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01-Mar-2026 10:26 AM
By First Bihar
Bihar Politics : Lalu Prasad Yadav की सक्रियता के बीच बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। Asaduddin Owaisi की पार्टी All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (एआईएमआईएम) की रणनीतिक चुप्पी और संभावित दावेदारी ने Rashtriya Janata Dal (राजद) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संख्या बल ऐसा नहीं कि राजद सीधे मैदान से हटने का ऐलान कर दे, लेकिन जीत की गारंटी भी नहीं दिख रही। ऐसे में पार्टी के लिए सटीक रणनीति तय करना जरूरी हो गया है, ताकि कमजोर विपक्ष का संदेश न जाए।
इसी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए रविवार को पटना में राजद संसदीय दल की अहम बैठक बुलाई गई है। राबड़ी आवास पर होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता खुद लालू प्रसाद करेंगे। इसमें सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों और प्रमुख रणनीतिकारों की मौजूदगी रहेगी। बैठक का मुख्य एजेंडा राज्यसभा की पांचवीं सीट पर प्रत्याशी उतारने या नहीं उतारने के फैसले पर सहमति बनाना है। यदि दावेदारी का निर्णय होता है, तो संभावित उम्मीदवार के नाम पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होगा।
सूत्रों के अनुसार पार्टी ऐसे उम्मीदवार की तलाश में है, जिसे संसदीय राजनीति का अनुभव हो और जो चुनावी चुनौती का सामना करने में सक्षम हो। आर्थिक रूप से मजबूत होना भी एक अहम मानदंड माना जा रहा है। इस कसौटी पर फिलहाल दो बड़े कारोबारियों के नाम चर्चा में हैं, जिनमें एक मुस्लिम समाज से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से किसी नाम की पुष्टि नहीं की गई है।
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें रिक्त हो रही हैं। इनमें तीन सीटें एनडीए और दो सीटें राजद की हैं। नामांकन की प्रक्रिया पांच मार्च से शुरू होगी और जरूरत पड़ने पर 18 मार्च को मतदान होगा। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष Tejashwi Yadav पहले ही महागठबंधन की ओर से प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर चुके हैं। इस घोषणा से पहले एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष Akhtarul Iman ने तेजस्वी यादव से मुलाकात कर अपनी पार्टी के प्रत्याशी के लिए महागठबंधन का समर्थन मांगा था।
एआईएमआईएम के बिहार विधानसभा में पांच विधायक हैं। महागठबंधन की मौजूदा ताकत 35 विधायकों की है, जिसमें राजद के 25, कांग्रेस के छह, वामदलों के तीन और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी का एक विधायक शामिल है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। ऐसे में राजद को छह अतिरिक्त वोटों की दरकार है। कांग्रेस की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है।
दूसरी ओर 202 विधायकों वाले एनडीए के लिए चार सीटों पर जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। पांचवीं सीट के लिए उसे मात्र तीन अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना होगा। विधानसभा में एक विधायक बसपा का है और पांच एआईएमआईएम के। यदि पांचवीं सीट के लिए एनडीए, राजद और एआईएमआईएम तीनों प्रत्याशी उतारते हैं, तो मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है।
ऐसी स्थिति में केवल प्रथम वरीयता के वोट ही नहीं, बल्कि द्वितीय और तृतीय वरीयता के मतों का महत्व भी बढ़ जाएगा। रणनीतिक गठजोड़ और क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शनिवार दोपहर तेजस्वी यादव के खुद प्रत्याशी बनने की चर्चा भी जोर पकड़ती रही, हालांकि पार्टी की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
कुल मिलाकर राज्यसभा की पांचवीं सीट बिहार की राजनीति का नया शक्ति परीक्षण बनती दिख रही है। एआईएमआईएम का अंतिम रुख, कांग्रेस की रणनीति और राजद की बैठक में लिया गया फैसला आने वाले दिनों की सियासी दिशा तय करेगा। विपक्ष के लिए यह चुनाव महज एक सीट का सवाल नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने की भी परीक्षा बन गया है।