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Bihar News: ठेकेदार-इंजीनियर गठजोड़ से लुट ! 'मास्टिक वर्क' सर्टिफिकेट में हाईलेवल का खेल....बड़े ठेकेदारों को किया जा रहा उपकृत, RCD अभियंता प्रमुख ने अगस्त महीने में ही लिया था बड़ा निर्णय

पथ निर्माण विभाग में मास्टिक वर्क के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का बड़ा खेल उजागर हुआ है। ठेकेदारों को बिना काम कराए ही मास्टिक वर्क का अनुभव प्रमाण पत्र जारी करवाया गया,अभियंता प्रमुख स्तर पर बैठक में मास्टिक वर्क की अलग अहर्ता को लेकर नियम भी तय किए.

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10-Dec-2025 12:44 PM

By Viveka Nand

Bihar News: पथ निर्माण व ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंताओं द्वारा ठेकेदारों को मास्टिक वर्क का अनुभव प्रमाण पत्र देने में बड़ा खेल किया जा रहा है. सेटिंग के तहत मास्टिक वर्क का प्रमाण पत्र लेकर ठेकेदार बड़ा काम अलॉट करा ले रहे. खेल में ठेकेदार से लेकर अभियंता तक शामिल हैं. पथ निर्माण विभाग में मास्टिक वर्क का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकार टेंडर डालने /लेने के मामले का खुलासा हो चुका है.आरोपी कार्यपालक अभियंता पर कार्रवाई की सिफारिश हो चुकी है. हालांकि पथ निर्माण विभाग में कई ऐसी शिकायतें हैं, जिन पर विभाग अब तक कुंडली मार कर बैठा है. निविदा निष्पादन में MASTIC कार्य के लिए Bituminous कार्य के अनुभव की मान्यता को लेकर पथ निर्माण विभाग बैठक भी कर चुका है.

मास्टिक के मुद्दे पर 12 अगस्त को हुई थी मीटिंग

12 अगस्त 2025 को पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख सह अपर आयुक्त ने सभी मुख्य अभियंताओं से लेकर पथ विकास निगम, पुल निर्माण निगम के प्रबंध निदेशकों को पत्र लिखा. जिसमें कहा गया की निविदा निष्पादन में MASTIC कार्य के लिए Bituminous कार्य के अनुभव की मान्यता के संबंध में मंतव्य के लिए बैठक है. यह बैठक 12 अगस्त 2025 को बुलाई गई थी. अभियंता प्रमुख शैलेंद्र ने इस संबंध में पत्र जारी किया था.

परियोजना राशि का 15 फीसदी या अधिक हो तभी मांगे अलग अहर्ता

पथ निर्माण विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं की बैठक में सर्वसम्मति से अनुशंसा की गई कि पूर्व में अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में 1.फरवरी 2019 को निर्णय लिया गया था. जिसमें  MASTIC Asphalt की मात्रा Bituminous सर्फेस के क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत या 5000 स्कॉयर मीटर में से जो कम हो, इससे अधिक होने की स्थिति में Bituminous कार्यों से अलग अहर्ता की मांग को शिथिल करते हुए मास्टिक asphalt के अहर्ता को अलग से तभी मांगा जाय़,जब मास्टिक asphalt से संबंधित आइटम की राशि कुल परियोजना राशि का 15 फीसदी अथवा उससे अधिक होगी.

बता दें, बिहार में मास्टिक वर्क का अनुभव प्रमाण पत्र देने के लिए बड़ी डील हो रही है. पथ निर्माण विभाग ने एक ऐसे ही मामले का खुलासा किया है. हालांकि पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंताओं पर भी एक ठेकेदार को मास्टिक वर्क कराने का फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र देने के आरोप मेंं शिकायत दर्ज कराई गई है.  

मास्टिक कार्य का अनुभव प्रमाण पत्र देने में बड़ा खेल

ग्रामीण कार्य विभाग लखीसराय के कार्यपालक अभियंता ने ठेकेदार डी.के ब्रदर्स ट्रेड con. को बिना अनुभव के ही मास्टिक वर्क कराने का अनुभव प्रमाण पत्र दे दिया. जांच में पोल खुली तो पथ निर्माण विभाग ने संबंधित कार्यपालक अभियंता पर एक्शन लेने को कहा है. वैसे सिर्फ लखीसराय के ठेकेदार को ही मास्टिक वर्क कराने का अनुभव प्रमाण पत्र नहीं दिय़ा गया है, आरोप है कि, पथ निर्माण विभाग के भी कार्यपालक अभियंता ने पटना के एक बड़े ठेकेदार को यह प्रमाण पत्र बिना वर्क कराए ही जारी किया है. इस संबंध में मुजफ्फरपुर के एक संवेदक ने 5 सितंबर 2025 को ही पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) को पत्र लिखकर इस बड़े खेल की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया है. साथ ही जांच कर कार्रवाई करने का आग्रह किया है. हालांकि शिकायत के बाद आज तक कोई जांच नहीं की गई है.

पटना के एक ठेकेदार और अभियंता के गठजोड़ की शिकायत, अब तक जांच नहीं

मुजफ्फरपुर के ठेकेदार शैलेन्द्र कुमार की तरफ से 5 सितंबर 2025 को अभियंता प्रमुख को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि पटना के एक संवेदक को पटना के दो-तीन डिवीजन द्वारा फेक अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर सैकड़ों करोड़ का कार्य आवंटन किया गया है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि OPRMC-2 का 2019 में जो कार्य आवंटित किए गए उसमें कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जिस पथ प्रमंडल द्वारा जारी किया गया है, उसकी सत्यता की जांच की जाय. केवल मास्टिक कार्य के अनुभव के आाधार पर कार्य आवंटन कराया गया है. 

