बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के दूसरे दिन पंचायतों में टैक्स वसूली के मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधान पार्षद सुनील सिंह ने ग्राम पंचायत कर दर नियमावली 2026 को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने इसे जन विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग की।
पंचायत टैक्स को लेकर RJD का सरकार पर हमला
राजद एमएलसी सुनील सिंह ने विधान परिषद में कहा कि बिहार सरकार की ओर से ग्राम पंचायत कर दर नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत राज्य की ग्राम पंचायतों में रहने वाले लोगों से घरों और दुकानों पर होल्डिंग टैक्स वसूले जाने की तैयारी है। उन्होंने दावा किया कि इस नियम के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों पर ₹5000 तक का टैक्स लगाया जा सकता है।
सुनील सिंह ने कहा कि बिहार की करीब 76 प्रतिशत आबादी आज भी गांवों में रहती है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी काफी कम है और बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं। ऐसे हालात में गांव के लोगों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालना पूरी तरह से जन विरोधी फैसला है। उन्होंने कहा कि बिहार के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार पहले ही महंगाई और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में पंचायत स्तर पर टैक्स लगाने का निर्णय लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है।
‘अठन्नी-चवन्नी पर भी टैक्स लगाने की तैयारी’
RJD एमएलसी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वर्तमान सरकार इस तरह का फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि अब तो ऐसा लग रहा है कि गांव के लोगों की छोटी-छोटी जरूरतों पर भी टैक्स लगाने की तैयारी हो रही है। सुनील सिंह ने पंचायतों में होल्डिंग टैक्स की व्यवस्था को अंग्रेजों के समय की दमनकारी नीति से जोड़ते हुए कहा कि उस समय भी इस तरह की व्यवस्था का विरोध हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों और ग्रामीण जनता पर आर्थिक बोझ डालने की कोशिश कर रही है।
CM सम्राट चौधरी ने दी सफाई
विपक्ष के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद विधान परिषद में जवाब देने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि यह अच्छा हुआ कि इस मुद्दे को सदन में उठाया गया, जिससे पूरी स्थिति स्पष्ट हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की ओर से यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार गरीबों से टैक्स वसूलने जा रही है, जबकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने साफ किया कि ग्राम पंचायत कर नियमावली में गरीबों पर किसी तरह का अतिरिक्त टैक्स लगाने की बात नहीं है।
‘कचरा प्रबंधन और नल-जल जैसी सेवाओं के लिए पहले से शुल्क’
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में पहले से ही पंचायत स्तर पर कुछ सेवाओं के लिए शुल्क लेने की व्यवस्था मौजूद है। जैसे कचरा प्रबंधन और नल-जल जैसी सुविधाओं के लिए कई जगहों पर शुल्क लिया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल नियमों में बदलाव और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई नियमावली तैयार की है। इसका उद्देश्य पंचायतों की आय बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि RJD एमएलसी की ओर से गरीबों पर टैक्स लगाने की जो बात कही गई है, वह पूरी तरह निराधार है। सरकार का उद्देश्य आम लोगों पर बोझ डालना नहीं, बल्कि पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।
पंचायत टैक्स बना राजनीतिक मुद्दा
विधान परिषद में हुए इस हंगामे के बाद पंचायत टैक्स का मुद्दा बिहार की राजनीति में गर्मा गया है। विपक्ष जहां इसे ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त बोझ बता रहा है, वहीं सरकार इसे पंचायतों को मजबूत करने वाली व्यवस्था बता रही है।अब देखना होगा कि ग्राम पंचायत कर दर नियमावली 2026 को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है और विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह जनता के बीच लेकर जाता है।