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16-Mar-2026 12:36 PM
By First Bihar
Bihar News : बिहार के राज्यसभा चुनाव में इस बार सियासी गणित काफी दिलचस्प हो गया है। खास तौर पर AIMIM के रुख ने पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने आखिरकार अपने पत्ते खोल दिए हैं और अपने पांचों विधायकों के जरिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार अमरेंद्र सिंह को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद महागठबंधन की राह जरूर कुछ आसान होती नजर आ रही है, लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या यह समर्थन बिना किसी शर्त के दिया गया है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक डील हुई है।
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में समीकरण काफी बदल गए थे। चुनाव के दौरान AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय RJD और कांग्रेस ने उसे अपने साथ लेने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद अब राज्यसभा चुनाव के दौरान RJD की जीत का गणित कहीं न कहीं AIMIM के विधायकों के समर्थन पर आकर टिक गया है।
राज्यसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद शुरुआत में AIMIM ने अपना उम्मीदवार उतारने का संकेत दिया था, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया था। लेकिन मतदान से ठीक एक दिन पहले पार्टी ने अचानक अपना रुख बदलते हुए RJD को समर्थन देने का फैसला कर लिया। इस फैसले का ऐलान बिहार AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तारुल ईमान ने किया। उन्होंने तेजस्वी यादव के साथ रोजा इफ्तार कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कहा कि उनकी पार्टी के सभी पांच विधायक राज्यसभा चुनाव में RJD उम्मीदवार को वोट देंगे।
AIMIM के इस समर्थन से तेजस्वी यादव को सियासी तौर पर राहत जरूर मिली है, लेकिन इसके पीछे संभावित राजनीतिक समझौते की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक AIMIM ने अपने पांच विधायकों के वोट के बदले एक बड़ी शर्त रखी है। कहा जा रहा है कि पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में समर्थन देने के बदले बिहार विधान परिषद की एक सीट की मांग की है।
बताया जा रहा है कि AIMIM अपने प्रवक्ता आदिल हसन को विधान परिषद भेजना चाहती है। हालांकि, पार्टी के पास अकेले दम पर ऐसा करने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं। AIMIM के पास सिर्फ पांच विधायक हैं, जबकि किसी एक उम्मीदवार को विधायक कोटे से विधान परिषद भेजने के लिए कम से कम 25 विधायकों के वोट की जरूरत होती है।
दूसरी तरफ RJD के पास भी अपने दम पर सीमित संख्या में विधायक हैं। ऐसे में राजनीतिक जानकार इसे ‘एक हाथ से दो, एक हाथ से लो’ वाली रणनीति बता रहे हैं। यानी राज्यसभा चुनाव में AIMIM RJD का समर्थन करेगी और बदले में RJD भविष्य में विधान परिषद चुनाव के दौरान AIMIM को मौका दे सकती है।
बिहार में साल 2026 में विधान परिषद की कुल 17 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इनमें से 9 सीटों का कार्यकाल जून 2026 में खत्म हो रहा है, जिनके लिए मई में चुनाव होने की संभावना है। इन सीटों में दो RJD, तीन जदयू, एक कांग्रेस और एक बीजेपी की सीट शामिल हैं, जबकि दो सीटें पहले से ही खाली हैं। इसके अलावा नवंबर 2026 में भी आठ सीटें खाली होने वाली हैं। इनमें बीजेपी की दो, सीपीआई की एक, कांग्रेस की एक, जदयू की एक और दो निर्दलीय सीटें शामिल हैं। इनमें चार सीटें स्नातक और चार शिक्षक कोटे की हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जून में होने वाला चुनाव विधायक कोटे का होगा, जिसमें एक सीट जीतने के लिए करीब 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। RJD अपने दम पर एक सीट जीत सकती है, लेकिन दूसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में AIMIM के साथ संभावित समझौते की चर्चा और मजबूत हो जाती है।
फिलहाल AIMIM के समर्थन से राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं। हालांकि यह भी देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी दोस्ती सिर्फ राज्यसभा चुनाव तक सीमित रहती है या फिर भविष्य में AIMIM औपचारिक रूप से महागठबंधन का हिस्सा बनती है। फिलहाल बिहार की राजनीति में राज्यसभा के बदले विधान परिषद सीट की डील की चर्चा तेज है।