Bihar News: थावे दुर्गा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं पर हमला, प्रसाद के विवाद में जमकर हुई मारपीट Bihar News: थावे दुर्गा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं पर हमला, प्रसाद के विवाद में जमकर हुई मारपीट मिडल ईस्ट युद्ध के बीच भारत ने बढ़ाई खुद की सुरक्षा, अब गोला-बारूद ही नहीं इस टेक्नोलॉजी से भी दुश्मन को मिलेगा करारा जवाब IPL 2026 से पहले बड़ा झटका! 7 खिलाड़ी बाहर, 9 पर सस्पेंस, टीमों की बढ़ी टेंशन; ये है पूरी लिस्ट धर्मसंकट में आरजेडी और कांग्रेस, राज्यसभा चुनाव में गच्चा देने वाले विधायकों पर क्यों नहीं हो रहा एक्शन? धर्मसंकट में आरजेडी और कांग्रेस, राज्यसभा चुनाव में गच्चा देने वाले विधायकों पर क्यों नहीं हो रहा एक्शन? RailOne App : अब घर तक छोड़ेगी रेलवे! इस ऐप से टिकट के साथ बुक करें टैक्सी, रेलवे की नई सुविधा ने बदला सफर का तरीका Zomato से खाना मंगवाना हुआ महंगा, हर ऑर्डर पर अब देनी होगी इतनी प्लेटफॉर्म फीस, जानिए घमासान: JDU ने अपने तीन महासचिवों को दफ्तर में घुसने पर लगाई पाबंदी..चैंबर को किया लॉक ! वजह क्या है जानें.... ईद पर घर पहुंचा दिल्ली दंगों का आरोपी शरजील इमाम, 6 साल बाद गांव लौटने पर भावुक हुआ परिवार
21-Mar-2026 09:57 AM
By First Bihar
Bihar PNG scheme : बिहार में एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर सामने आ रही चुनौतियों के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। उप मुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की है कि राज्य के 18 जिला मुख्यालयों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा को तेजी से विस्तार दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य लोगों को सस्ती, सुरक्षित और निरंतर रसोई गैस उपलब्ध कराना है, ताकि एलपीजी पर निर्भरता कम हो सके।
सरकार के अनुसार, जिन 18 जिलों में पहले से पीएनजी की आधारभूत संरचना उपलब्ध है, उनमें पटना, गया, नालंदा, बेगूसराय, शेखपुरा, जमुई, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, लखीसराय, मुंगेर, सहरसा, मधेपुरा, भोजपुर, पूर्णिया, औरंगाबाद और रोहतास शामिल हैं। इन जिलों में करीब एक लाख घरों तक पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस पहुंचाई जा रही है। अब इस सुविधा का दायरा और तेजी से बढ़ाने की तैयारी है।
गैस वितरण कंपनियों की रिपोर्ट के मुताबिक, वे 75 हजार से अधिक नए घरेलू कनेक्शन 24 घंटे के भीतर देने में सक्षम हैं। इसके अलावा 70 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं को एक सप्ताह के भीतर पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे साफ है कि सरकार इस योजना को युद्धस्तर पर लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
सरकार का मानना है कि पीएनजी, एलपीजी के मुकाबले अधिक किफायती और सुरक्षित विकल्प है। इसमें गैस सीधे पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक पहुंचती है, जिससे सिलेंडर बदलने की झंझट खत्म हो जाती है। साथ ही गैस लीकेज की संभावना भी कम होती है, जिससे यह घरेलू उपयोग के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।
इस योजना को तेजी से लागू करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। गैस पाइपलाइन बिछाने और संबंधित संयंत्र स्थापित करने के लिए गैस कंपनियों को जो भी अनुमति चाहिए होगी, वह संबंधित नगर निकाय द्वारा 24 घंटे के भीतर जारी करनी होगी। यदि तय समय के भीतर अनुमति नहीं दी जाती है, तो इसे स्वतः स्वीकृत माना जाएगा। इस व्यवस्था से परियोजनाओं में देरी की समस्या खत्म होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, गैस कंपनियों को यह भी अनुमति दी गई है कि वे अपनी परियोजनाओं पर 24 घंटे काम कर सकें। उन्हें किसी भी समय पाइपलाइन बिछाने और अन्य निर्माण कार्य करने की छूट होगी, बशर्ते नगर निकाय द्वारा किसी विशेष अवधि के लिए लिखित रूप से रोक न लगाई गई हो। इससे काम की गति और तेज होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गैस वितरण प्रणाली स्थापित करने के लिए सरकारी कंपनियों को सांकेतिक दर पर तुरंत जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, यदि आधारभूत संरचना के पुनर्स्थापन की जरूरत पड़ती है, तो कंपनियों को अपने खर्च पर यह कार्य करने की शर्त के साथ अनुमति दी जाएगी।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम न सिर्फ एलपीजी संकट से निपटने में मददगार साबित होगा, बल्कि राज्य में स्वच्छ और आधुनिक ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देगा। आने वाले समय में इससे लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है और रसोई गैस की व्यवस्था अधिक सुविधाजनक और भरोसेमंद बन सकेगी।