Bihar Panchayat Election : बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। अगले पंचायत चुनाव से पहले राज्य में पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जाना है। परिसीमन पूरा होने के बाद ग्राम पंचायतों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही मुखिया, सरपंच और ग्राम कचहरी से जुड़े पदों की संख्या भी बढ़ने की संभावना है। मौजूदा संख्या की तुलना में यह बढ़ोतरी करीब 60 फीसदी तक हो सकती है। हालांकि, पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। चुनाव कार्यक्रम परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय किए जाने की संभावना है। ऐसे में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों को नई पंचायत सीमाओं और आरक्षण व्यवस्था का इंतजार करना होगा।
करीब 4 हजार बढ़ सकते हैं मुखिया के पद
बिहार में वर्तमान समय में करीब 8,053 ग्राम पंचायतें हैं। प्रस्तावित नए परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या में करीब 5 हजार की वृद्धि हो सकती है। ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़ने का सीधा असर मुखिया के पदों पर पड़ेगा। वर्तमान में जितनी ग्राम पंचायतें हैं, उतने ही मुखिया के पद हैं। नई पंचायतों के गठन के बाद मुखिया के पदों की संख्या भी बढ़ जाएगी। अनुमान के मुताबिक यह बढ़ोतरी करीब 60 फीसदी या उससे अधिक हो सकती है। इस बदलाव से पंचायत चुनाव में दावेदारी करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ सकती है। जिन इलाकों में अभी एक बड़ी पंचायत के अंतर्गत कई गांव आते हैं, वहां आबादी और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर अलग-अलग पंचायतों का गठन किया जा सकता है।
सरपंच और ग्राम कचहरी के पद भी बढ़ेंगे
परिसीमन का असर केवल मुखिया के पदों तक सीमित नहीं रहेगा। ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़ने के साथ सरपंच और ग्राम कचहरी से जुड़े पदों की संख्या में भी इजाफा होने की संभावना है। नई पंचायतों के गठन के बाद कई गांवों को नई पंचायत में शामिल किया जा सकता है। वहीं, अधिक आबादी वाली पंचायतों को छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों में बांटने की प्रक्रिया भी हो सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले पंचायत चुनाव में कई क्षेत्रों का राजनीतिक और भौगोलिक स्वरूप मौजूदा व्यवस्था से अलग दिखाई दे सकता है। ऐसे में वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों के साथ-साथ नए उम्मीदवारों को भी यह देखना होगा कि परिसीमन के बाद उनका गांव किस पंचायत का हिस्सा बनता है और संबंधित पद किस पंचायत क्षेत्र में आता है।
2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन
पंचायतों के नए परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाए जाने की बात सामने आ रही है। आबादी के आधार पर पंचायत और वार्डों की सीमाएं तय की जाएंगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत करीब 7 हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत और करीब 500 की आबादी पर एक वार्ड बनाने का प्रावधान बताया जा रहा है। हालांकि, अंतिम स्वरूप परिसीमन की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित स्तरों से मंजूरी मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा। आबादी के आधार पर सीमाओं का निर्धारण होने से बड़ी आबादी वाले पंचायत क्षेत्रों का नए सिरे से बंटवारा हो सकता है। वहीं, छोटे या कम आबादी वाले क्षेत्रों को जरूरत के अनुसार दूसरे पंचायत क्षेत्रों के साथ समायोजित किया जा सकता है।
आरक्षण व्यवस्था में भी हो सकता है बदलाव
पंचायतों के परिसीमन के साथ आरक्षण चक्र में भी बदलाव होने की संभावना है। इसका मतलब यह है कि पिछली बार जिस पंचायत या पद पर जिस वर्ग के लिए आरक्षण था, जरूरी नहीं कि अगले चुनाव में भी वही आरक्षण लागू रहे।नए परिसीमन के बाद पंचायतों और वार्डों की नई संरचना तैयार होगी। इसके बाद आरक्षण की प्रक्रिया भी नए सिरे से निर्धारित की जा सकती है। इससे चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की रणनीति पर सीधा असर पड़ेगा। कई उम्मीदवार लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन परिसीमन के बाद उनकी पंचायत, वार्ड या पद की स्थिति बदल सकती है। इसलिए उम्मीदवारों के लिए अंतिम परिसीमन और आरक्षण सूची काफी महत्वपूर्ण होगी।
परिसीमन के बाद ही चुनाव कार्यक्रम पर फैसला
बिहार में पंचायत चुनाव कब होंगे, इसे लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम तय किया जाएगा। यानी चुनाव की तारीखों पर अंतिम निर्णय नई पंचायत सीमाओं और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर बिहार में आगामी पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यदि ग्राम पंचायतों की संख्या करीब 8 हजार से बढ़कर 13 हजार के आसपास पहुंचती है, तो मुखिया और सरपंच समेत पंचायत स्तर के कई पदों की संख्या में भी बड़ा इजाफा होगा।
अब सभी की नजर परिसीमन की प्रक्रिया पर है। इसकी अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस जिले में कितनी नई पंचायतें बनेंगी, किन गांवों की सीमाएं बदलेंगी और किस पद पर कितना बदलाव होगा। इसके साथ ही आरक्षण सूची जारी होने के बाद चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो जाएगी।