीमतों पर भी दबाव कम हो सकता है।