Bihar Police : बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस प्रशासन का चेहरा बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। अब मोतिहारी, पूर्णिया और सारण जैसे तीन महत्वपूर्ण जिलों को अपना अलग नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) मिलेगा। वहीं, आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों की जांच करने वाली आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को भी पहले से ज्यादा ताकतवर बनाया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों से लेकर पुलिसकर्मियों तक के नए पदों को मंजूरी दी गई है।
गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद राज्य के पुलिस प्रशासनिक ढांचे में बड़े पुनर्गठन का रास्ता साफ हो गया है। इस बदलाव में सिर्फ नए अधिकारियों की तैनाती ही नहीं, बल्कि जांच व्यवस्था, पुलिस क्षेत्रीय कार्यालयों और फॉरेंसिक सिस्टम को भी नए सिरे से व्यवस्थित करने की योजना है। सरकार ने इस पूरे पुनर्गठन पर सालाना 17.50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है। यानी बिहार में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार अब अधिकारियों और संसाधनों दोनों पर निवेश बढ़ाने जा रही है। इस फैसले का असर जिलों की कानून-व्यवस्था से लेकर आर्थिक अपराधों की जांच तक दिखाई दे सकता है।
तीन जिलों में अलग होंगे सिटी एसपी, जानिए क्यों अहम है फैसला
इस प्रशासनिक बदलाव का सबसे प्रमुख हिस्सा तीन नए सिटी एसपी कार्यालयों का गठन है। मोतिहारी, पूर्णिया और सारण में पे-लेवल 13 के नगर पुलिस अधीक्षक तैनात किए जाएंगे। अभी तक इन जिलों में शहरी पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी मौजूदा प्रशासनिक ढांचे के तहत संभाली जा रही थी। अब अलग सिटी एसपी की व्यवस्था होने से शहरी इलाकों में पुलिसिंग को विशेष रूप से मजबूत करने की उम्मीद है।
मोतिहारी नेपाल सीमा के नजदीक स्थित है। ऐसे में सीमावर्ती गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए यहां अलग सिटी एसपी की तैनाती महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पूर्णिया बंगाल सीमा से सटा हुआ है, जबकि सारण की भौगोलिक स्थिति पटना के करीब होने के कारण काफी अहम है।
तीनों जगहों पर सिटी एसपी की तैनाती से शहरी अपराध नियंत्रण, पुलिस गश्ती, यातायात व्यवस्था और संवेदनशील मामलों की निगरानी में अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी जा सकेगी। इसके लिए कुल 12 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें तीन नगर पुलिस अधीक्षक, तीन आशु एएसआई और छह एएसआई के पद शामिल हैं। इस व्यवस्था पर सालाना 1.41 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
EOU को मिलेगी नई ताकत, 143 पदों पर होगा विस्तार
आर्थिक अपराध के बढ़ते और जटिल होते मामलों से निपटने के लिए सरकार ने आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU का भी विस्तार किया है। इस इकाई में कुल 143 नए पदों को मंजूरी दी गई है। इसके लिए सालाना 12.14 करोड़ रुपये का खर्च निर्धारित किया गया है। इन पदों में एक डीआईजी, एक एसपी, 12 डीएसपी और 33 पुलिस निरीक्षक शामिल हैं। इसके अलावा 24 एएसआई, 12 स्टेनो एएसआई, 12 हवलदार, 24 चालक सिपाही और 24 सिपाही (कंप्यूटर ऑपरेटर) के पद भी स्वीकृत किए गए हैं।
इस विस्तार के बाद आर्थिक अपराध इकाई के पास जांच और प्रशासनिक कामकाज के लिए अधिक मानव संसाधन उपलब्ध होंगे। खासकर वित्तीय धोखाधड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच में अतिरिक्त अधिकारियों और तकनीकी कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
