Bihar RWD Laboratory :  बिहार में ग्रामीण सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण की गुणवत्ता सुधारने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) ने बड़ा फैसला लिया है। अब सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी, मिट्टी, सीमेंट और डामर की गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल को पटना भेजकर रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। विभाग राज्य के सभी जिलों में जिला स्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित करने की तैयारी में है।

इस फैसले का सीधा असर बिहार के गांवों को जोड़ने वाली हजारों किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत पर पड़ने की उम्मीद है। विभाग का उद्देश्य साफ है—निर्माण शुरू होने से पहले ही सामग्री की गुणवत्ता की जांच और निर्माण के दौरान लगातार निगरानी।

हर जिले में होगी अपनी प्रयोगशाला

ग्रामीण कार्य विभाग ने जिला स्तर पर प्रयोगशाला स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग के मुख्य अभियंता ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को करीब 2,000 से 2,500 वर्ग फीट उपयुक्त जगह चिह्नित करने का निर्देश दिया है।जिन जिलों में सरकारी जमीन या भवन उपलब्ध नहीं है, वहां किराये के भवन में भी प्रयोगशाला शुरू करने का विकल्प दिया गया है। यानी जमीन की कमी के कारण लैब की स्थापना में देरी नहीं होगी। अधिकारियों को जल्द से जल्द जगह चिह्नित कर रिपोर्ट देने को कहा गया है, ताकि प्रयोगशालाओं को काम करने की स्थिति में लाया जा सके।

24 घंटे में मिलेगी जांच रिपोर्ट

अभी किसी निर्माण सामग्री का सैंपल जांच के लिए दूसरे स्थान, खासकर पटना भेजना पड़ता है। इसमें समय लगता है और कई बार निर्माण कार्य की गति भी प्रभावित होती है। जिला स्तर पर लैब शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। विभाग की योजना के अनुसार सैंपल की जांच के बाद 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

इसका मतलब यह हुआ कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को मौके के करीब ही तेजी से परखा जा सकेगा। गिट्टी की मजबूती, मिट्टी की गुणवत्ता, सीमेंट और डामर जैसे महत्वपूर्ण निर्माण पदार्थों की वैज्ञानिक जांच स्थानीय स्तर पर होगी।

ठेकेदारों पर भी बढ़ेगी निगरानी

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर सड़क निर्माण करने वाली एजेंसियों और ठेकेदारों पर पड़ सकता है। अक्सर ग्रामीण इलाकों में सड़क बनने के कुछ समय बाद ही उसके खराब होने की शिकायतें सामने आती हैं। कहीं सड़क उखड़ने लगती है तो कहीं गड्ढे बनने लगते हैं। ऐसे मामलों में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में आती है। जिला स्तरीय लैब से विभाग को निर्माण सामग्री की जांच का एक मजबूत और स्थानीय तंत्र मिल जाएगा।

अगर इस्तेमाल होने वाली सामग्री मानक के अनुरूप नहीं पाई गई तो निर्माण शुरू होने से पहले ही उसे रोका या बदला जा सकेगा। इससे बाद में सड़क खराब होने के बाद मरम्मत पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को भी कम किया जा सकता है।

भ्रष्टाचार पर भी लग सकती है लगाम

ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। नई व्यवस्था को विभाग भ्रष्टाचार और अनियमितता पर अंकुश लगाने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रहा है।स्थानीय स्तर पर जांच रिपोर्ट उपलब्ध रहने से अधिकारियों के लिए निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी आसान होगी। किसी सड़क में घटिया सामग्री इस्तेमाल होने की स्थिति में उसकी जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध रहेगी।इससे ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करने में भी मदद मिल सकती है।

शिकायतों का भी होगा तेजी से समाधान

नई व्यवस्था का फायदा सिर्फ निर्माण एजेंसियों को नहीं, बल्कि आम लोगों को भी मिलने की उम्मीद है। गांव की सड़क खराब होने या निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने की स्थिति में विभाग स्थानीय स्तर पर सामग्री और निर्माण की जांच करा सकेगा।मुजफ्फरपुर में भी विभाग ने जिला स्तरीय प्रयोगशाला के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश शुरू कर दी है। इसी तरह राज्य के दूसरे जिलों में भी जगह चिह्नित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

गांवों की सड़कों को मिलेगी मजबूती

बिहार में ग्रामीण सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि गांवों को बाजार, स्कूल, अस्पताल, प्रखंड मुख्यालय और जिला मुख्यालय से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में इन सड़कों की गुणवत्ता सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी है।अगर जिला स्तर की प्रयोगशालाएं प्रभावी तरीके से काम करती हैं तो निर्माण सामग्री की जांच में तेजी आएगी, गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत होगी और खराब निर्माण की शिकायतों का समाधान भी जल्द हो सकेगा।यानी बिहार की ग्रामीण सड़कों के लिए यह फैसला सिर्फ नई लैब खोलने का नहीं, बल्कि सड़क निर्माण की पूरी गुणवत्ता व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।