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10-Mar-2026 08:15 AM
By First Bihar
Bihar Politics : बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पांच सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में जहां एनडीए और महागठबंधन अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं, वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने फिलहाल ‘देखो और इंतजार करो’ की रणनीति अपनाई है। पार्टी प्रमुख Asaduddin Owaisi ने अपने विधायकों को अभी किसी भी पक्ष में जल्दबाजी में फैसला नहीं लेने की सलाह दी है।
दरअसल सोमवार को पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष Akhtarul Iman ने नई दिल्ली में ओवैसी से मुलाकात की। इस मुलाकात में बिहार के मौजूदा राजनीतिक समीकरण और राज्यसभा चुनाव की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी प्रमुख को बताया कि चुनाव को लेकर नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav और रालोमो सांसद Upendra Kushwaha ने उनसे संपर्क किया है।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता Adil Hasan ने बताया कि फिलहाल पार्टी आलाकमान ने विधायकों को ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपनाने को कहा है। उन्होंने कहा कि अभी मतदान में पांच दिन का समय बाकी है, ऐसे में जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के बजाय सभी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान से देखने का निर्देश दिया गया है।
चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। निर्धारित समय सीमा सोमवार अपराह्न तीन बजे तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना नाम वापस नहीं लिया। इसके कारण सभी छह उम्मीदवार मैदान में बने हुए हैं। अब 16 मार्च को मतदान होना तय है। इन सीटों के लिए उम्मीदवारों ने गुरुवार को विधानसभा में नामांकन दाखिल किया था। इसके बाद से ही राजनीतिक दलों के बीच जोड़-तोड़ और रणनीति बनाने का दौर तेज हो गया है।
एनडीए और महागठबंधन की स्थिति
एनडीए ने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के नेतृत्व में पांच उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin, जदयू के Ramnath Thakur, भाजपा के Shivesh Ram और रालोमो प्रमुख Upendra Kushwaha शामिल हैं। दूसरी ओर महागठबंधन की ओर से राजद ने Amrendra Dhari Singh को उम्मीदवार बनाया है। दिलचस्प बात यह है कि जदयू के रामनाथ ठाकुर, रालोमो के उपेंद्र कुशवाहा और राजद के अमरेन्द्रधारी सिंह फिलहाल राज्यसभा के मौजूदा सदस्य हैं और उन्हें एक बार फिर से टिकट दिया गया है।
हरिवंश का टिकट कटा
इस चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक फैसला यह भी रहा कि जदयू ने राज्यसभा के उपसभापति Harivansh Narayan Singh का टिकट काट दिया है। उनके स्थान पर नए समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने दूसरी रणनीति अपनाई है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा भी हो रही है।
पांचवीं सीट पर टिकी नजर
राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 41 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। बिहार विधानसभा में एनडीए के पास फिलहाल 202 विधायक हैं। इस आंकड़े के आधार पर एनडीए की चार सीटें लगभग पक्की मानी जा रही हैं।
चार सीट जीतने के बाद एनडीए के पास 38 विधायक बचेंगे। ऐसे में पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे कम से कम तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। यही कारण है कि अब एनडीए की नजर अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों पर टिकी हुई है।
दूसरी ओर महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं। इनमें राजद के 25, कांग्रेस के छह, माले के दो तथा सीपीएम और आईआईपी के एक-एक विधायक शामिल हैं। इस स्थिति में महागठबंधन को भी पांचवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी।
AIMIM की भूमिका बन सकती है निर्णायक
ऐसे राजनीतिक समीकरणों के बीच AIMIM की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। अगर पार्टी किसी पक्ष को समर्थन देती है तो पांचवीं सीट का परिणाम बदल सकता है। यही वजह है कि दोनों बड़े गठबंधन AIMIM के रुख पर नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल ओवैसी की ‘देखो और इंतजार करो’ की रणनीति ने चुनावी मुकाबले को और भी रोचक बना दिया है। अब सबकी नजर 16 मार्च को होने वाली वोटिंग और उससे पहले बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई है।