ब्रेकिंग न्यूज़

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की अपील का असर, करीब 300 राजस्व अधिकारी हड़ताल छोड़ काम पर लौटे नालंदा में 17 हजार रुपये घूस लेते शिक्षक गिरफ्तार, विजिलेंस की टीम ने रंगेहाथ दबोचा Bihar Crime News: फायरिंग मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन, छह लोगों को किया गिरफ्तार; पिस्टल और गोलियां बरामद Bihar Crime News: फायरिंग मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन, छह लोगों को किया गिरफ्तार; पिस्टल और गोलियां बरामद Bihar News: राज्यसभा की पांचों सीट पर NDA प्रत्याशी जीते, जेडीयू महासचिव बोले– नीतीश कुमार के नेतृत्व की जीत सरकारी भवनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने राज्य में 10 उड़नदस्ता टीमें गठित, विशेष जांच अभियान ‘राज्यसभा चुनाव में BJP ने की विधायकों की खरीद-फरोख्त’, मुकेश सहनी का बड़ा आरोप ‘राज्यसभा चुनाव में BJP ने की विधायकों की खरीद-फरोख्त’, मुकेश सहनी का बड़ा आरोप Bihar Ips Officer: बिहार के 2 आईपीएस अधिकारियों की CBI में हुई नियुक्ति...बनाए गए SP, सरकार ने किया विरमित बिहार में पैक्स और एफपीओ को उद्यमी के रूप में किया जाएगा विकसित, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

Home / bihar / patna-news / Bihar News: एनडीए के संकटमोचक बने चौधरीद्वय ! कब लॉन्च हुआ ऑपरेशन और...

Bihar News: एनडीए के संकटमोचक बने चौधरीद्वय ! कब लॉन्च हुआ ऑपरेशन और कब हुआ पूरा ? अंदर की खबर जानें....

रास चुनाव में एनडीए ने रणनीतिक ‘ऑपरेशन चौधरी’ चलाकर महागठबंधन को बड़ा झटका दिया। कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक वोटिंग से गायब रहे, जिससे तेजस्वी की रणनीति ध्वस्त हो गई। सम्राट चौधरी और अशोक चौधरी की सक्रियता से एनडीए ने विपक्षी खेमे सेंध लगाया

16-Mar-2026 12:04 PM

By Viveka Nand

Bihar News: बिहार में राज्यसभा का चुनाव काफी दिलचस्प रहा. पांच सीटों पर हुए मतदान से पहले एनडीए और महागठबंधन के बीच शह-मात का खेल जारी रहा. एनडीए जहां तीन वोट की जुगाड़ में दिन-रात एक कर दिया. वहीं महागठबंधन मैजिक संख्या को छूने को बेताब रहा. एआईएमआईएम को अपने पाले में लाकर तेजस्वी यादव ने मास्टर स्ट्रोक खेल दिया.इधऱ, एनडीए ने कम से कम तीन विधायकों की जुगाड़ को लेकर बड़ा ऑपरेशन चलाया. दो चौधरी एनडीए के लिए संकटमोचक बनकर उभरे.

महागठबंधन के चार विधायकों ने दिया गच्चा

राज्यसभा की पांच सीटों पर हुई वोटिंग में कांग्रेस पार्टी के तीन और राजद के एक विधायक अनुपस्थित रहे. विपक्षी खेमे से चार विधायकों के गायब रहने की वजह से तेजस्वी यादव संकट में पड़ गए। कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह,मनोज विश्वास और सुरेन्द्र कुशवाहा ने वोटिंग से दूरी बना ली. वहीं राजद के ढाका से विधायक फैसल रहमान ने भी दल से बगावत कर दिया. ये भी रास चुनाव से दूर रहे. इस तरह से राजद प्रत्याशी एडी सिंह को चार वोटों का सीधा नुकसान हो गया. राजद प्रत्याशी को जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की दरकार थी. राजद-कांग्रेस-वामदल-बसपा- एआईएमआईएम व आईपी गुप्ता को मिलाकर यह संख्या 41 पहुंच रही थी. लेकिन एनडीए ने ऐसा ऑपरेशन चलाया,जिससे तेजस्वी यादव चारो खाने चित्त हो गए. कांग्रेस के तीन विधायक तो बागी हुए ही, इनके विधायक भी बागी हो गए। इस तरह से तेजस्वी यादव को एनडीए ने बड़ा झटका दे दिया. 

कैसे चला ऑपरेशन.....

राज्यसभा चुनाव की घोषणा वैसे तो 18 फऱवरी 2026 को हुई थी. लेकिन इसकी तैयारी काफी पहले से शुरू हो गई थी. एनडीए ने दिसंबर 2025 से ही चुनाव की तैयारी शुरू कर दिया था. भाजपा-जेडीयू के नेता वोटों की जुगाड़ में जुट चुके थे. दरअसल, भाजपा-जेडीयू नेताओं को यह पहले से समझ थी कि, बिहार में रास की पांच सीटों पर चुनाव होने हैं. सभी सीटों पर जीत के लिए कुछ और विधायकों के वोट का जुगाड़ करना पड़ेगा. इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए गठबंधन के नेता दिसंबर महीने से ही काम में लग गए थे. दो चौधरी के कंधों पर ऑपरेशन की कमान सौंपी गई थी. ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए महागठबंधन के करीब दर्जन भर विधायकों से संपर्क साधा गया. शुरू में कई विधायक इसके लिए तैयार नहीं हुए, कई ने प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया.  

