Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है। संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह के बीच पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार चुनाव 8 से 9 चरणों में आयोजित किए जा सकते हैं।


चुनाव की तैयारियों के तहत आयोग ने सबसे पहले पंचायतों के सीमांकन और जनसंख्या के आधार पर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए प्रपत्र-1 तैयार किया गया, जिसमें वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया गया है। आयोग ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 15 जून तक की समय सीमा निर्धारित की थी।


जिला गजट का प्रकाशन पूरा

राज्य के विभिन्न जिलों में 20 जून तक जिला गजट का प्रकाशन कर दिया गया। इसके बाद 23 जून तक संबंधित जिलों ने इसकी प्रतियां राज्य निर्वाचन आयोग को उपलब्ध करा दीं। अब आयोग पंचायत स्तर पर आरक्षण सूची और रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया में जुट गया है।


पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की नजरें अब आरक्षण सूची पर टिकी हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि उनके पंचायत, वार्ड या जिला परिषद क्षेत्र में इस बार किस वर्ग के लिए सीट आरक्षित होगी और कौन-कौन चुनाव मैदान में उतर सकेंगे।


जून के अंत तक जारी हो सकती है आरक्षण सूची

राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, जिला गजट प्राप्त होने के बाद पंचायतवार आरक्षण रोस्टर तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जून के अंतिम सप्ताह तक सभी पंचायतों की आरक्षण सूची जारी कर दी जाएगी। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह जनसंख्या के आंकड़ों पर आधारित होती है। इसी कारण आयोग ने पहले जनसंख्या से संबंधित आंकड़ों का सत्यापन कराया और अब उसी आधार पर आरक्षण का निर्धारण किया जा रहा है।


10 साल बाद बदलेगा आरक्षण चक्र

इस बार पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी खासियत आरक्षण रोस्टर में बदलाव को माना जा रहा है। पिछले दो पंचायत चुनावों में अधिकांश क्षेत्रों में एक ही आरक्षण व्यवस्था लागू थी। वर्ष 2016 और 2021 के चुनावों में समान आरक्षण रोस्टर लागू किया गया था।


पंचायती राज नियमों के अनुसार हर दो चुनाव यानी लगभग 10 वर्ष के बाद आरक्षण चक्र में व्यापक बदलाव किया जाता है। इसका मतलब है कि जो सीटें पहले अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग या महिला वर्ग के लिए आरक्षित थीं, वे इस बार सामान्य श्रेणी में आ सकती हैं। वहीं सामान्य सीटें किसी आरक्षित वर्ग के खाते में जा सकती हैं। यदि किसी प्रखंड में 10 पंचायत हैं तो उनमें से कई पंचायतों की आरक्षित श्रेणी बदल जाएगी। इससे चुनावी समीकरण भी पूरी तरह बदलने की संभावना है।


महिलाओं के आरक्षण में भी होगा बदलाव

बिहार पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण पहले की तरह मिलता रहेगा। हालांकि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण भी रोटेशन के आधार पर किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि पिछली बार किसी पंचायत में मुखिया पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित था, तो इस बार वह सीट पुरुष सामान्य, पिछड़ा वर्ग या अन्य किसी श्रेणी की महिला के लिए आरक्षित हो सकती है। इससे कई नए चेहरे चुनावी मैदान में उतरने का अवसर पाएंगे।


छह पदों के लिए होगा चुनाव

पिछले चुनावों की तरह इस बार भी पंचायत चुनाव छह पदों के लिए कराए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का उपयोग किया जाएगा। इन पदों में वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, ग्राम कचहरी के पंच और सरपंच शामिल हैं। सभी पदों के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू होगी और अधिकांश क्षेत्रों में रोटेशन के कारण बदलाव देखने को मिलेगा।


कुल मिलाकर बिहार पंचायत चुनाव 2026 में आरक्षण के नए रोस्टर और सीटों के बदलाव से राजनीतिक और सामाजिक समीकरण बदलते नजर आ सकते हैं। उम्मीदवारों के साथ-साथ मतदाताओं की निगाहें अब राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी होने वाली अंतिम आरक्षण सूची पर टिकी हुई हैं।