बिहार में बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा: Whatsapp और QR कोड के जरिए चल रहा था घिनौना खेल, दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से बुलाई जाती थीं लड़कियां बिहार में बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा: Whatsapp और QR कोड के जरिए चल रहा था घिनौना खेल, दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से बुलाई जाती थीं लड़कियां Bihar Crime News: बिहार में ‘लुटेरी दुल्हनों’ का कारनामा, शादी के नाम पर दो युवकों को लगाया लाखों का चूना; हैरान कर देगी कहानी Bihar Crime News: बिहार में ‘लुटेरी दुल्हनों’ का कारनामा, शादी के नाम पर दो युवकों को लगाया लाखों का चूना; हैरान कर देगी कहानी यात्रा में फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल? सावधान! आपकी एक गलती से खाली हो सकता है बैंक अकाउंट, जानिए पूरी सेफ्टी गाइड Bihar News: 35 साल पुराने मामले में बिहार के भ्रष्ट जूनियर इंजीनियर को मिली सजा, 300 रूपये रिश्वत लेते निगरानी ने किया था अरेस्ट Bihar News: 35 साल पुराने मामले में बिहार के भ्रष्ट जूनियर इंजीनियर को मिली सजा, 300 रूपये रिश्वत लेते निगरानी ने किया था अरेस्ट BSEB Result 2026 : बिहार बोर्ड मैट्रिक -इंटर परीक्षा, जानिए कब आएगा 10वीं-12वीं का परिणाम; जानें पूरी डिटेल पूर्व सांसद सूरजभान सिंह और चंदन सिंह समेत 6 पर मोकामा थाने में केस दर्ज, अनंत सिंह के समर्थक ने हत्या की कोशिश का लगाया आरोप Bihar News: बिहार के इस जिले में बनने जा रहा सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल हब, रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा; विकास का बनेगा मुख्य केंद्र
25-Feb-2026 12:57 PM
By First Bihar
Bihar News : बिहार पुलिस की छवि को लेकर वर्षों से एक रूढ़ तस्वीर लोगों के मन में बनी रही—ढीली-ढाली वर्दी, थुलथुल काया और औपचारिक ड्यूटी। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदलने जा रही है। राज्य स्तर पर पुलिस मुख्यालय ने स्मार्ट पुलिसिंग को धरातल पर उतारने के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब लक्ष्य सिर्फ अपराध नियंत्रण नहीं, बल्कि फिट, फुर्तीली और पेशेवर पुलिस फोर्स तैयार करना है।
नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी पुलिस केंद्रों में जवानों और अधिकारियों की रोजाना सुबह अनिवार्य उपस्थिति दर्ज होगी। प्रत्येक दिन कम से कम एक घंटे का शारीरिक प्रशिक्षण, दौड़ और व्यायाम किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल वजन कम करना नहीं, बल्कि पूरी पुलिस फोर्स को चुस्त-दुरुस्त, सक्रिय और मानसिक रूप से भी सशक्त बनाना है। अब पुलिसकर्मी बैरक या सरकारी आवास में आराम फरमाने के बजाय मैदान में पसीना बहाते नजर आएंगे।
इस पहल के अंतर्गत राज्य के विभिन्न जिलों के पुलिस केंद्रों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सिंथेटिक ट्रैक तैयार किए जाएंगे। पालीयूरेथेन या लैटेक्स आधारित इन ट्रैकों पर दौड़ना पारंपरिक कच्चे या सीमेंटेड मैदान की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। इन ट्रैकों पर नियमित दौड़ लगाने से न केवल वजन नियंत्रित रहेगा, बल्कि मांसपेशियों को मजबूती मिलेगी और सहनशक्ति में भी वृद्धि होगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नियमित दौड़ और व्यायाम से बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है, उच्च रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदय स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार आता है। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी अक्सर तनावपूर्ण और अनियमित समय-सारिणी वाली होती है। ऐसे में शारीरिक फिटनेस उनके मानसिक संतुलन और निर्णय क्षमता को भी मजबूत बनाती है। सिंथेटिक ट्रैक का एक अतिरिक्त लाभ यह भी है कि दौड़ते समय गिरने पर चोट की आशंका कम रहती है, जिससे प्रशिक्षण सुरक्षित रहता है।
इस नई व्यवस्था की मॉनिटरिंग उच्च स्तर पर की जाएगी। एसएसपी, एसपी, डीएसपी और अन्य वरीय अधिकारी स्वयं सुबह के अभ्यास सत्र में मौजूद रहेंगे और जवानों की उपस्थिति तथा प्रदर्शन की निगरानी करेंगे। यह केवल औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि इसे सेवा अनुशासन का हिस्सा बनाया गया है। यदि कोई पुलिसकर्मी बिना उचित कारण सुबह के अभ्यास से अनुपस्थित रहता है या लापरवाही दिखाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय जांच के बाद दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
राज्य भर में हजारों की संख्या में तैनात हवलदार, सहायक अवर निरीक्षक, अवर निरीक्षक, निरीक्षक और अन्य पदाधिकारी इस फिटनेस अभियान का हिस्सा होंगे। वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से जवानों का मनोबल भी बढ़ेगा और एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा। जब नेतृत्व स्वयं मैदान में उतरेगा, तो अधीनस्थों में भी अनुशासन और प्रेरणा स्वतः विकसित होगी।
स्मार्ट पुलिसिंग केवल आधुनिक हथियारों, तकनीक या डिजिटल मॉनिटरिंग तक सीमित नहीं है। इसका मूल आधार है—फिट और सतर्क मानव संसाधन। एक चुस्त-दुरुस्त पुलिसकर्मी ही आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दे सकता है, भीड़ नियंत्रण में दक्षता दिखा सकता है और अपराधियों का प्रभावी ढंग से पीछा कर सकता है। शारीरिक स्फूर्ति सीधे तौर पर कार्यकुशलता और जनविश्वास से जुड़ी होती है।
इस पहल से पुलिस बल की सार्वजनिक छवि में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। जब नागरिक अपने क्षेत्र में फिट, अनुशासित और ऊर्जावान पुलिसकर्मियों को देखेंगे, तो विश्वास और सम्मान स्वतः बढ़ेगा। यह बदलाव केवल शरीर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कार्य संस्कृति और पेशेवर दृष्टिकोण में भी सुधार लाएगा।
राज्य स्तर पर शुरू की गई यह फिटनेस पहल पुलिसिंग के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयोग मानी जा रही है। यदि इसे सख्ती और निरंतरता के साथ लागू किया गया, तो आने वाले समय में बिहार पुलिस की पहचान एक आधुनिक, सक्षम और स्मार्ट फोर्स के रूप में स्थापित हो सकती है।