मास्टिक वर्क सर्टिफिकट पर RCD ने ही RWD के कार्यपालक अभियंता की खोली है पोल 

ग्रामीण कार्य विभाग के एक कार्यपालक अभियंता ने बड़ा खेल किया है. एक ठेकेदार के लिए नौकरी दांव पर लगा दिया. ठेकेदार के प्रति इतनी हमदर्दी क्यों रही होगी..? इसे समझा जा सकता है. पथ निर्माण विभाग ने इस खेल को पकड़ लिया है. अब कार्रवाई को लेकर पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख ने ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता प्रमुख को पत्र लिखा है.  

पथ निर्माण विभाग ने कार्यपालक अभियंता पर एक्शन को लेकर RWD को लिखा पत्र

पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख ने 4 दिसंबर 2025 को ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता प्रमुख को पत्र लिखा है. जिसमें लखीसराय ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है. पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण कार्य विभाग लखीसराय प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने एक ठेकेदार डी.के ब्रदर्स ट्रेड con. को 4 अप्रैल 2025, 16 जनवरी 2025 के अलावे 2022 में भी अलग-अलग प्रकार का अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया है. 7 जुलाई 2025 को इन पत्रों का सत्यापन किए जाने के बाद जारी किए  गए अनुभव प्रमाण पत्र भिन्न पाया गया है . ऐसे में आरोपी कार्यपालक अभियंता के खिलाफ कार्रवाई कर, हमें जानकारी दें.

17 नवंबर को अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में हुई थी बैठक

बता दें, पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में 17 नवंबर को बैठक हुई थी. बैठक में पथ प्रमंडल लखीसराय के अंतर्गत एक सड़क की पुनर्निविदा की तकनीकी बीड़ को लेकर एक परिवाद प्राप्त हुआ था. जिसके बाद यह बैठक की गई . बैठक में एक ठेकेदार डी.के. ब्रदर्स ट्रेड con द्वारा दिए गए अनुभव प्रमाण पत्र की जांच की गई. ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता (लखीसराय) के द्वारा 7 जुलाई 2025 एवं 28 अगस्त 2025 द्वारा भिन्न-भिन्न अनुभव प्रमाण पत्र निर्गत किए गए हैं. इसके लिए कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग लखीसराय के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अभियंता प्रमुख ग्रामीण कार्य विभाग को भेजने का प्रस्ताव पारित किया गया था.

निविदा के दौरान ठेकेदार-इंजीनियर गठजोड़ की खुली पोल

दरअसल, लखीसराय जिले में पथ निर्माण विभाग द्वारा निर्माण किए जाने वाली एक सड़क के लिए तीन ठेकेदारों ने निविदा डाला था. उसमें संजीव कुमार नामक एक ठेकेदार थे. ठेकेदार संजीव कुमार ने विभाग में कंप्लेंट लगाया कि डी.के. ब्रदर्स. ट्रेडर्स con द्वारा दिया गया वर्क एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट फर्जी है.ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा पूरे लखीसराय जिले में कहीं पर भी मास्टिक सड़क का कार्य नहीं कराया गया है. शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा था कि हमने ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता से भी दूरभाष पर बात की. उनके द्वारा बताया गया कि हमारे विभाग द्वारा अभी तक मास्टिक का कार्य नहीं कराया गया है, न ही हमने मास्टिक कार्य के लिए सर्टिफिकेट दिया है. ऐसे में डी.के. ब्रदर्स के फर्जी सर्टिफिकेट पर कार्रवाई की जाए.

कार्यपालक अभियंता ने जारी किया था सर्टिफिकेट

शिकायत के बाद विभाग में परिवाद की समीक्षा की गई. जिसमें पाया गया की डी.के. ब्रदर्स ट्रेड्स मास्टिक वर्क का न्यूनतम अर्हता पूर्ण नहीं कर पा रहा. ऐसे में इनको असफल घोषित किया जाता है. जबकि कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग लखीसराय द्वारा 7 जुलाई 2025 को डी.के. ब्रदर्स ट्रेड को इस संबंध में एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट को सत्यापित किया था.

सड़क निर्माण में क्या होता है मास्टिक वर्क....

सड़क निर्माण में Mastic Work बिटुमेन (डामर), खनिज भराव (जैसे चूना पत्थर), और समुच्चय (मोटे और महीन पत्थर) को मिलाकर बनाया गया एक विशेष, गर्म मिश्रण लगाने की प्रक्रिया है, जो सड़कों को बेहद टिकाऊ, जल-रोधी (waterproof) और टूट-फूट प्रतिरोधी बनाता है. ह अक्सर भारी यातायात वाली सड़कों और मरम्मत के लिए ऊपरी परत (wearing course) के रूप में इस्तेमाल होता है, जो दरारें भरने और जल निकासी सुधारने में मदद करता है, जिससे सड़क का जीवनकाल बढ़ता है। 

 संक्षेप में कहें कि, मास्टिक वर्क सड़क निर्माण का एक उन्नत तरीका है जो पारंपरिक डामर की तुलना में सड़क को अधिक मजबूत, जल-रोधी और लंबे समय तक चलने वाली सतह प्रदान करता है, खासकर उन जगहों पर जहाँ भारी यातायात और पानी का जमाव एक समस्या है।