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16-Mar-2026 08:03 AM
By First Bihar
BIHAR NEWS : बिहार की सियासी हलचल अपने चरम पर है, क्योंकि राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान आज होने जा रहा है। सुबह से ही विधायकों का विधानसभा भवन में पहुंचना शुरू हो गया है। भाजपा सहित कई प्रमुख पार्टियों के विधायक अपने-अपने दल के निर्देशों के अनुसार विधानसभा पहुंचे हैं। इस बार के चुनाव में पारदर्शिता और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि हर वोट निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से डाला जा सके।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया काफी अलग होती है। यहां विधायकों के वोटिंग के बाद, हर विधायक को अपनी पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि को यह दिखाना होता है कि उसने किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। यही प्रक्रिया मतदान की वैधता सुनिश्चित करती है। मतदान कक्ष में हर पार्टी का प्रतिनिधि मौजूद रहेगा ताकि प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विवाद न हो।
मतदान प्रक्रिया सुबह 9 बजे शुरू होगी और शाम 4 बजे तक चलेगी। इसके बाद मतगणना का काम शाम 5 बजे से शुरू होगा। मतगणना पूरी तरह से पारदर्शी ढंग से होगी और हर चरण में पार्टी प्रतिनिधियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। चुनाव आयोग के अनुसार, पहली वरीयता के आधार पर यदि किसी उम्मीदवार को आवश्यक मत नहीं मिलते हैं तो दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती की जाएगी। दूसरी वरीयता केवल उन सीटों पर गिनी जाएगी, जहां पहली वरीयता के आधार पर निर्णय नहीं हो पाया है।
इस चुनाव में पहली वरीयता के 41 वोट एक सीट पर जीत के लिए आवश्यक हैं। विधायकों को मतपत्र पर अपने पसंद के उम्मीदवार के नाम के आगे क्रमशः एक, दो और तीन अंक लिखने होंगे। “1” अंक का मतलब है कि विधायक ने उस उम्मीदवार को अपनी पहली वरीयता दी है, वहीं “2” और “3” अंकों का मतलब दूसरी और तीसरी पसंद है। यह बहुवरीय मत प्रणाली सुनिश्चित करती है कि सभी उम्मीदवारों के लिए मतदान निष्पक्ष रूप से हो।
सुरक्षा और नियमों के पालन के लिए मतदान कक्ष के अंदर विधायकों को मोबाइल, पर्स या किसी भी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के साथ आने की अनुमति नहीं है। केवल विधानसभा द्वारा प्रदान की गई बैगनी स्कैच पेन का ही उपयोग मतपत्र भरने में किया जा सकता है। किसी भी अन्य पेन से वोटिंग करने पर मत अवैध माना जाएगा।
राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गलियारों में खलबली मची हुई है। सभी दलों की नजरें प्रत्येक सीट पर हैं, और किसी भी अप्रत्याशित परिणाम से सियासी समीकरण बदल सकते हैं। खासकर इस बार, बिहार विधानसभा में विभिन्न पार्टियों के बीच गठबंधन और सीटों के समीकरण को लेकर रणनीतियां पहले से ही बनी हुई हैं।
मतगणना के बाद परिणाम आने के तुरंत बाद ही राजनीतिक दलों द्वारा जीत या हार की प्रतिक्रिया सामने आएगी। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि पहली वरीयता के वोट के आधार पर अधिकतर सीटों का निर्णय हो सकता है, लेकिन कुछ सीटों पर दूसरी वरीयता का रोल निर्णायक साबित हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव का यह चरण सिर्फ विधायकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह चुनाव राज्य की सियासत में नई दिशा और संभावनाओं का संकेत देता है। चाहे किसी पार्टी के लिए जीत हो या हार, यह परिणाम अगले कुछ महीनों की सियासी रणनीति पर असर डालेगा।
इस प्रकार, बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 की वोटिंग प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित और सुरक्षा के मानकों के अनुरूप आयोजित की जा रही है। मतदाताओं के लिए यह एक अप्रत्यक्ष चुनाव है, लेकिन राजनीतिक महत्व के मामले में इसका असर पूरे राज्य और केंद्र सरकार की सियासत पर पड़ता है।