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19-Mar-2026 09:56 AM
By First Bihar
Bihar Police : बिहार में हाल के दिनों में पुलिस टीमों पर बढ़ते हमलों और आपराधिक घटनाओं को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। अब किसी भी छापेमारी (रेड) के दौरान निर्धारित एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। डीजीपी विनय कुमार ने इस संबंध में सभी क्षेत्रीय पुलिस पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह फैसला पूर्वी चंपारण में हुई मुठभेड़ के बाद लिया गया है, जिसमें दो अपराधियों का एनकाउंटर हुआ, जबकि एक बहादुर जवान शहीद हो गया। इस घटना ने पुलिस महकमे को झकझोर कर रख दिया है। इसके बाद राज्यभर में पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा उपायों की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
डीजीपी ने निर्देश दिया है कि किसी भी छापेमारी से पहले संबंधित इलाके के सर्किल इंस्पेक्टर (सीआई) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) को अनिवार्य रूप से सूचना दी जाए। इससे न केवल समन्वय बेहतर होगा, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में अतिरिक्त बल तुरंत उपलब्ध कराया जा सकेगा।
बुधवार को गृह विभाग और बिहार पुलिस मुख्यालय की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस पर हमलों की घटनाओं की समीक्षा की गई। ईद और नवरात्र जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों को देखते हुए सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों के पुलिस अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र में नारकोटिक्स टीम पर हुए हमले, बिक्रम के रानीतालाब में अवैध बालू खनन रोकने गई पुलिस टीम पर हमला और मुजफ्फरपुर फायरिंग कांड जैसे मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रणनीति को और मजबूत किया जाए।
डीजीपी विनय कुमार के अलावा इस बैठक में डीजी (अभियान) कुंदन कृष्णन, एडीजी (विधि व्यवस्था) पंकज दराद, एडीजी सीआईडी (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन और एडीजी (रेलवे) कमल किशोर सिंह भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति और चुनौतियों पर चर्चा की।
मोतिहारी मुठभेड़ में एसटीएफ के प्रशिक्षित सिपाही की शहादत को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी ने छापेमारी और मुठभेड़ के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी ऑपरेशन में जल्दबाजी या लापरवाही से बचना होगा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
इसके अलावा मुजफ्फरपुर फायरिंग कांड की समीक्षा के दौरान पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे। यह मामला पॉक्सो एक्ट से जुड़ा था, जिसमें 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी थी, लेकिन दो साल बाद भी आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। इस पर नाराजगी जताते हुए डीजीपी ने मुजफ्फरपुर एसपी को जांच अधिकारी (आईओ) की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन भी शामिल है।
गौरतलब है कि इस मामले में एक नाबालिग लड़की पर चोरी का आरोप लगाकर उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई थी। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से तंग आकर लड़की ने आत्महत्या कर ली थी। इस संवेदनशील मामले में अब तक केवल एक आरोपी ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि अन्य आरोपी फरार हैं।
कुल मिलाकर बिहार पुलिस अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। आने वाले दिनों में सख्त निगरानी और एसओपी के कड़ाई से पालन के जरिए कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।