Bihar Panchayat Election : बिहार में आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। पंचायत चुनाव से पहले ग्राम पंचायतों और पंचायत प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को नए सिरे से निर्धारित करने की प्रक्रिया ने जोर पकड़ लिया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके तहत इन्यूमरेशन ब्लॉक (EB) की चौहद्दी से जुड़ी जानकारी विशेष मोबाइल एप पर दर्ज की जाएगी। संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को यह काम 10 सितंबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

2011 की जनगणना बनेगी परिसीमन का आधार

पंचायती राज विभाग की अधिसूचना संख्या 10745, दिनांक 20 जुलाई 2026 के आधार पर पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।परिसीमन के दौरान ग्राम पंचायत और पंचायत प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करते समय जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्र का यथासंभव समान वितरण सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। इसका सीधा असर पंचायतों और उनके निर्वाचन क्षेत्रों की मौजूदा सीमाओं पर पड़ सकता है।

मोबाइल एप पर दर्ज होगी चौहद्दी की पूरी जानकारी

पंचायत और वार्डों के परिसीमन के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से विशेष मोबाइल एप तैयार किया गया है। इसी एप के माध्यम से प्रत्येक इन्यूमरेशन ब्लॉक यानी ईबी की चौहद्दी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज की जाएगी।कर्मियों को ईबी की सीमा की जानकारी नौ अलग-अलग दिशाओं में दर्ज करनी होगी। इसमें उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम के अलावा उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और केंद्र शामिल हैं। इस डिजिटल प्रक्रिया के जरिए प्रत्येक ईबी की वास्तविक भौगोलिक स्थिति और सीमा का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

ईबी का नक्शा और जनसंख्या का डेटा उपलब्ध

विभाग की ओर से वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर इन्यूमरेशन ब्लॉक की जनसंख्या और चौहद्दी से संबंधित नक्शा उपलब्ध कराया गया है। संबंधित कर्मी परिसीमन मॉड्यूल के मॉनिटरिंग लॉगिन के माध्यम से इस डेटा और नक्शे को डाउनलोड कर सकेंगे।

इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान जमीनी स्थिति से करते हुए जरूरी जानकारी मोबाइल एप पर दर्ज की जाएगी। माना जा रहा है कि यह डिजिटल प्रक्रिया परिसीमन के काम को व्यवस्थित करने के साथ-साथ रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में भी मदद करेगी।

25 अगस्त को अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण

परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही तैयारियों को आगे बढ़ा चुका है। 25 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल एप पर चौहद्दी की जानकारी दर्ज करने और परिसीमन मॉड्यूल के इस्तेमाल की प्रक्रिया समझाई गई। इसके लिए संबंधित कर्मियों को डेमो एप भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि वास्तविक डेटा दर्ज करने से पहले पूरी प्रक्रिया को समझा जा सके।

10 सितंबर है डेडलाइन

राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत)-सह-जिला दंडाधिकारी को निर्देश दिया है कि वे अपने जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों और संबंधित कर्मियों को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के लिए निर्देशित करें।

जिला पंचायती राज विभाग भी इस काम को निर्धारित समय पर पूरा कराने की तैयारी में जुटा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि परिसीमन की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और इसका पंचायतों की मौजूदा सीमाओं पर क्या असर पड़ता है।

1991 के परिसीमन का रिकॉर्ड भी भेजा जा चुका

जिला पंचायती राज पदाधिकारी रामजन्म पासवान के अनुसार, वर्ष 1991 की जनगणना के आधार पर पंचायतों के पूर्व परिसीमन से जुड़ी जानकारी पहले ही राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जा चुकी है।अब वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके पूरा होने के बाद ग्राम पंचायतों और पंचायत प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण का रास्ता साफ होगा। यानी बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारी अब सिर्फ प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों की पंचायत और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को भी नए सिरे से व्यवस्थित करने की कवायद तेज हो गई है।