Bihar News : बिहार के पंचायतों में सरकारी व्यवस्था को और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने अब कर्मचारियों की उपस्थिति पर सख्ती शुरू कर दी है। पंचायत सरकार भवन में तैनात पंचायत स्तर के कर्मियों को अब नियमित रूप से कार्यालय में मौजूद रहना होगा। उनकी हाजिरी सिर्फ रजिस्टर में दर्ज होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि बायोमीट्रिक सिस्टम से उपस्थिति दर्ज की जाएगी। इसी रिकॉर्ड के आधार पर वेतन भुगतान की व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पंचायत सरकार भवनों में पंचायत स्तर के कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करने को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि संबंधित कर्मचारी रोजाना पंचायत सरकार भवन में उपस्थित होकर अपने निर्धारित कार्यों का निपटारा करें। अगर कोई कर्मचारी लगातार या नियमित रूप से अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इतना ही नहीं, उसकी अनुपस्थिति का असर वेतन पर भी पड़ सकता है।
दरअसल, सरकार के संज्ञान में यह बात आई है कि कई पंचायत सरकार भवनों में पंचायत स्तर के कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति नहीं हो रही है। इसका सीधा असर ग्रामीणों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं पर पड़ रहा है। लोगों को अपने छोटे-छोटे सरकारी काम के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है या फिर संबंधित कर्मचारी की तलाश में कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब सरकार इसी व्यवस्था को बदलने की कोशिश में है।
मुख्य सचिव की ओर से ग्रामीण विकास विभाग, कृषि विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सभी जिलाधिकारियों को भी निर्देश भेजे गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि पंचायत सरकार भवनों में कर्मियों की उपस्थिति की निगरानी की जाए और जो कर्मचारी निर्धारित स्थान पर उपस्थित नहीं रहते हैं, उन्हें चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पंचायत स्तर पर काम करने वाले कई तरह के कर्मचारी इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे। इनमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के राजस्व कर्मचारी, पंचायती राज विभाग के पंचायत सचिव, ग्राम कचहरी सचिव, तकनीकी सहायक, लेखापाल और कार्यपालक सहायक शामिल हैं। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग के पंचायत रोजगार सेवक, आवास सहायक और स्वच्छता पर्यवेक्षक भी पंचायत स्तर पर काम करने वाले कर्मियों में शामिल हैं। कृषि विभाग के किसान सलाहकार तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के विकास मित्र भी इस व्यवस्था का हिस्सा होंगे।
सरकार ने पंचायत सरकार भवनों को गांवों का 'मिनी सचिवालय' बनाने की परिकल्पना की है। इन भवनों में पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए कार्यालय के साथ पंचायत एवं स्थायी समितियों की बैठक के लिए हॉल की व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों के लिए स्वागत कक्ष और विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए सेवा केंद्र भी बनाए गए हैं। यानी मकसद यही है कि गांव के लोगों को जरूरी सरकारी काम के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय तक बार-बार न जाना पड़े।
राज्य में अब तक 3215 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण हो चुका है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि इन भवनों का इस्तेमाल सिर्फ एक सरकारी इमारत के तौर पर न हो, बल्कि यहां से ग्रामीणों को वास्तव में सरकारी सेवाएं मिलें। इसके लिए कर्मचारियों की मौजूदगी सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है।
अब बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था से यह पता लगाना आसान होगा कि कर्मचारी वास्तव में पंचायत सरकार भवन में मौजूद हैं या नहीं। इससे उपस्थिति को लेकर होने वाली लापरवाही पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है। हालांकि असली परीक्षा यह होगी कि बायोमीट्रिक मशीन में दर्ज हाजिरी के साथ-साथ ग्रामीणों को मिलने वाली सेवाओं में भी कितना बदलाव आता है। सरकार ने निगरानी और वेतन को जोड़कर साफ संकेत दे दिया है कि पंचायत स्तर पर ड्यूटी से गायब रहने की पुरानी शिकायतों को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा।