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BIHAR NEWS : सरकार की चेतावनी बेअसर! पटना में राजस्व अधिकारियों का ऐतिहासिक महा जुटान, कहा - हाई कोर्ट के आदेश को किया जा रहा दरकिनार

बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर, डीसीएलआर और अन्य पदों पर वरीयता की मांग जारी। सरकार ने चेतावनी दी, लेकिन आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा।

15-Mar-2026 08:03 AM

By First Bihar

BIHAR NEWS : बिहार में राजस्व व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी अपनी मांगों को लेकर लगातार हड़ताल पर डटे हुए हैं। राज्य के अधिकांश अंचलों में अंचलाधिकारी (CO), राजस्व अधिकारी (RO) और राजस्व कर्मचारी कामकाज से दूर हैं, जिससे जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार की ओर से बार-बार चेतावनी और सख्त निर्देश जारी किए जाने के बावजूद हड़ताली अधिकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं।


बिहार राजस्व सेवा के वरीय अधिकारियों ने सत्ता और प्रशासन के खिलाफ ऐतिहासिक एकता दिखाने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, यह महा जुटान एक सुनियोजित षड्यंत्र और वादा खिलाफी के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। राजस्व सेवा के दोनों संघों – RO, CO, SDRO, ADALO, DLAO और ADM ने सुबह 10 बजे पटना के अधिवेशन भवन में अपनी ताकत का प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।


राजस्व सेवा के अधिकारियों का आरोप है कि बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों को उनकी जगह देने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर कैबिनेट से विवादित आदेश पारित कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मुख्यमंत्री तक को सही जानकारी नहीं दी गई और राजस्व सेवा को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है। दोनों संघों ने स्पष्ट किया है कि अब वे आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ उनका अधिकार नहीं बल्कि न्याय और प्रणाली की रक्षा की लड़ाई है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि भूमि सुधार विभाग के मंत्री और विभाग के प्रधान सचिव ने पहले वादे किए थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया। इसीलिए अब वे सभी मिलकर अपनी आवाज बुलंद करने जा रहे हैं।


दरअसल, हड़ताल पर गए अधिकारियों की मुख्य मांग यह है कि डीसीएलआर (उप समाहर्ता भूमि सुधार) के पद पर राजस्व सेवा के अधिकारियों की वरीयता के आधार पर पोस्टिंग सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से इस पद पर अन्य सेवाओं के अधिकारियों की तैनाती की जा रही है, जिससे राजस्व सेवा के अधिकारियों के अधिकार और अवसर प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा आंदोलनकारी अधिकारी एसडीएम, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) और लोक शिकायत निवारण जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी राजस्व सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।


राजस्व सेवा के अधिकारियों की एक और प्रमुख मांग राज्य कैबिनेट के निर्णय संख्या 23 और 30 को वापस लेने की है। उनका कहना है कि इन निर्णयों से उनके संवर्गीय अधिकारों पर असर पड़ रहा है। साथ ही वे चाहते हैं कि राजस्व से जुड़े प्रमुख पदों का संवर्गीय संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि इन पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारियों की ही नियुक्ति हो सके। इसके अलावा सेवा शर्तों में सुधार, पदोन्नति की स्पष्ट व्यवस्था, प्रशासनिक अधिकार, मानव संसाधन प्रबंधन और कार्य में स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को भी आंदोलन का अहम हिस्सा बनाया गया है।


हड़ताल के कारण राज्य के 537 अंचलों में राजस्व से जुड़े कामकाज पर असर पड़ रहा है। जमीन म्यूटेशन, दाखिल-खारिज, परिमार्जन, जमीन विवाद और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में देरी हो रही है। आम लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और कई जरूरी काम लंबित पड़े हैं।


इसी बीच आंदोलन को और तेज करने के लिए हड़ताली अधिकारियों ने रविवार को पटना में महाजुटान का फैसला किया है। “बिरसा एवं बरसा यूनाइटेड संयुक्त संघर्ष मोर्चा” के बैनर तले बड़ी बैठक और महाधरना कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में आगे की आंदोलनात्मक रणनीति तय की जाएगी।


उधर सरकार भी इस मुद्दे को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। राज्य सरकार की ओर से अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि हड़ताल की स्थिति ज्यादा लंबी नहीं चलने दी जाएगी। सरकार के निर्देश पर हड़ताल पर गए अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी सूची तैयार की जा रही है। साथ ही यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि कौन-कौन अधिकारी कब से हड़ताल पर हैं और क्या उन्होंने काम पर लौटने का कोई संकेत दिया है या नहीं।


सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था भी शुरू कर दी है। निर्देश दिया गया है कि जहां राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर हैं, वहां उनका काम पंचायत सचिव करेंगे। वहीं अंचलाधिकारी (CO) की जिम्मेदारी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को सौंपी जा सकती है, ताकि प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप न हो।


सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर हड़ताल जारी रहती है तो संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि हड़ताली अधिकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और जब तक सरकार सकारात्मक पहल नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।अब सबकी नजर पटना में होने वाले महाजुटान और सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार की सख्ती के बाद अधिकारी काम पर लौटते हैं या आंदोलन को और तेज करते हैं।