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02-Apr-2026 09:15 AM
By First Bihar
Bihar Road Project : बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार देने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स में शामिल रामनगर–कच्ची दरगाह फोरलेन फिलहाल जमीन विवाद के कारण थम गया है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रही इस महत्वपूर्ण सड़क का काम पटना जिले के फतुहा अंचल में पूरी तरह रुक गया है। वजह है—जमीन अधिग्रहण को लेकर चल रहा लंबा विवाद, जिसने निर्माण एजेंसियों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
करीब तीन साल से अधिक समय से यह मामला उलझा हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर कई कोशिशों के बावजूद जमीन का अंतिम निपटारा नहीं हो पाया है, जिससे सड़क निर्माण का काम ठप पड़ा है। इस फोरलेन को इलाके के लिए लाइफलाइन माना जा रहा था, लेकिन अब यह परियोजना विवादों के जाल में फंसती जा रही है।
जमीन मालिक बनाम प्रशासन: असली विवाद क्या है?
इस परियोजना की सबसे बड़ी अड़चन जमीन के स्वामित्व को लेकर है। एक तरफ जमीन मालिक दावा कर रहे हैं कि फोरलेन के लिए चिन्हित जमीन उनकी रैयती (निजी) है, जबकि दूसरी ओर प्रशासन के रिकॉर्ड में कुछ हिस्से को सरकारी जमीन बताया जा रहा है। इसी खींचतान ने पूरे मामले को जटिल बना दिया है।
मुआवजे को लेकर भी असंतोष गहराया हुआ है। जमीन मालिकों का कहना है कि उन्हें मौजूदा बाजार दर के हिसाब से उचित मुआवजा नहीं मिल रहा, इसलिए वे विरोध कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक सही मूल्यांकन नहीं होगा, वे जमीन नहीं देंगे।
करोड़ों की राशि कोर्ट में जमा, फिर भी समाधान नहीं
दिलचस्प बात यह है कि फतुहा अंचल के चार मौजा—रबियाचक, भेड़गामा, जैतिया और वाजिदपुर—की 48.59 एकड़ जमीन के लिए 25.342 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि पहले ही कोर्ट में जमा की जा चुकी है। इसके बावजूद जमीन मालिकों को भुगतान नहीं हो सका है, क्योंकि स्वामित्व का मामला अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
25 एकड़ जमीन बना सबसे बड़ा पेंच
सूत्रों के अनुसार, फतुहा अंचल में करीब 25 एकड़ जमीन पर सबसे ज्यादा विवाद है। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन ‘बकाश्त’ या गैर-मालिकाना श्रेणी में आ सकती है, जबकि स्थानीय लोग इसे अपनी निजी संपत्ति बता रहे हैं। इसी विरोधाभास के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
प्रशासन ने संबंधित दावेदारों को नोटिस जारी कर उनके दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट पटना सिटी के डीसीएलआर को सौंपी जाएगी, जिसके बाद ही तय होगा कि जमीन रैयती है या सरकारी। इसी आधार पर मुआवजा दिया जाएगा या जमीन को केवल ट्रांसफर किया जाएगा।
205 एकड़ जमीन की जरूरत, काम अधर में
इस महत्वाकांक्षी फोरलेन प्रोजेक्ट के लिए कुल 205 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। इसमें धनरूआ अंचल से 134.83 एकड़ और फतुहा अंचल से 70.42 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जानी है। इसके लिए कुल 120.22 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने हैं।
धनरूआ अंचल के बघबर, बहरामपुर, पिपरावां, बिजपुरा, नसरतपुर, छाती, टरवां और पभेड़ा जैसे गांवों में अधिग्रहण प्रक्रिया काफी हद तक पूरी हो चुकी है। लेकिन फतुहा में चल रहे विवाद ने पूरे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन को पीछे धकेल दिया है।
विकास की रफ्तार पर असर
रामनगर–कच्ची दरगाह फोरलेन सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कॉरिडोर है। इसके रुकने से न सिर्फ स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है, बल्कि व्यापार और यातायात पर भी असर पड़ रहा है।अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच और अंतिम फैसले पर टिकी है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह परियोजना और लंबा खिंच सकती है—और विकास की रफ्तार यूं ही थमी रह सकती है।