Bihar News : बिहार में जमीन, प्लॉट और फ्लैट खरीदने-बेचने वालों के लिए बड़ी खबर है। अब संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के लिए कागजों का ढेर लेकर निबंधन कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म होने जा रही है। 17 अगस्त 2026 से बिहार के सभी निबंधन कार्यालयों में जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पेपरलेस करने की तैयारी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद डीड तैयार करने से लेकर स्टांप शुल्क के भुगतान, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल हस्ताक्षर तक की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जाएगी। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद डिजिटल डीड की प्रति भी संबंधित व्यक्ति को WhatsApp या ई-मेल के जरिए भेजी जा सकेगी। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि दस्तावेजों को सुरक्षित रखना भी आसान होगा।
141 निबंधन कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था
बिहार में कुल 141 निबंधन कार्यालय हैं। पेपरलेस रजिस्ट्री की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से की गई है। पहले चरण में 11 जुलाई से 10 निबंधन कार्यालयों में नई व्यवस्था लागू की गई थी। इसके बाद 30 जुलाई को 40 और कार्यालयों को इससे जोड़ दिया गया।
अब शेष निबंधन कार्यालयों में भी 17 अगस्त से पेपरलेस व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी इसके बाद राज्यभर में संपत्ति निबंधन की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से आगे बढ़ेगी।
बुजुर्गों के लिए घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा
नई व्यवस्था में बुजुर्ग नागरिकों का भी खास ध्यान रखा गया है। 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को घर पर ही निबंधन की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मतलब है कि उम्रदराज लोगों को जमीन, प्लॉट या फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए बार-बार निबंधन कार्यालय पहुंचने की परेशानी से राहत मिल सकती है। संबंधित अधिकारियों को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
स्टांप से डिजिटल सिग्नेचर तक ऑनलाइन काम
पेपरलेस रजिस्ट्री में दस्तावेज तैयार करने से लेकर स्टांप शुल्क भुगतान और बायोमेट्रिक सत्यापन तक की प्रक्रिया डिजिटल होगी। डिजिटल हस्ताक्षर के बाद रजिस्ट्री पूरी की जाएगी।
रजिस्ट्री के बाद डिजिटल डीड मिलने से कागजी दस्तावेजों को संभालने की परेशानी भी कम होगी। साथ ही रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने से भविष्य में दस्तावेज तलाशना आसान हो सकता है।
GIS से होगा जमीन का स्थल निरीक्षण
नई व्यवस्था में GIS तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए जमीन या संपत्ति के स्थल निरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की तैयारी है।
सरकार का उद्देश्य केवल रजिस्ट्री को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और राजस्व चोरी पर लगाम लगाना भी है।
शिकायत भी ऑनलाइन, जांच और कार्रवाई भी डिजिटल
आम लोगों की शिकायतों के लिए पब्लिक ग्रीवेंस मॉड्यूल लागू करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत नागरिक अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। शिकायत की जांच, कार्रवाई और उसके निष्पादन की प्रक्रिया भी ऑनलाइन ही आगे बढ़ेगी।
इससे लोगों को शिकायत की स्थिति जानने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
हर सप्ताह होगी निबंधन कार्यालयों की जांच
राजस्व संग्रह बढ़ाने और राजस्व चोरी रोकने के लिए अधिकारियों को नियमित निरीक्षण का जिम्मा भी दिया गया है। सभी एआइजी को हर सप्ताह 10 निबंधन कार्यालयों का स्थल निरीक्षण करने का टास्क दिया गया है।
निरीक्षण की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी। इसके अलावा मुख्यालय स्तर पर भी टीम गठित कर निबंधन कार्यालयों की व्यवस्था और राजस्व संग्रह की जांच की जाएगी।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
कुल मिलाकर 17 अगस्त से लागू होने वाली पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था से बिहार में जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को ज्यादा डिजिटल, तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की कोशिश है। अगर व्यवस्था तय योजना के मुताबिक लागू होती है, तो संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वालों को कागजी प्रक्रिया और अनावश्यक भागदौड़ से काफी राहत मिल सकती है।