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23-Feb-2026 01:29 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Police FIR violation: बिहार पुलिस की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें पता चला है कि संवेदनशील और पहचान छिपाने से संबंधित मामलों की एफआईआर ऑनलाइन अपलोड की जा रही हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट और पुलिस मुख्यालय ने इसे रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो की वेबसाइट पर ऐसे मामलों को अपलोड न करने का निर्देश कई जिलों द्वारा नजरअंदाज किया गया है।
एडीजी (एससीआरबी) ने भागलपुर समेत सभी संबंधित जिलों को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना के अंतर्गत आती है। डीजीपी ने भी सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि बलात्कार, पॉक्सो, सांप्रदायिक दंगा, आतंकी घटनाएं और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट से संबंधित कांडों की एफआईआर को वेबसाइट पर अपलोड न किया जाए।
जिलों से वेबसाइट पर अपलोड की गई प्रतिबंधित धाराओं के अंतर्गत दर्ज एफआईआर की सूची भी साझा की गई है और आगे से इसका ध्यान रखने को कहा गया है। बलात्कार और पॉक्सो एक्ट पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा। कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि पीड़िता की पहचान छुपाई जाए। ऑनलाइन अपलोड करने का मतलब है कि कोई भी व्यक्ति इंटरनेट के माध्यम से एफआईआर देख सकता है और पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो सकती है। इससे पीड़िता की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
वहीं आतंकी घटनाओं के आरोपियों की पहचान उजागर करने पर जांच में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। गिरोह के अन्य सदस्य सतर्क हो सकते हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला भी होता है और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में अत्यधिक सावधानी बरतती हैं। पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करना जरूरी है, लेकिन बिहार पुलिस ने इस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया है। यह लापरवाही गंभीर रूप से देखी जा रही है।