Bihar Paperless Registry : बिहार में जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। राज्य सरकार 15 जुलाई 2026 से सभी निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद रजिस्ट्री से जुड़ी अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएंगी। इससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनेगी।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। विभाग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही योग्य आवेदकों को जल्द से जल्द सर्विस प्रोवाइडर का लाइसेंस जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि नई व्यवस्था बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।
कौन बन सकेंगे सर्विस प्रोवाइडर?
बिहार स्टांप नियमावली, 2026 के तहत वर्तमान में कार्यरत अनुज्ञप्तिधारी दस्तावेज नवीस (कातिब), प्रशिक्षु दस्तावेज नवीस, स्टांप वेंडर और रजिस्ट्री कार्य से जुड़े अधिवक्ताओं को सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करने की अनुमति दी गई है। सरकार ने नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए इन श्रेणियों के लोगों को निर्धारित शैक्षणिक और अन्य पात्रताओं में भी विशेष छूट प्रदान की है।
ऑनलाइन होगी पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया
नई प्रणाली के तहत सर्विस प्रोवाइडर आईआरएस (IRS) पोर्टल पर संबंधित पक्षकारों की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करेंगे। इसके अलावा दस्तावेजों की ई-फाइलिंग, ई-साइन, बायोमेट्रिक सत्यापन, संपत्ति का सरकारी मूल्यांकन, स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क की गणना, ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग तथा ई-स्टांप कोड उपलब्ध कराने जैसी सभी सेवाएं भी डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएंगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रजिस्ट्री से जुड़ी पूरी प्रक्रिया एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरी की जा सकेगी। इससे दस्तावेजों के रखरखाव में आसानी होगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
लोगों को क्या होगा फायदा?
पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को कागजी दस्तावेजों का बोझ काफी हद तक कम होगा। पहले जहां विभिन्न दस्तावेजों की कई प्रतियां जमा करनी पड़ती थीं, वहीं अब अधिकांश औपचारिकताएं ऑनलाइन पूरी की जा सकेंगी।
नई व्यवस्था से समय की बचत होगी, रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी आएगी और अनावश्यक देरी की संभावना भी कम होगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से दस्तावेजों की सुरक्षा बढ़ेगी और भविष्य में रिकॉर्ड खोजने या सत्यापित करने में भी आसानी होगी। सरकार का मानना है कि इससे निबंधन सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
बांका जिले में प्रतिदिन हो रही औसतन 100 रजिस्ट्रियां
बांका जिले में प्रतिदिन औसतन 100 दस्तावेजों की रजिस्ट्री की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में कुल 25,103 दस्तावेजों का निबंधन हुआ। इनमें 11,882 दस्तावेज अमरपुर निबंधन कार्यालय में और 13,248 दस्तावेज बांका निबंधन कार्यालय में पंजीकृत किए गए।
राजस्व वसूली में भी जिले ने बनाया रिकॉर्ड
राजस्व संग्रह के मामले में भी बांका जिला लक्ष्य से आगे रहा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले को 86.38 करोड़ रुपये राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था, जबकि 31 मार्च तक 92.89 करोड़ रुपये की वसूली कर लक्ष्य का लगभग 107 प्रतिशत हासिल कर लिया गया।बांका निबंधन कार्यालय को 55.45 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला था, जिसके मुकाबले 59.33 करोड़ रुपये की वसूली की गई। वहीं अमरपुर निबंधन कार्यालय को 30.93 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला था, लेकिन कार्यालय ने 33.56 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाकर निर्धारित लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया।
\डिजिटल बिहार की दिशा में बड़ा कदम
राज्य सरकार की यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने से न केवल नागरिकों को बेहतर और तेज सेवाएं मिलेंगी, बल्कि निबंधन प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता भी बढ़ेगी। 15 जुलाई से राज्य के सभी निबंधन कार्यालयों में यह नई व्यवस्था लागू होने के साथ बिहार डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाएगा।