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27-Feb-2026 12:24 PM
By First Bihar
Bihar Education News : बिहार विधान परिषद में आज फार्मेसी कॉलेजों को एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी करने के मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली। सदन की कार्यवाही के दौरान एमएलसी अनिल कुमार ने राज्य में नए फार्मेसी कॉलेज खोलने के लिए लंबित एनओसी पर सवाल उठाया और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि यदि समय पर एनओसी नहीं दी जाएगी तो राज्य के छात्र-छात्राओं को अन्य राज्यों का रुख करना पड़ेगा, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा और बिहार में स्वास्थ्य शिक्षा का विकास प्रभावित होगा।
इस सवाल का जवाब देते हुए प्रभारी मंत्री लखेन्द्र पासवान ने पहले दिए गए जवाब को ही दोहराया। उन्होंने कहा कि एनओसी जारी करने की प्रक्रिया नियमों और मानकों के अनुरूप की जा रही है तथा सभी आवेदनों की जांच की जा रही है। लेकिन मंत्री के इस जवाब से कई सदस्य संतुष्ट नहीं दिखे। उनका आरोप था कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही है और चार वर्षों से लंबित मामलों का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।
एमएलसी प्रोफेसर राजवर्धन आजाद ने सदन में कहा कि पिछले चार वर्षों से करीब 140 फार्मेसी इंस्टीट्यूट एनओसी के इंतजार में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में संस्थान लंबित क्यों हैं और क्या सरकार के पास इन्हें निपटाने की कोई समयसीमा है। उन्होंने यह भी कहा कि फार्मेसी शिक्षा स्वास्थ्य क्षेत्र की रीढ़ है और यदि राज्य में गुणवत्तापूर्ण संस्थान नहीं खुलेंगे तो भविष्य में प्रशिक्षित फार्मासिस्टों की कमी हो सकती है।
बहस के दौरान कई अन्य एमएलसी भी इस मुद्दे पर पूरक सवाल पूछने के लिए खड़े हो गए। सदन में कुछ समय के लिए शोर-शराबे की स्थिति बन गई। सदस्य सरकार से स्पष्ट और ठोस जवाब की मांग कर रहे थे। इसी बीच सभापति अवधेश नारायण सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह मछली बाजार नहीं है, सभी सदस्य अपनी बात क्रम से रखें। सभापति ने आश्वासन दिया कि परिषद की स्वास्थ्य समिति इस पूरे मामले की समीक्षा करेगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट देगी।
सभापति के हस्तक्षेप के बाद सदन की कार्यवाही फिर से व्यवस्थित हुई। हालांकि विपक्ष और कुछ सत्तापक्ष के सदस्य इस मुद्दे पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग करते रहे। यह स्पष्ट हो गया कि फार्मेसी कॉलेजों को एनओसी देने का मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं, बल्कि राज्य में स्वास्थ्य शिक्षा और रोजगार के अवसरों से भी जुड़ा हुआ है।
अब नजर परिषद की स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि लंबे समय से लंबित एनओसी के मामलों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। सदन में उठी इस बहस ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और भी गर्मा सकता है।