Bihar News : बिहार के गांवों में बिजली कब गुल हुई, कितनी देर तक आपूर्ति बाधित रही और पूरे दिन में कितने घंटे बिजली मिली, अब इन सवालों का जवाब जनप्रतिनिधियों को आसानी से मिल सकेगा। बिजली कटौती को लेकर मिलने वाली शिकायतों और वास्तविक आपूर्ति के बीच अंतर पता लगाने के लिए बिहार सरकार एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत सांसद, विधायक और पंचायतों के मुखिया को उनके क्षेत्र में होने वाली बिजली कटौती का पूरा ब्योरा सीधे फोन पर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायती राज विभाग को इसके लिए विशेष व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है।
अब तक ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या सामने आने पर लोगों को स्थानीय बिजली कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार जनप्रतिनिधियों तक भी शिकायतें पहुंचती थीं, लेकिन किसी पंचायत में वास्तव में कितनी देर बिजली कटी और कितने घंटे आपूर्ति हुई, इसका सटीक आंकड़ा मिलना आसान नहीं था। सरकार की नई पहल इसी समस्या को दूर करने की दिशा में उठाया गया कदम है। इसके तहत पंचायतवार बिजली आपूर्ति की जानकारी जुटाकर संबंधित जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई जाएगी।
पटना में शुक्रवार को लोक सेवक आवास पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था और पंचायतों से जुड़ी विकास योजनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बिजली आपूर्ति की स्थिति को लेकर एक डेडिकेटेड टीम बनाई जाए। यह टीम नियमित रूप से पंचायतों में बिजली मिलने और कटौती होने का हिसाब तैयार करेगी और संबंधित जनप्रतिनिधियों को फोन के माध्यम से इसकी जानकारी देगी।
इस व्यवस्था में सांसद, विधायक और मुखिया को उनके क्षेत्र की पंचायतों का बिजली आपूर्ति रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। मसलन, किसी पंचायत में पूरे दिन में कितने घंटे बिजली रही और कितनी देर तक आपूर्ति बाधित हुई, इसकी जानकारी जनप्रतिनिधियों को मिल सकेगी। इससे बिजली कटौती को लेकर आने वाली शिकायतों की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी। साथ ही जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की बिजली व्यवस्था से जुड़े सवाल अधिकारियों के सामने आंकड़ों के आधार पर उठा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी कड़ी में पंचायत सरकार भवनों के निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ भवन बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके रखरखाव और नियमित देखभाल की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए निर्माण करने वाले ठेकेदारों को ही भवनों के रखरखाव की जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया गया।
पंचायत सरकार भवनों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर ऊर्जा पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के एस्टीमेट में ही सोलर सिस्टम लगाने का प्रावधान शामिल किया जाए। इसके लिए 15वें वित्त आयोग और सप्तम राज्य वित्त आयोग से उपलब्ध राशि का इस्तेमाल करने की बात कही गई। इससे पंचायत सरकार भवनों में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।
बैठक में जलमीनारों पर लगने वाले सोलर पैनलों की क्षमता बढ़ाने का भी अहम निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित पांच किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल की जगह 20 किलोवाट क्षमता के पैनल लगाने को कहा। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में इससे जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
इस बैठक में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी, वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह और संजय कुमार सिंह समेत ऊर्जा, भवन निर्माण और पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार की इस पहल के लागू होने के बाद गांवों में बिजली कटौती का मुद्दा केवल स्थानीय शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगा। जनप्रतिनिधियों को नियमित आंकड़े मिलने से पंचायत स्तर पर बिजली आपूर्ति की निगरानी आसान हो सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था के शुरू होने की तारीख, रिपोर्ट मिलने का निश्चित समय और इसकी कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।