Bihar News : बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसके तहत 27 अप्रैल से क्षेत्रवार जनसंख्या के प्रारूप का प्रकाशन किया जाएगा। इस बार का पंचायत चुनाव कई मायनों में खास रहने वाला है, क्योंकि आरक्षण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और पूरी प्रक्रिया डिजिटल मोड में संपन्न कराई जाएगी।


निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 27 अप्रैल से शुरू होकर 29 मई तक चलेगी। सबसे पहले 27 अप्रैल को प्रारूप प्रकाशन होगा, जिस पर आम जनता 11 मई तक दावा और आपत्ति दर्ज करा सकेगी। इसके बाद 14 मई तक आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा, जबकि 18 से 22 मई के बीच अपीलों का निष्पादन होगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 25 मई को किया जाएगा और 29 मई को जिला गजट में इसे प्रकाशित कर दिया जाएगा।


इस चुनाव में जिला परिषद, पंचायत समिति, पंचायत सदस्य, मुखिया, पंच और सरपंच जैसे सभी प्रमुख पद शामिल होंगे। खास बात यह है कि इस बार चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर कराया जाएगा, जिसके अनुसार पंचायत क्षेत्रों की नई जनसंख्या संरचना तय की जाएगी।


चुनाव प्रक्रिया में इस बार हुए भौगोलिक बदलावों का भी असर दिखेगा। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में कई ग्रामीण पंचायतों के हिस्से नगर निकायों में शामिल कर दिए गए हैं। ऐसे में अब शेष बचे पंचायत क्षेत्रों की जनसंख्या का अलग से आंकलन किया गया है। आयोग द्वारा जारी प्रारूप को दो भागों में बांटा गया है—पहले भाग में वे क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें 2015 के बाद कोई भौगोलिक परिवर्तन नहीं हुआ है, जबकि दूसरे भाग में नगर निकायों के गठन से प्रभावित पंचायत क्षेत्रों का विवरण दिया जाएगा। इसके अलावा विलोपित और शेष वार्डों की जानकारी भी अलग से प्रकाशित की जाएगी।


आम लोगों की सुविधा के लिए प्रारूप प्रकाशन ग्राम पंचायत, प्रखंड कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय में किया जाएगा। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसे अपलोड किया जाएगा, ताकि लोग आसानी से अपने क्षेत्र से जुड़ी जानकारी देख सकें और आवश्यक आपत्तियां दर्ज कर सकें।


इस बार पंचायत चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव आरक्षण को लेकर होगा। वर्ष 2016 में आरक्षण में बदलाव किया गया था, जबकि 2021 के चुनाव में इसे यथावत रखा गया था। अब 2026 में ‘रोटेशन प्रणाली’ फिर से लागू की जा रही है। इसका मतलब है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आवंटन नए सिरे से किया जाएगा।


रोटेशन के इस नियम के तहत वे सीटें, जो पिछले दो चुनावों से अनारक्षित थीं, इस बार आरक्षित हो सकती हैं। वहीं जो सीटें पहले आरक्षित थीं, वे इस बार अनारक्षित या किसी अन्य श्रेणी के खाते में जा सकती हैं। आरक्षण का निर्धारण संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा, जिसमें अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसे अवरोही क्रम में लागू किया जाएगा, यानी ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों को पहले आरक्षण का लाभ मिलेगा।


इस बदलाव का सीधा असर स्थानीय राजनीति पर पड़ेगा। कई वर्तमान जनप्रतिनिधियों के लिए अपने पारंपरिक क्षेत्र से चुनाव लड़ना मुश्किल हो सकता है, जबकि नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना बढ़ेगी। महिलाओं के लिए भी इस बार बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित होने की उम्मीद है, जिससे पंचायत स्तर पर उनकी भागीदारी और मजबूत होगी।


निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि इस बार सभी प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समयबद्ध तरीके से काम पूरा हो सकेगा। मतदाता सूची, आरक्षण सूची और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।


कुल मिलाकर, बिहार पंचायत चुनाव 2026 न केवल प्रशासनिक दृष्टि से बल्कि राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरक्षण में बदलाव, जनसंख्या के नए आंकड़े और डिजिटल प्रक्रिया—ये सभी तत्व इस चुनाव को पहले से अलग और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने वाले हैं। अब सभी की नजर 27 अप्रैल पर टिकी है, जब चुनावी प्रक्रिया का पहला अहम चरण शुरू होगा।