फॉरेंसिक जांच अब पुलिस से अलग, सीधे गृह विभाग के अधीन
इस फैसले का एक और महत्वपूर्ण पहलू फॉरेंसिक विंग का प्रशासनिक ढांचा बदलना है। अब विधि विज्ञान प्रयोगशाला, फिंगरप्रिंट ब्यूरो और फोटो ब्यूरो को पुलिस नियंत्रण से अलग कर सीधे गृह विभाग के अधीन लाया जाएगा।
इस बदलाव के पीछे निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच व्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य है। किसी भी आपराधिक मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य की भूमिका बेहद अहम होती है। ऐसे में फॉरेंसिक विंग को पुलिस के सीधे नियंत्रण से बाहर रखने से जांच प्रक्रिया में संस्थागत स्वतंत्रता बढ़ने की उम्मीद है।
इसके प्रशासनिक और तकनीकी नियंत्रण के लिए पे-लेवल 14 में निदेशक प्रमुख का एक स्थायी पद भी स्वीकृत किया गया है। इस पद पर सालाना करीब 35 लाख रुपये खर्च होंगे। माना जा रहा है कि इससे फॉरेंसिक सेवाओं के संचालन, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक फैसलों में एक स्पष्ट व्यवस्था विकसित होगी।
भागलपुर और बेगूसराय में भी बदलेगा पुलिस का ढांचा
पुलिस प्रशासन के इस पुनर्गठन का असर सिर्फ तीन नए सिटी एसपी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा। भागलपुर में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (एसडीपीओ) की तैनाती का प्रावधान किया गया है। इससे पुलिस अधिकारियों के बीच काम का बंटवारा बेहतर हो सकेगा और अलग-अलग क्षेत्रों की निगरानी में सहूलियत मिलेगी।
वहीं, पुलिस के चार प्रक्षेत्रों के पुनर्गठन के साथ बेगूसराय में डीआईजी कार्यालय की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए कुल 20 पद स्वीकृत किए गए हैं। इसमें पटना, तिरहुत, मिथिला और पूर्णिया प्रक्षेत्र के लिए चार डीआईजी पद शामिल हैं। इनके साथ चार एसपी (स्टाफ ऑफिसर) और चार अवर सचिव के पद भी मंजूर किए गए हैं।
बेगूसराय स्थित डीआईजी कार्यालय के लिए आठ लिपिकीय पदों का प्रावधान किया गया है। इसके साथ चार वरीय डीएसपी पदों को स्थानांतरित करने की भी व्यवस्था की गई है। इस पूरे हिस्से पर सालाना 3.46 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
किस व्यवस्था पर कितना खर्च करेगी सरकार?
पुलिस प्रशासन के इस नए ढांचे को लागू करने के लिए सरकार ने अलग-अलग मदों में वित्तीय स्वीकृति दी है।
आर्थिक अपराध इकाई: 143 पद, सालाना 12.14 करोड़ रुपये।
तीन नए सिटी एसपी कार्यालय: 12 पद, सालाना 1.41 करोड़ रुपये।
चार प्रक्षेत्रों का पुनर्गठन और बेगूसराय कार्यालय: 20 पद, सालाना 3.46 करोड़ रुपये।
फॉरेंसिक निदेशालय: एक निदेशक प्रमुख का पद, सालाना 35 लाख रुपये।
इन सभी मदों को मिलाकर राज्य सरकार पर सालाना करीब 17.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
अब देखना होगा जमीन पर कितना दिखेगा असर
कुल मिलाकर बिहार सरकार का यह फैसला पुलिस प्रशासन को ज्यादा व्यवस्थित और विशेषज्ञ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। एक तरफ सीमावर्ती और महत्वपूर्ण जिलों में शहरी पुलिसिंग के लिए अलग अधिकारी मिलेंगे, तो दूसरी तरफ आर्थिक अपराधों की जांच के लिए EOU को अतिरिक्त अधिकारी और कर्मचारी मिलेंगे।
फॉरेंसिक विंग को स्वतंत्र प्रशासनिक व्यवस्था देने और क्षेत्रीय पुलिस कार्यालयों के पुनर्गठन से भी कामकाज में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक बदलाव की असली सफलता इस बात से तय होगी कि नए पदों पर नियुक्तियां कितनी जल्दी होती हैं और आम लोगों को कानून-व्यवस्था तथा जांच प्रक्रिया में कितना सुधार महसूस होता है।