NDA के संकटमोचक बने दो चौधरी 

महागठबंधन के विधायकों पर पाले में लाने की कमान सम्राट चौधरी और जेडीयू में अशोक चौधरी के कंधों पर दी गई थी. उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसकी तैयारी दिसंबर से ही शुरू कर दी. नजर, कांग्रेस, बसपा-एआईएमआईएम विधायकों पर थी. पहले राउंड में उन्होंने अपने स्वजातीय कांग्रेस विधायक सुरेन्द्र कुशवाहा व अन्य विधायकों से संपर्क साधा. इधऱ, जेडीयू कोटे से मंत्री अशोक चौधरी ने राजद विधायक फैसल रहमान से वार्ता शुरू की. शुरूआती बातचीत पॉजिटिव रहने के बाद दोनों नेताओं ने विस्तार दिया. इसके बाद तो कई ठिकानों पर कई राउंड की बातचीत हुई. सम्राट चौधरी की बातचीत के बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने मोर्चा संभाल लिया. इनके नेतृत्व में राजद विधायक फैसल रहमान से शुरू किया गया ऑपरेशन कांग्रेस की तरफ बढ़ाया और उनके चार विधायकों को अपनी तरफ कर लिया. 

अशोक चौधरी के करीबी फैसल रहमान के आवास पर दिसंबर महीने में हुई थी बैठक 

दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में राजद विधायक फैसल रहमान के आवास पर बैठक हुई। बैठक बेहद गोपनीय रखी गई. बताया जाता है कि मंत्री अशोक चौधरी भी अकेले उस मीटिंग में गए थे. जिसमें राजद के दो विधायक मौजूद थे., इसके अलावे कांग्रेस के चनपटिया से विधायक अभिषेक रंजन, बाल्मीकिनगर से विधायक सुरेन्द्र कुशवाहा, बसपा विधायक सतीश यादव समेत छह विधायक मौजूद रहे. राजद विधायक के घऱ मीटिंग में बातचीत काफी पॉजिटिव रही. इसके बाद अशोक चौधरी ने कांग्रेस के मनिहारी से विधायक मनोहर प्रसाद सिंह और मनोज विश्वास से संपर्क साधा. 

कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह को रिश्तेदारों के माध्यम से किया गया तैयार 

शुरूआती दौर में मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह  इसके लिए तैयार नहीं थे. काफी मान मनौव्वल के बाद भी वे तैयार नहीं हुए। इसके बाद सम्राट चौधरी और अशोक चौधरी ने कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह के परिवार वालों से संपर्क साधा.समझा-बुझाकर और भविष्य बताकर इसके लिए तैयार किया गया, तब जाकर मनोहर प्रसाद सिंह तैयार हुए। फारबिसगंज के कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास को भी चौधरी की जोड़ी ने पार्टी से अलग रास्ता पकड़वा दिया. इस तरह से चौधरीद्वय कई राउंड की बातचीत के बाद कांग्रेस के छह में चार विधायकों को अपने पाले में मिलाने में कामयाब रहे. बसपा विधायक सतीश यादव भी एनडीए के पक्ष में आने को लेकर बातचीत की गई, शुरूआती दौर की बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन अंत समय से खेल बदल गया और वे महागठबंधन के साथ खड़े हो गए।

ऑपरेशन में थोड़ा नुकसान भी हुआ

कांग्रेस के छह में से 4 विधायकों को तोड़ने का फार्मूला पूरी तरह से सेट था. इसी बीच मतदान से 24 घंटे पहले कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन पीछे हट गए. पीछे हटने के पीछे कई वजहें बताई जा रही है. बताया जा रहा है कि वे जेडीयू में एडजस्टमेंट चाहते थे, लेकिन पार्टी इसके लिए तैयार नहीं थी. चनपटिया विधायक अभिषेक के बैक होने के पीछे एक और चर्चा है,बताया जाता है कि राजद प्रत्याशी एडी सिंह की सेटिंग ने भी उनके बैक होने पर मजबूर कर दिया. वजह चाहे जो भी हो लेकिन बगावत के रास्ते पर निकले कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन फिलहाल कांग्रेस में हैं और आज उन्होंने अपना वोट भी दिया है. जिस तरह से एनडीए ने कांग्रेस के चार विधायकों को तैयार किया था, अगर अभिषेक रंजन बैक नहीं होते तो सभी चार विधायक आज वोटिंग के दिन उपस्थित रहते और एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में वोट करते . एक विधायक के बैक होने की वजह से ही बाकी के तीन कांग्रेस विधायक भी वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं रहे. 

नीतीश के लिए आजमाये हुए हथियार हैं अशोक चौधरी

जेडीयू के वरिष्ठ नेता व मंत्री अशोक चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आजमाए हुए हथियार हैं. याद करिए वर्ष 2024, जब बिहार में सत्ता का परिवर्तन हो रहा था. नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़कर एनडीए में आए थे और नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. बहुमत परीक्षण से पहले जेडीयू के कई विधायकों ने बगावत कर दिया था. 8-10 विधायक राजद के संपर्क में थे. इसके बाद नाराज विधायकों को मनाने-जबरन साथ रखने,विधानसभा लाने का ऑपरेशन लॉन्च किया गया था. तब भी इस अभियान का नेतृत्व मंत्री अशोक चौधरी ने किया था. ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रही थी. इस तरह से नीतीश सरकार पर आये संकट के बादल टल गए थे.