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04-Apr-2026 11:09 AM
By First Bihar
Bihar School News : बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार अब निजी निवेशकों और स्कूल संचालकों के लिए नियमों को सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के नेतृत्व में सरकार ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को शिक्षा क्षेत्र में भी लागू करने की तैयारी में है, जिससे प्राइवेट स्कूल खोलने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकती है।
सरकार का मानना है कि अगर निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया जाए, तो राज्य में शिक्षा के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसी सोच के तहत निजी स्कूलों से जुड़ी मौजूदा नियमावली में संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है। इस पहल को लागू करने के लिए उद्योग विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि शिक्षा विभाग भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहा है। माध्यमिक शिक्षा के विशेष निदेशक को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
फिलहाल बिहार में किसी भी निजी स्कूल को Central Board of Secondary Education (CBSE) या Council for the Indian School Certificate Examinations (ICSE) से मान्यता प्राप्त करने के लिए शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना जरूरी होता है। लेकिन यह प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली मानी जाती है। सबसे बड़ी चुनौती जमीन से जुड़ी शर्तें हैं, जो छोटे निवेशकों के लिए बड़ी बाधा बनती हैं।
मौजूदा नियमों के अनुसार, CBSE से संबद्ध स्कूल खोलने के लिए कम से कम एक एकड़ भूमि अनिवार्य है, जबकि ICSE स्कूल के लिए 50 डिसमिल जमीन होना जरूरी होता है। इसके अलावा, हर तीन साल पर NOC का नवीनीकरण कराना भी जरूरी है, जिससे स्कूल संचालकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यही वजह है कि कई इच्छुक निवेशक इस क्षेत्र में कदम रखने से हिचकिचाते हैं।
अब सरकार इन शर्तों में ढील देने की योजना बना रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत जमीन की अनिवार्यता को कम किया जा सकता है या उसे लचीला बनाया जा सकता है। इसके साथ ही NOC रिन्यूअल की प्रक्रिया को भी सरल करने या उसकी समय-सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो इससे निजी स्कूल खोलना काफी आसान हो जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि इन सुधारों से राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ेगी। निजी निवेश बढ़ने से शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी, जिससे छात्रों को बेहतर सुविधाएं और आधुनिक शिक्षा मिल सकेगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिहार के शिक्षा ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। अगर नियमों को संतुलित तरीके से सरल बनाया गया, तो यह न केवल निवेशकों को आकर्षित करेगा, बल्कि राज्य के बच्चों के लिए भी बेहतर भविष्य की राह खोलेगा।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह पहल शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा सुधार साबित हो सकती है, जो आने वाले समय में राज्य की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है।