Bihar News : बिहार की राजधानी पटना में शिक्षा विभाग से सरकारी राशि की कथित हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की मेकर लॉगइन आईडी का दुरुपयोग कर 76 लाख 71 हजार 983 रुपये के अवैध भुगतान का आरोप लगा है। मामले में एफएनएस उच्च विद्यालय, गुलजारबाग में कार्यरत लिपिक विजय कृष्ण विद्यार्थी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इतनी बड़ी रकम की कथित अनियमितता सामने आने के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सरकारी खजाने से इतनी बड़ी राशि का भुगतान किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।


मामले में पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, संबंधित लिपिक पर विभागीय नियमों का उल्लंघन करने और कार्यालय की आंतरिक डिजिटल प्रणाली का बिना अनुमति इस्तेमाल करने का आरोप है। आरोप है कि मेकर लॉगइन आईडी का दुरुपयोग कर सरकारी राशि का अधिक और अवैध भुगतान प्राप्त किया गया या कराया गया। कथित तौर पर इस पूरी प्रक्रिया में 76,71,983 रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई है।


सरकारी कार्यालयों में भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यदि किसी लॉगइन आईडी का दुरुपयोग कर सरकारी धन की निकासी होती है, तो यह व्यवस्था की निगरानी और सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक घटनाक्रम क्या था, भुगतान किस मद में किया गया और कथित अनियमितता किस तरीके से हुई, इसकी पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।


जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आदेश में इस मामले को सरकारी राशि के अस्थायी गबन, बिना अनुमति डिजिटल हेराफेरी, धोखाधड़ी, मिलीभगत और आपराधिक विश्वासघात जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा बताया गया है। इन्हीं आरोपों के आधार पर संबंधित लिपिक को निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है। उनके खिलाफ आरोप पत्र भी अलग से जारी किया जा रहा है।


इस मामले का एक अहम पहलू यह है कि कथित वित्तीय अनियमितता में किसी दूसरे कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका थी या नहीं। विभागीय स्तर पर जांच के दौरान भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड, डिजिटल लॉगइन के इस्तेमाल और अन्य जरूरी दस्तावेजों की पड़ताल की जा सकती है। हालांकि, अब तक उपलब्ध जानकारी में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।


निलंबन अवधि के दौरान लिपिक का मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, घोसवरी निर्धारित किया गया है। उन्हें मुख्यालय से प्राप्त उपस्थिति विवरण के आधार पर जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। निलंबन के साथ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। फिलहाल, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित विभागीय प्रक्रिया के बाद ही होगी।


इधर, बिहार के शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों का मामला भी चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, कई शिक्षकों के खातों में कुछ महीनों का वेतन दो बार पहुंच गया। कुछ शिक्षकों ने अतिरिक्त राशि विभाग को वापस कर दी, जबकि कई मामलों में राशि लौटाए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस प्रकरण में भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी बताई गई है। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अगले महीने का वेतन जारी किए जाने की बात कही गई है।


पटना जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में सामने आया 76.71 लाख रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सरकारी धन के प्रबंधन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। जांच से ही स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितता कैसे हुई, सरकारी राशि के भुगतान में किन प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया और इस मामले में आगे किन लोगों पर कार्रवाई होती है।