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09-Mar-2026 10:50 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार में राजस्व सेवा से जुड़े अधिकारियों की हड़ताल के कारण राज्य भर में प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है। आज से बिहार राजस्व सेवा (BRS) के सभी पदाधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इनमें अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) शामिल हैं। सरकार और विभाग की ओर से लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा नहीं किए जाने के विरोध में यह कदम उठाया गया है।
राजस्व सेवा अधिकारियों के हड़ताल पर चले जाने से राज्य के सभी 537 अंचलों में कामकाज लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। इसका सीधा असर आम लोगों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों पर पड़ा है। दाखिल-खारिज, भूमि परिमार्जन, जमीन से जुड़े अन्य राजस्व मामलों के साथ-साथ जाति, आय और आवासीय प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया भी रुक गई है। इससे हजारों लोगों के जरूरी काम अटक गए हैं।
बताया जा रहा है कि इस हड़ताल में बिहार राजस्व सेवा के दोनों प्रमुख संगठन—बिरसा और बिरसा यूनाइटेड—पूरी तरह शामिल हैं। दोनों संगठनों ने संयुक्त रूप से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए यह फैसला लिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि विभाग की ओर से कई बार आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
राजस्व विभाग में पहले से ही कामकाज प्रभावित चल रहा था क्योंकि राजस्व कर्मचारी संघ भी 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। कर्मचारियों की हड़ताल अभी भी जारी है। अब अधिकारियों के भी हड़ताल में शामिल हो जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। कर्मचारी और अधिकारी दोनों के एक साथ हड़ताल पर रहने से राजस्व विभाग का लगभग पूरा सिस्टम ठप पड़ गया है।
इसका असर सिर्फ प्रमाणपत्र और जमीन से जुड़े कामों तक सीमित नहीं है। राज्य में चल रहे सर्वे और चकबंदी का काम भी आज से पूरी तरह बंद हो गया है। दरअसल, इन परियोजनाओं का संचालन भी बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी ही करते हैं। ऐसे में उनके हड़ताल पर जाने से सर्वेक्षण और भूमि सुधार से जुड़ी योजनाएं रुक गई हैं।
इसके अलावा कृषि गणना निदेशालय का काम भी प्रभावित हो गया है। कृषि से संबंधित आंकड़ों का संकलन और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया फिलहाल बंद हो गई है। साथ ही देश में प्रस्तावित जनगणना 2027 की तैयारी पर भी इसका असर पड़ा है। बिहार में जनगणना 2027 के लिए राजस्व विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। ऐसे में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल से इस महत्वपूर्ण कार्य की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह हड़ताल लंबी चली तो इसका असर प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है। आम लोगों को प्रमाणपत्र और जमीन से जुड़े कामों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही अधिकारियों और सरकार के बीच बातचीत हो सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और राजस्व सेवा के अधिकारियों के बीच कब सहमति बनती है और राज्य में राजस्व विभाग का कामकाज कब सामान्य हो पाता है।