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14-Mar-2026 07:30 AM
By First Bihar
Rajya Sabha Election 2026 : बिहार में लगभग 12 वर्षों के बाद एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की पांच राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और इसके बाद उसी दिन मतगणना कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। इस बार छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि पांच सीटों पर चुनाव होना है। ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा पांचवीं सीट को लेकर हो रही है, जहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों के आधार पर राज्यसभा चुनाव में विधायकों के वोट से परिणाम तय होगा। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए चार सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि पांचवीं सीट पर मुकाबला कांटे का हो सकता है।
इस बार जदयू ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। वहीं भाजपा की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश राम मैदान में हैं। दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अमरेन्द्रधारी सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस प्रकार पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक बन गया है।
दरअसल अप्रैल महीने में बिहार से पांच राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें जदयू के हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर, राजद के प्रेम गुप्ता और अमरेन्द्रधारी सिंह तथा रालोमो के उपेन्द्र कुशवाहा शामिल हैं। हालांकि जदयू ने इस बार हरिवंश नारायण सिंह को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है, जबकि राजद ने अमरेन्द्रधारी सिंह पर फिर से भरोसा जताया है।
विधानसभा में विधायकों की संख्या को देखते हुए एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। इस वजह से चार सीटों पर जदयू के दो और भाजपा के दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन चार सीटों पर मतदान के बाद एनडीए के पास लगभग 38 वोट सरप्लस बचेंगे, जबकि राजद के पास करीब 35 वोट हैं। ऐसे में पांचवीं सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
इस चुनाव में अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका भी अहम हो सकती है। एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक का वोट है। इन छह वोटों को इस चुनाव की ‘किंगमेकर’ भूमिका में देखा जा रहा है। दोनों पक्ष इन विधायकों के समर्थन के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो चुनाव का परिणाम और भी अप्रत्याशित हो सकता है। हालांकि राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में लगे हुए हैं।
गौरतलब है कि बिहार में इससे पहले 2014 में राज्यसभा चुनाव के दौरान मतदान की नौबत आई थी। उस समय जदयू के पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियाबी को क्रमशः 122 और 123 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी अनिल शर्मा और साबिर अली को क्रमशः 108 और 107 वोट मिले थे। वहीं तीसरी सीट पर शरद यादव निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। अब एक बार फिर 12 साल बाद राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है। ऐसे में सबकी नजर 16 मार्च पर टिकी है, जब यह साफ हो जाएगा कि पांचवीं सीट किसके खाते में जाती है।