Bihar News : बिहार में आपात स्थिति में लोगों तक तुरंत पहुंचने वाली डायल-112 पुलिस टीम की सुरक्षा को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। अब डायल-112 की टीम पर हमला होने की स्थिति में संबंधित थानाध्यक्ष की जवाबदेही तय की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में सभी क्षेत्रीय आइजी और डीआइजी के साथ-साथ जिलों के एसएसपी और एसपी को भी निर्देश जारी किए हैं।


पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी निर्देश में डायल-112 को पुलिस के फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। यानी किसी घटना या आपात सूचना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर शुरुआती पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी डायल-112 टीम की होगी।


सूचना मिलते ही पहुंचेगी डायल-112 टीम

पुलिस मुख्यालय के निर्देश के मुताबिक, किसी घटना की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है। डायल-112 को इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। खासतौर पर महिलाओं से जुड़े अपराध और आपात परिस्थितियों में टीम की त्वरित मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा गया है।


इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि गिरफ्तारी, भूमि विवाद से जुड़े मामलों, वारंट और कुर्की की कार्रवाई तथा छापेमारी जैसे मामलों में केवल छोटे स्तर के बल पर निर्भर न रहें। ऐसी कार्रवाई इंस्पेक्टर या अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में कराने पर जोर दिया गया है।


हर महीने छापेमारी का मांगा जाएगा हिसाब

पुलिस मुख्यालय ने इंस्पेक्टर और एसडीपीओ के स्तर से होने वाली छापेमारी की भी नियमित समीक्षा का निर्णय लिया है। सभी जिलों से हर महीने इस बात का ब्योरा मांगा जाएगा कि इन अधिकारियों के नेतृत्व में कितनी छापेमारी की गई।


थानों के वाहनों को लगातार गश्त में लगाने का भी निर्देश दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि गश्ती, कार्रवाई या डायल-112 की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।


होमगार्ड और महिला सिपाहियों के भरोसे नहीं रहेगी टीम

पुलिस मुख्यालय की समीक्षा में डायल-112 की मौजूदा व्यवस्था को लेकर एक अहम बात सामने आई। कई स्थानों पर डायल-112 वाहनों में सिर्फ एक-दो होमगार्ड और एक-दो महिला सिपाहियों को तैनात किए जाने की जानकारी मिली।


पुलिस मुख्यालय ने माना कि पर्याप्त बल के अभाव में टीम पर हमले का जोखिम बढ़ सकता है। इसी वजह से अब डायल-112 वाहनों पर पुलिस पदाधिकारी के साथ महिला पुलिसकर्मियों और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है।


महिलाओं से संबंधित अपराधों में डायल-112 की भूमिका को विशेष प्राथमिकता देने का निर्देश भी दिया गया है।


पुलिस पर हमले के मामलों में स्पीडी ट्रायल की तैयारी

पुलिसकर्मियों पर हमले की घटनाओं को लेकर भी पुलिस मुख्यालय ने जिलों को विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। जून, जुलाई और अगस्त में पुलिस पर हमले से जुड़े मामलों में 1166 आरोपितों की गिरफ्तारी किए जाने की जानकारी दी गई है।


अब सभी जिलों को पुलिस पर हमले से जुड़े कम से कम पांच-पांच मामलों को चिह्नित कर उनमें चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। उद्देश्य ऐसे मामलों को स्पीडी ट्रायल के जरिए जल्द अदालत तक पहुंचाना है।


जो आरोपित अभी फरार हैं, उनके खिलाफ कोर्ट से आदेश लेकर वारंट और कुर्की की कार्रवाई करने को कहा गया है। वहीं, जिन मामलों में सीसीटीवी या मोबाइल वीडियो फुटेज उपलब्ध हैं, उन्हें अदालत में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। गवाहों और पीड़ितों से आरोपितों की पहचान कराने के लिए पहचान परेड कराने पर भी जोर दिया गया है।


इस पूरी व्यवस्था के जरिए पुलिस मुख्यालय ने एक तरफ डायल-112 को ज्यादा प्रभावी बनाने और दूसरी तरफ पुलिस टीमों की सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया है। अब डायल-112 टीम पर होने वाले हमले की स्थिति में सिर्फ हमलावरों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि संबंधित थाना स्तर पर जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।