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Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में 30 साल पुराने परिसीमन के आधार पर होने जा रहे हैं पंचायत चुनाव, 2.5 लाख से अधिक पदों पर होगा मतदान

बिहार में 2026 में पंचायत चुनाव बड़े बदलाव के साथ होने जा रहे हैं। राज्य में करीब 2,55,379 पदों के लिए मतदाता अपनी पसंद का प्रतिनिधि चुनेंगे। इस बार चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव नए आरक्षण रोस्टर का होगा।

07-Jan-2026 09:22 AM

By First Bihar

Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार में 2026 में पंचायत चुनाव बड़े बदलाव के साथ होने जा रहे हैं। राज्य में करीब 2,55,379 पदों के लिए मतदाता अपनी पसंद का प्रतिनिधि चुनेंगे। इस बार चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव नए आरक्षण रोस्टर का होगा। इसका मतलब है कि जो सीटें वर्तमान में अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं, वे सामान्य कोटे की हो सकती हैं, और सामान्य श्रेणी की कुछ सीटें अब SC, ST या अन्य पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए आरक्षित की जा सकती हैं।


चुनाव को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए 32,000 से अधिक नए M-3 ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) खरीदे जा रहे हैं। इन पर 64 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाने की योजना है। पिछली बार 2021 में पंचायत चुनाव 11 चरणों में हुए थे, लेकिन इस बार अपेक्षा है कि चरणों की संख्या कम होगी, जिससे चुनाव प्रक्रिया तेज और सरल हो सके।


पंचायत परिसीमन: क्या है और क्यों जरूरी है

लोकसभा और विधानसभा की तरह पंचायतों की भी भौगोलिक सीमाएँ होती हैं। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, वार्ड और जिला परिषद के लिए सीमाएँ तय की जाती हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पंचायत परिसीमन (Panchayat Delimitation) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी राज्य की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की भौगोलिक सीमाओं का निर्धारण किया जाता है।


परिसीमन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक प्रतिनिधि लगभग समान जनसंख्या का प्रतिनिधित्व कर सके। समय के साथ किसी इलाके की जनसंख्या बढ़ती या घटती है। अगर किसी पंचायत की जनसंख्या अत्यधिक बढ़ जाती है तो परिसीमन के दौरान उसे विभाजित करके नई ग्राम पंचायत बनाई जा सकती है। इसी तरह, पंचायत के अंदर वार्डों की संख्या और उनकी सीमाएँ भी जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर तय की जाती हैं।


परिसीमन क्यों अटका

बिहार में पंचायत चुनाव 2026 के लिए नए परिसीमन पर होने की योजना पहले बनाई गई थी। लेकिन 2021 की जनगणना नहीं होने के कारण परिसीमन नहीं हो सका। वर्तमान में आधिकारिक रूप से यह नहीं पता है कि किस पंचायत की जनसंख्या कितनी है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इस बार परिसीमन के लिए 2011 के डाटा बेस का उपयोग करना होगा, जो अब 15 साल पुराना हो चुका है।


राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, बिहार में पंचायतों का अंतिम परिसीमन 1994-95 में 1991 की जनगणना के आधार पर किया गया था। 2001 में पंचायत चुनाव हुए थे। 2011 की जनगणना हुई, लेकिन परिसीमन नहीं किया गया। इसके बावजूद 2011, 2016 और 2021 में पंचायत चुनाव कराए गए। इन वर्षों में कई ग्रामीण इलाके शहरी निकायों में शामिल हो गए। ऐसे मामलों में केवल छोटे बदलाव करते हुए चुनाव संपन्न कराए गए।


आरक्षण रोस्टर और नियम

बिहार पंचायत राज अधिनियम की धारा 13, 38, 65 और 91 के तहत आरक्षण रोस्टर प्रत्येक दो क्रमिक चुनावों के बाद बदला जाता है। पिछला रोस्टर 2016 और 2021 के चुनावों में लागू रहा। इसलिए 2026 के पंचायत चुनाव के लिए नया आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा।


आरक्षण के अंतर्गत, SC, ST और EBC वर्ग की सीटें उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षित की जाती हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी पंचायत में SC की आबादी 25% है, तो वहां के पदों में 25% SC वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। इसी तरह EBC वर्ग के लिए लगभग 20% आरक्षण निर्धारित होता है। कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं होगा।


महिलाओं को पंचायत चुनाव में 50% आरक्षण दिया गया है। महिलाओं को वर्गवार आरक्षण के अंतर्गत सीटें दी जाती हैं। यानी किसी वर्ग के लिए अगर 50 सीटें आरक्षित हैं, तो उनमें से 25 सीटें उसी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।


पदों का आरक्षण जिला मजिस्ट्रेट (DM) तय करेंगे। ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्यों का आरक्षण उनके कुल पदों की संख्या के आधार पर होगा। मुखिया पद का आरक्षण पंचायत समिति के अंदर आने वाली ग्राम पंचायतों की संख्या के अनुसार तय होता है। इसी तरह, पंचायत समिति के सदस्यों और प्रखंड प्रमुख या जिला परिषद अध्यक्ष पदों का आरक्षण संबंधित पदों की कुल संख्या के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।


इस बार बिहार पंचायत चुनाव 2026 में 30 साल पुराने परिसीमन को अपडेट करने, नए आरक्षण रोस्टर को लागू करने और नई ईवीएम मशीनों के माध्यम से मतदान प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की तैयारी है। इससे न केवल चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारू होगी, बल्कि पंचायत स्तर पर प्रतिनिधित्व का स्वरूप भी जनसंख्या और सामाजिक वर्गों के अनुरूप होगा। ग्रामीण और शहरी बदलावों को ध्यान में रखते हुए परिसीमन और आरक्षण रोस्टर का यह नया संयोजन बिहार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत करेगा।