Bihar News :  बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे फार्मेसी डिग्रीधारियों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भर्ती को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट के मूल पद पर नियुक्ति के लिए अब डी.फार्मा की योग्यता अनिवार्य रहेगी। बी.फार्मा, एम.फार्मा और फार्मा-डी की डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को भी इस पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित डी.फार्मा योग्यता पूरी करनी होगी। हालांकि, इन उच्च डिग्रीधारियों के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने की दिशा में सरकार ने पहल की है।


स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि फार्मासिस्ट पद की भर्ती के नियमों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, बी.फार्मा, एम.फार्मा और फार्मा-डी डिग्रीधारियों की शैक्षणिक योग्यता और विशेषज्ञता का उपयोग करने के लिए अलग-अलग सरकारी पद सृजित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। ऐसे में लंबे समय से भर्ती की योग्यता को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।


स्वास्थ्य विभाग की ओर से 13 अक्टूबर को जारी आदेश में बिहार फार्मासिस्ट संवर्ग नियमावली, 2014 और संशोधन नियमावली, 2024 के प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है। इन नियमों के अनुसार, फार्मासिस्ट के मूल पद पर नियुक्ति के लिए डी.फार्मा उत्तीर्ण होने के साथ बिहार फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण भी अनिवार्य है। विभाग ने अपने आदेश में 16 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसएलपी (सी) संख्या 12236/2025, मोहम्मद फिरोज मंसूरी एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य मामले में पारित आदेश का भी उल्लेख किया है।


इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट के 1600 से अधिक रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, भर्ती विज्ञापन जारी होने और आवेदन की तारीखों को लेकर अभ्यर्थियों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।


दरअसल, बिहार में फार्मासिस्ट पद की योग्यता को लेकर वर्ष 2016 से ही डिप्लोमा और डिग्रीधारी अभ्यर्थियों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी। बी.फार्मा डिग्रीधारी अपनी योग्यता को फार्मासिस्ट पद की भर्ती में शामिल करने की मांग कर रहे थे। वहीं, डिप्लोमा फार्मासिस्ट संगठन नियमावली के अनुसार डी.फार्मा योग्यताधारियों की नियुक्ति की मांग पर कायम था। अब स्वास्थ्य विभाग ने नियमों की स्थिति स्पष्ट करते हुए दोनों वर्गों के लिए अलग-अलग संभावनाओं पर विचार करने का रास्ता चुना है।


बी.फार्मा और एम.फार्मा डिग्रीधारियों के लिए नई व्यवस्था तैयार करने के उद्देश्य से गठित समिति में स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ. त्यागराजन एसएम को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, ओएसडी रेणु कुमारी और राज्य औषधि नियंत्रक नित्यानंद किसलय समिति के सदस्य होंगे। समिति यह आकलन करेगी कि इन डिग्रीधारियों के लिए किन विभागों और कार्यालयों में नए पद बनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही पदों की संख्या, वेतनमान और पदसोपान निर्धारित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। समिति की अनुशंसा के बाद आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।


उच्च फार्मेसी डिग्रीधारियों के लिए सरकारी नौकरी के अवसर पूरी तरह सीमित नहीं हैं। बिहार में औषधि निरीक्षक, गवर्नमेंट एनालिस्ट, असिस्टेंट बैक्टीरियोलॉजिस्ट और साइंटिफिक असिस्टेंट जैसे पदों पर संबंधित नियमों और निर्धारित योग्यता के अनुसार नियुक्तियां की जाती हैं। इसके अलावा सरकारी फार्मेसी कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के पदों पर भी योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति होती है।


डिप्लोमा फार्मासिस्ट ऑर्गेनाइजेशन छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार चौधरी ने विभाग के फैसले पर आभार जताया है। संगठन ने शेष रिक्त पदों पर जल्द बहाली के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग भी की है।


अब अभ्यर्थियों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। डी.फार्मा योग्यताधारियों को जहां फार्मासिस्ट भर्ती के विज्ञापन का इंतजार है, वहीं बी.फार्मा, एम.फार्मा और फार्मा-डी डिग्रीधारियों को समिति की अनुशंसाओं से नए सरकारी रोजगार के अवसर खुलने की उम्मीद है। सबसे अहम सवाल यही है कि रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया कब शुरू होगी और उच्च डिग्रीधारियों के लिए प्रस्तावित नए पदों का स्वरूप क्या होगा।