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Bihar Land Survey : अमीन और राजस्व कर्मचारियों की कमी से दाखिल-खारिज जमीन सर्वे और 45 लाख आवेदन अटके, जानिए खाली पदों की संख्या

राज्य में अमीन और राजस्व कर्मचारियों के 11,831 पद खाली। दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और जमीन सर्वे का काम प्रभावित, 45 लाख आवेदन लंबित।

02-Mar-2026 11:58 AM

By First Bihar

Bihar Land Survey : राज्य में जमीन से जुड़े कार्यों की रफ्तार कर्मचारियों की भारी कमी के कारण धीमी पड़ गई है। सरकारी अमीन और राजस्व कर्मचारियों के हजारों पद खाली होने से दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, लगान भुगतान, एलपीसी (भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र) जैसे जरूरी काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राजस्व कर्मचारियों के कुल 11,775 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 3,767 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 8,008 पद खाली पड़े हैं। खाली पदों को भरने की दिशा में पहल जरूर की गई है। वर्ष 2023 में 3,559 पदों पर बहाली के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग से आग्रह किया गया था। इसके बाद वर्ष 2025 में शेष 4,492 पदों को भरने के लिए फिर से अधियाचना भेजी गई है। हालांकि, जब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक जमीनी स्तर पर समस्याएं बनी रहेंगी।


इसी तरह सरकारी अमीन के कुल 13,752 पद स्वीकृत हैं। इनमें 2,502 नियमित पद हैं, जिनमें मात्र 1,199 अमीन कार्यरत हैं। नियमित श्रेणी में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। वर्ष 2025 में 765 पदों को भरने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। जमीन सर्वे के लिए संविदा पर 11,250 अमीन पदों की मंजूरी दी गई थी, जिनमें 8,730 अमीन काम कर रहे हैं, जबकि 2,520 पद अब भी खाली हैं।


वर्ष 2019 से राज्य में जमीन सर्वे का कार्य चल रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण यह प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। फिलहाल 20 जिलों के 89 अंचलों के 5,657 गांवों में सर्वे कार्य चल रहा है। इनमें से अब तक केवल 1,001 गांवों में ही सर्वे पूरा कर अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित हो सका है। वहीं अगस्त 2024 से 18 जिलों के 448 अंचलों के 37,384 मौजों में सर्वे की शुरुआत हुई है, जो अभी प्रारंभिक चरण में है।


बीते वर्ष अगस्त-सितंबर तक पूरे राज्य में राजस्व महाभियान के तहत करीब 45 लाख आवेदन विभाग को प्राप्त हुए। इन आवेदनों के निपटारे की जिम्मेदारी भी राजस्व कर्मचारियों पर ही है। पंचायत भवनों में बैठकर रैयतों के सामने आवेदन निष्पादन किया जा रहा है। इनमें अधिकतर मामले परिमार्जन प्लस से जुड़े हैं, जिसमें जमीन के कागजात को ऑनलाइन करते समय हुई त्रुटियों को सुधारा जाता है। लेकिन सीमित संख्या में कर्मचारियों पर लाखों आवेदनों का बोझ होने से निष्पादन में देरी हो रही है।


उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा द्वारा विभाग का कार्यभार संभालने के बाद जमीन संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। प्रमंडलीय मुख्यालयों में भूमि सुधार जन कल्याण संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में उपमुख्यमंत्री स्वयं और विभाग के प्रधान सचिव आम लोगों की शिकायतें सुनते हैं और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान का निर्देश देते हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सीओ और राजस्व कर्मचारियों पर ही है, जिनकी संख्या पर्याप्त नहीं है।