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03-Sep-2025 03:39 PM
By First Bihar
BIHAR POLITICS : बिहार में अगले कुछ महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव कि तारीखों का एलान होना है। इस बार का चुनाव कई मायने में काफी अहम होने वाला है। इस बार समीकरण काफी बदला-बदला नजर आ सकता है। इतना ही नहीं इस बार के चुनावी मुद्दे भी अलग नजर आने वाले हैं। इसी कड़ी में अब जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक विआईपी पार्टी के सर्वेसर्वा मुकेश सहनी ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह हार हाल में इस बार भी विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार को लेकर भी बड़ी बयानबाजी की है।
मुकेश सहनी ने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में मैं खुद मैदान में जरूर रहूँगा। अब आपका सवाल यह है कि सीट कौन सी होगी तो इसका फैसला बाद में बैठक कर किया जाएगा। लेकिन यह तय है कि मैं खुद विधानसभा का चुनाव लडूंगा। इसके अलावा इस बार आपको हमारे पार्टी से मेरे पारिवार के भी कुछ मेंबर मैदान में नजर आ सकते हैं।
सहनी ने इसको लेकर जीतनराम मांझी कि पार्टी को लेकर उदाहरण देते हुए कहा कि आप खुद देख लिगिए कि उन्होंने अपने परिवार के लोगों को पार्टी में रखा और आज उनकी पार्टी भी अच्छे मुकाम पर है। इतना तो तय है कि कल को उन्हें चार आदमी की जरूरत होगी तो अलग बगल ध्यान नहीं देना होगा। ऐसे में हमने भी यह फैसला किया है कि इस बार के चुनाव में मेरे साथ मेरे परिवार के लोग भी मैदान में होंगे। फिलहाल इसको लेकर बातचीत जारी है। जल्द ही बाकी का निर्णय के बारे में अवगत करवाया जाएगा।
मालूम हो कि, मुकेश सहनी मल्लाह जाति से आते है जो बिहार में अति पिछड़ा समाज में आता है, लेकिन मुकेश सहनी लगातार निषाद समाज के उपजातियों को एकजुट करने में लगे हुए हैं, जिनकी आबादी एक अनुमान के मुताबिक बिहार में लगभग आठ से नौ प्रतिशत है। इनमें- गोढ़ी, बनपर, पीयर, चाई, मुरियारी, बिंद, मल्लाह , केवट , कैवर्त और घटवार सहित 13 उपजातियां हैं। जाहिर है लगभग आठ से नौ प्रतिशत की आबादी अति पिछड़ा समाज में कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। अब यह भी तथ्य स्पष्ट है कि इस तबके के सबसे बड़े नेता के तौर पर मुकेश सहनी दावा करते हैं, जिसकी वजह से उनकी राजनीतिक हैसियत काफी मजबूत मानी जाती है।
इधर, राजनीति की जानकार कहते हैं कि मुकेश सहनी की जाति की आबादी का हिस्सा तीन प्रतिशत है, लेकिन उपजातियों को मिलाकर बिहार की आबादी में 8 से 9% का हिस्सा है। आबादी के लिहाज से देखें तो 13 करोड़ की आबादी में लगभग एक करोड चार लाख से लेकर 10 लाख तक की आबादी निषाद समुदाय की है। ऐसे में अगर ये इकट्ठा होते हैं और तो मुसलमानों की 17% और यादवों की 14 प्रतिशत आबादी की हिस्सेदारी के बाद सबसे बड़ा समूह होगा। ऐसे में मुकेश सहनी का महत्व बढ़ ही जाता है।