Bihar Panchayat Elections 2026: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, लेकिन अब तक आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने के कारण संभावित उम्मीदवारों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंचायत प्रतिनिधि बनने की तैयारी कर रहे लोग लगातार आरक्षण सूची का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसी के आधार पर वे अपनी चुनावी रणनीति तय कर पाएंगे।


सूत्रों के मुताबिक राज्य स्तर पर पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण संबंधी गाइडलाइन तैयार की जा रही है और इसे 15 जून तक जारी किया जा सकता है। गाइडलाइन जारी होने के बाद पंचायतवार आरक्षण सूची तैयार करने की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।


प्रशासनिक तैयारियां तेज

पंचायत चुनाव को देखते हुए प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर पर विभिन्न तैयारियां की जा रही हैं। चुनावी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के सुरक्षित रख-रखाव के लिए स्टोर और सुरक्षित स्थानों का चयन भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव की तैयारियां लगभग अंतिम चरण में हैं और राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।


पुराने रोस्टर के आधार पर तैयार हो रहा नया आरक्षण प्रारूप

विभागीय सूत्रों के अनुसार वर्ष 2006 और 2016 के पंचायत आरक्षण रोस्टर को राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। इन दोनों रोस्टर का अध्ययन कर नए आरक्षण प्रारूप को तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 का रोस्टर 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया था, जबकि 2006 का रोस्टर उससे पहले की व्यवस्था पर आधारित था। अब दोनों रोस्टर की तुलना कर पंचायतों के लिए नया आरक्षण निर्धारण किया जाएगा।


15 जून के बाद बढ़ेगी प्रक्रिया

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से आरक्षण गाइडलाइन जारी होने के बाद सभी प्रखंडों से पंचायतवार आरक्षण सूची मांगी जाएगी। इसके बाद जिला प्रशासन इन सूचियों का परीक्षण कर अंतिम प्रस्ताव तैयार करेगा और उसे राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेगा। आयोग की मंजूरी मिलने के बाद ही पंचायतों के लिए आधिकारिक आरक्षण सूची जारी होगी। इसी सूची के आधार पर मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्य पदों के चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।


दावा-आपत्ति निपटारे का काम लगभग पूरा

चुनावी प्रक्रिया के तहत दावा-आपत्ति से जुड़े मामलों का निपटारा भी लगभग पूरा कर लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि आरक्षण प्रक्रिया को जल्द अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा है ताकि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने में किसी तरह की देरी न हो। राजनीतिक रूप से सक्रिय लोग और संभावित उम्मीदवार इस प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आरक्षण स्पष्ट होने के बाद ही अधिकांश दावेदार अपने चुनाव प्रचार और संगठनात्मक रणनीति को अंतिम रूप देंगे।हालांकि आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने के कारण अधिकांश दावेदार अभी खुलकर मैदान में नहीं उतर रहे हैं। सभी की नजर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की आगामी घोषणा पर टिकी हुई है।


बहरहाल, वर्ष 2006 और 2016 के आरक्षण रोस्टर को पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। अब आयोग के तरफ से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरक्षण गाइडलाइन जारी होते ही पंचायत चुनाव की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी और इसके बाद गांवों में चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।