Bihar News : बिहार पुलिस में तैनात महिला जवानों की सुरक्षा और दंगा नियंत्रण क्षमता बढ़ाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। महिला पुलिसकर्मियों के लिए अब विशेष पॉलीकार्बोनेट लाठी, फुल बॉडी प्रोटेक्टर, पारदर्शी शील्ड और दंगा नियंत्रण हेलमेट खरीदे जा रहे हैं। इन आधुनिक उपकरणों की मदद से महिला जवानों को कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, नए उपकरण दिसंबर 2026 तक उपलब्ध होने की उम्मीद है।


करीब 36 हजार महिला पुलिसकर्मियों को मिलेगा फायदा

बिहार पुलिस में महिला बल की संख्या करीब 36 हजार हो चुकी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ नियंत्रण और अन्य पुलिस अभियानों में महिला जवानों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अभी तक महिला और पुरुष पुलिसकर्मी सामान्य तौर पर एक जैसे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करते थे। अब महिला जवानों की शारीरिक संरचना और ड्यूटी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा गियर उपलब्ध कराने की तैयारी है।


पुलिस मुख्यालय ने करीब 10-10 हजार पॉलीकार्बोनेट लाठी, हेलमेट, फुल बॉडी प्रोटेक्टर और शील्ड खरीदने का ऑर्डर दिया है। इन उपकरणों का इस्तेमाल रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में तैनात महिला जवान भी करती हैं।


हल्की और मजबूत होगी पॉलीकार्बोनेट लाठी

महिला पुलिसकर्मियों को दी जाने वाली पॉलीकार्बोनेट लाठी पारंपरिक बांस या सामान्य लाठी की तुलना में हल्की और अधिक मजबूत होती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका वजन 500 ग्राम से अधिक नहीं होगा। भारी प्रहार की स्थिति में भी इसके टूटने या मुड़ने की आशंका कम रहती है।


लाठी के अलावा नए फुल बॉडी प्रोटेक्टर भी महिला जवानों के लिए विशेष रूप से तैयार किए जा रहे हैं। इनका डिजाइन महिलाओं की शारीरिक संरचना के अनुरूप होगा, ताकि ड्यूटी के दौरान दौड़ने, हाथ उठाने या वाहन चलाने में परेशानी न हो। प्रोटेक्टर में आरामदायक कुशन या पसीना सोखने वाले 3डी मेश फैब्रिक का इस्तेमाल किया जाता है। इससे गर्मी और उमस में लंबे समय तक सुरक्षा उपकरण पहनकर काम करना अपेक्षाकृत सुविधाजनक हो सकता है।


पत्थरबाजी और खतरनाक हमलों से सुरक्षा

कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को पत्थरबाजी, लाठी-डंडों और अन्य वस्तुओं के हमले का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में फुल बॉडी प्रोटेक्टर शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों को चोट से बचाने में मदद करेगा। पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, नए सुरक्षा गियर को आग, पत्थरबाजी, चाकू के हमलों और एसिड अटैक जैसी खतरनाक परिस्थितियों से बचाव को ध्यान में रखकर खरीदा जा रहा है।


इन आधुनिक प्रोटेक्टर का वजन करीब दो से छह किलोग्राम तक हो सकता है। हल्के डिजाइन के कारण महिला जवानों को लंबे समय तक ड्यूटी करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कोई भी सुरक्षा उपकरण हर तरह के हमले से पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।


पारदर्शी शील्ड से सामने की स्थिति पर रहेगी नजर

बिहार पुलिस की महिला जवानों को पॉलीकार्बोनेट शील्ड भी दी जाएगी। यह ढाल पारदर्शी होती है, इसलिए इसे पकड़कर आगे बढ़ते समय जवान सामने की गतिविधियों पर नजर रख सकती हैं। भीड़ नियंत्रण और दंगा जैसी परिस्थितियों में यह सुविधा काफी उपयोगी हो सकती है।


पॉलीकार्बोनेट एक मजबूत प्लास्टिक सामग्री है, जिसका इस्तेमाल सुरक्षा उपकरणों में किया जाता है। उपलब्ध जानकारी में इसे कांच की तुलना में करीब 250 गुना अधिक मजबूत बताया गया है। हालांकि, इसकी वास्तविक मजबूती उपकरण की गुणवत्ता, मोटाई और निर्माण मानकों पर निर्भर करती है।


चेहरे और आंखों की सुरक्षा के लिए हेलमेट

पुलिस मुख्यालय ने करीब 10 हजार दंगा नियंत्रण हेलमेट खरीदने का भी ऑर्डर दिया है। इन हेलमेट का उद्देश्य महिला पुलिसकर्मियों के चेहरे, सिर, गर्दन और आंखों को संभावित चोटों से बचाना है। दंगा नियंत्रण के दौरान हेलमेट और शील्ड जैसे उपकरण जवानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।


टोही और फोरेंसिक जांच के लिए भी खरीद

महिला पुलिसकर्मियों के सुरक्षा उपकरणों के अलावा बिहार पुलिस ने अन्य आधुनिक संसाधनों की खरीद को भी मंजूरी दी है। टोही अभियानों में इस्तेमाल के लिए रात या अंधेरे में देखने में मदद करने वाली 102 दूरबीन खरीदी जाएंगी। इसके साथ ही डीएनए जांच के लिए एक रियल टाइम पीसीआर मशीन और घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए रेफ्रीजरेटेड सेंट्रीफ्यूज की खरीद की जा रही है।


इन फैसलों से बिहार पुलिस की महिला जवानों की सुरक्षा, दंगा नियंत्रण क्षमता और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।